भास्कर विशेष / एनसीसी से इतना प्यार कि इंजीनियरिंग में दाखिले के वक्त रो पड़ी थीं देश की पहली महिला फ्लाइट कमांडर धामी



special talk with Shailja Dhami Family the first lady flight commander of India
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special talk with Shailja Dhami Family the first lady flight commander of India

  • भारतीय वायुसेना में देश की पहली महिला फ्लाइट कमांडर बनी लुधियाना की बेटी के परिवार से बातचीत
  • मां देव कुमारी ने कहा, धामी पढ़ने में कमजोर थी, लेकिन जो ठान लेती थी उसे पूरा करके ही रहती थी

Dainik Bhaskar

Sep 01, 2019, 11:26 AM IST

लुधियाना. देश के लिए अपना बलिदान देकर देश को आजाद करवाने के लिए योगदान देने वाले शहीद करतार सिंह सराभा के नाम से प्रसिद्ध गांव में पली-बड़ी शैलजा धामी ने भारतीय वायुसेना बल की पहली महिला फ्लाइट कमांडर बनकर इतिहास रचा है। शैलजा ने हिंडन एयरबेस पर चेतक हेलिकॉप्टर यूनिट की फ्लाइट कमांडर का पदभार संभाला है।

 

लुधियाना की शैलजा 15 साल से इंडियन एयरफोर्स में कार्यरत हैं और ऐसा पहली बार नहीं है जब उन्होंने कोई इतिहास रचा हो। इससे पहले भी शैलजा पहली महिला फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर रह चुकी हैं और फ्लाइंग ब्रांच की परमानेंट कमीशन प्राप्त करने वाली पहली महिला हैं। यानी उन्हें लंबे कार्यकाल (13 साल से ज्यादा) के लिए फ्लाइंग ब्रांच में परमानेंट कमीशन दिया गया है।

 

बिजली बोर्ड से एसडीओ रिटायर्ड हरकेश धामी और वाटर सप्लाई एंड सेनिटेशन से रिटायर्ड देव कुमारी ने बताया कि स्कूल की पढ़ाई खत्म होने के बाद शैलजा का इंजीनियरिंग काॅलेज में एडमिशन करवाना था। एडमिशन के लिए जालंधर में पैसे जमा करवाने के लिए जा रहे थे तभी शैलजा जोर-जोर से रोने लगी। उसे एनसीसी से इतना लगाव था कि वह इसे छोड़ने को तैयार नहीं थी। शैलजा ने कहा कि अगर वह इंजीनियरिंग करने जाएगी तो उसकी एनसीसी छूट जाएगी।

 

सिलेक्शन के दौरान मेडिकल टेस्ट में रह गई थी शैलजा

शैलजा के पिता ने बताया कि शैलजा का बीएससी का रिजल्ट आना बाकी था कि उसकी सलेक्शन फ्लाइंग एयरफोर्स में हुई। मेडिकल टेस्ट के दौरान हाइट में विघन पड़ गया। रुल्स के मुताबिक हाइट पूरी थी, परंतु दिल्ली में जब मेडिकल हुआ तो उसे फेल कर दिया गया। उसके बाद लुधियाना आकर सीएमओ से दोबारा मेडिकल करवा कर मेडिकल रिपोर्ट भेजी गई। उसके बाद एफएमसी पूणे में दोबारा मेडिकल हुआ। जिसमें शैलजा की हाइट रुल के मुताबिक ठीक पाई गई।

 

12वीं कक्षा में रखी एनसीसी के बाद बढ़ा जज्बा
शैलजा के पिता हरकेश धामी ने बताया कि लुधियाना के कपूर अस्पताल में शैलजा का जन्म हुआ है। शैलजा ने पहली से 10वीं कक्षा पीएयू के सरकारी स्कूल से की है। इसके बाद 12वीं से बीएससी नाॅन मेडिकल की पढ़ाई खालसा काॅलेज घुमार मंडी से की। 12वीं में एनसीसी एयर विंग में रखी। पढ़ाई के दौरान ही हिसार में हुई ओपन ग्लाइडिंग टूर्नामेंट में स्पोट लैंडिंग में दूसरा स्थान पाया। इस जीत से शैलजा को इतना हौसला मिला कि उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

 

री-पब्लिक डे पर लाई थी मेडल
पढ़ाई के दौरान ही दिल्ली में री-पब्लिक डे पर शैलजा ने पैरा ग्लाइडिंग में मैडल हासिल किया। उस दौरान गवर्नर ऑफ पंजाब ने चाय पिलाकर कर शाबाशी दी थी। इसके बाद रक्षा मंत्री ने री-पब्लिक डे पर जीतने वाले 18 बच्चो को चाय पर बुलाकर सम्मानित किया था।

 

बच्चों से कम होती है बात
शैलजा के माता-पिता ने बताया कि शैलजा से उनकी बात बहुत कम होती है। वह पढ़ने में इतनी भी तेज नहीं थी लेकिन जो ठान लेती थी उसे पूरा करती थी। उसकी शादी देहरादून में 2004 में विंग कमांडर विनीत जोशी से हुई। बिजी शैड्यूल होने के चलते कभी कभी बात होती है।

 

हमने पीएबीटी का टेस्ट देने से कर दिया था मना

पिता हरकेश ने बताया कि पढ़ाई के दौरान उसे पीएबीटी का टेस्ट देने का मौका मिला था। शैलजा ने कहा कि पापा तैयारी नहीं है और मैं टेस्ट नहीं दे सकती। काॅलेज में एनसीसी के सर ने उसे पेपर देने को कहा और पढ़ने को बुक भी दी। घर आने पर हमने भी उसे टेस्ट देने से मना कर दिया। सुबह सर का फोन शैलजा को आया तो उसने कहा कि वह टेस्ट नहीं दे रही हैं। सर के कहने पर उसने बाद में टेस्ट दिया। स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड की ओर से अंत में तीन बच्चों को चुना गया। इसमें लुधियाना, चंडीगढ़ और एमपी के बच्चे थे।

 

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