रिसर्च का गिरता स्तर रोकने को एकेडेमिक एथिक्स पर बनाई जा रही है नेशनल पॉलिसी

Ludhiana News - एजुकेशन रिपोर्टर | लुधियाना एकेडेमिक एथिक्स यानी शिक्षा में हो रही नीति की कमी के मद्देनजर अब राष्ट्रीय स्तर पर...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:10 AM IST
Ludhiana News - the prevention level of research is being done on academic ethics national policy
एजुकेशन रिपोर्टर | लुधियाना

एकेडेमिक एथिक्स यानी शिक्षा में हो रही नीति की कमी के मद्देनजर अब राष्ट्रीय स्तर पर एकेडेमिक्स एथिक्स पर नेशनल पॉलिसी बनाने का निर्णय लिया गया है। इस पॉलिसी के तहत टीचिंग और रिसर्च को सुधारना, प्लेजरिज्म को रोकना, पब्लिकेशन, पक्षपात को बढ़ावा न देना के साथ ही इन नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ एक्शन लेने का भी प्रावधान तैयार किया जा रहा है। केंद्र सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर डिपार्टमेंट की ओर से ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। इसके लिए संस्थानों से इस ड्राफ्ट पर उनकी राय पूछी गई है। पिछले कुछ सालों में क्वालिटी एजुकेशन में गिरावट देखने को मिल रही है। एक ओर जहां संस्थानों की गिनती बढ़ रही है। वहीं, स्टूडेंट्स को अपने संस्थान में लाने की होड़ में शिक्षा और रिसर्च का स्तर गिर रहा है और रिसर्च में भी कुछ नया बदलाव या नई सोच देखने को नहीं मिल पा रही है। एेसे समय में पॉलिसी का निर्माण और उसे लागू करवाना बेहद जरूरी हो चुका है। शिक्षाविदों के अनुसार क्वालिटी एजुकेशन के मायनों को सभी को समझना होगा। इसमें सबसे पहले संस्थान को अपनी जिम्मेदारी को समझने की जरूरत है। वहीं, शिक्षकों को भी अपने काम को गंभीरता से लेते हुए स्टूडेंट्स के विकास में योगदान देना चाहिए।

टीचिंग-रिसर्च को सुधारना, पब्लिकेशन, पक्षपात को बढ़ावा न देने का प्रावधान

एकेडेमिक एथिक्स पॉलिसी में टीचिंग, रिसर्च और एडमिनिस्ट्रेशन में होने वाली हर गतिविधि को शामिल किया गया है। इस पॉलिसी को हर शिक्षण संस्थान के हर सदस्य को मानना होगा। पॉलिसी में नैतिक आचरण पर नीति बनाई गई है। इसमें निचले स्तर से लेकर उच्च अधिकारी तक को शामिल किया गया है। अध्यापकों को जहां किसी भी तरह का पक्षपात करने की मनाही होगी। वहीं, टीचिंग और रिसर्च में स्टूडेंट्स का चुनाव इंटरव्यू के आधार पर करना होगा। स्टूडेंट्स को भी इस नीति में शामिल किया गया है। इसमें नकल न करना, क्लासरूम की गरिमा को बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी होगी। अध्यापकों को स्टूडेंट्स में प्रोफेशनलिज्म को बढ़ावा देने, रिसर्च में प्रिंसिपल इनवेस्टीगेटर की अहम भूमिका, रिसर्च के दौरान प्लेजरिज्म और डाटा फ्रॉड को बढ़ावा न देने के लिए प्रेरित करना होगा। रिसर्च आर्टिकल में असल लेखक को क्रेडिट न देने की प्रथा का सख्त विरोध है। वहीं, प्रिडेटरी जर्नल्स में लेख छपवाने के बढ़ रहे ट्रेंड पर भी चिंता जाहिर कर संस्थान को इसे रोकने के लिए आगे आने और एक्शन लेने के लिए कहा गया है। संस्थान के किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी तरह का पक्षपात न करने, महिलाओं को बराबर के अवसर देना, लिंग के आधार पर शोषण न करने, संस्थान में गलत भाषा का प्रयोग न करना को भी इस पॉलिसी में शामिल किया गया है। इसके अलावा पब्लिक इंटरएक्शन और संस्थान में प्रोफेशनलिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी नियम है। इस पॉलिसी के लागू होने पर हर संस्थान को अपने मुलाजिमों को इसके बारे में बताना होगा। साथ ही संस्थान में स्टेंडिंग कमेटी का भी निर्माण किया जाएगा, जोकि पॉलिसी तोड़ने वालों के खिलाफ एक्शन लेंगे। एक्शन दो तरह के रहेंगे। इसमें प्लेजरिज्म के केस में उसे सही करवाया जाएगा। लेकिन अगर किसी कर्मचारी द्वारा शोषण, पक्षपात और पॉलिसी का कोई भी अन्य नियम तोड़ा जाता है तो पहली बार वार्निंग दी जाएगी। एक से ज्यादा बार नियम तोड़ने पर और दोषी पाए जाने पर उस कर्मचारी को संस्थान से निकाला भी जा सकता है।

अध्यापक करेंगे नियमों का पालन


संस्थान के हर सदस्य को माननी होगी पॉलिसी

फैक्ट बेस्ड स्टडी की जरूरत


क्वालिटी रिसर्च वर्क पर हो काम


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