दुनिया अपने कर्मों से तो सिर्फ 5% दुखी है, पर तृष्णा से ज्यादा त्रस्त है : शीतल मुनि

Ludhiana News - सिविल लाइंस स्थित जैन स्थानक में विराजमान गुरु अचल मुनि के शिष्य शीतल मुनि ने कहा कि कभी-कभी यथा लाभ संतोष का भाव भी...

Dec 04, 2019, 08:30 AM IST
Ludhiana News - the world is only 5 saddened by its deeds but more afflicted than trishna sheetal muni
सिविल लाइंस स्थित जैन स्थानक में विराजमान गुरु अचल मुनि के शिष्य शीतल मुनि ने कहा कि कभी-कभी यथा लाभ संतोष का भाव भी रखो। कभी-कभी हाय-हाय में ना जिओ बल्कि अहो भाव में जियो। हमें जो मिला है वो अपने कर्मो व अपनी मेहनत से मिला है। अगर संसार में सुख चाहिए तो नीचे की ओर देखो। फिर हमारे मन में तृष्णा नहीं जागेगी। पर आज इंसान संतोष में ना जी कर मर्यादा को तोड़ता हुआ जी रहा है। इसी का परिणाम है कि खाने-पीने की वस्तुओं में मिलावटें बढ़ती चली जा रही हैं। माप-तोल में गड़बड़ हो रही है। एक दूसरे की पेमेंट रोकी जा रही है। अंधाधुंध कर्ज लिए जा रहे हैं। इसी लोभ के वशीभूत होकर आज इंसान रातों रात करोड़पति बनना चाहता है और इस चाह में इंटरनेट पर सोना चांदी का सट्टा लगा देता है। करोड़पति की बचाए रोडपति बन जाता है। घर से बेघर हो जाता है। आज कल धर्म स्थानों पर भी लोग इच्छा पूरी करने आते हैं, खत्म करने के लिए नहीं। दुनिया अपने कर्मों से तो सिर्फ 5 % दुखी है, परंतु तृष्णा के कारण ज्यादा दुखी है। अपने दिन की शुरुआत प्रसंन्नता और प्रणाम से करिए। जो व्यक्ति सुबह उठते ही 1 मिनट भी मुस्कुराता है, उसे पूरा दिन का पावर टॉनिक मिल जाता है। जो व्यक्ति मां-बाप, गुरु और प्रभु के चरणों में माथा टेकता है, उसे जिंदगी में कभी किसी के सामने घुटने नहीं देखने पड़ते। जिसके पास दुआओं की दौलत है, सही मायने में वही अमीर है। इसी दौलत की बदौलत ही व्यक्ति दौलतमंद होता है। जिस प्रकार पके हुए फल की तीन पहचान होती हैं। एक तो वह नरम हो जाता है, दूसरा वह मीठा हो जाता है, तीसरा उसका रंग बदल जाता है। इसी तरह से परिपक्व व्यक्ति की भी तीन पहचान होती हैं। पहली उसमें नम्रता आ जाती है, दूसरी उसकी वाणी में मिठास होती है और तीसरी उसके चेहरे पर आत्म विश्वास का रंग होता है। शीतल मुनि जी ने कहा कि क्रोध अग्नि की तरह होता है। क्रोधी व्यक्ति पहले स्वयं को जलाता है, फिर औरों को जलाता है। अतिशय मुनि जी ने कहा कि जिस दिन तुम्हें अपने हाथ, पैर और दिल पर भरोसा हो जाएगा, उसी दिन तुम्हारी अंतरात्मा कहेगी कि बाधाओं को कुचल कर तुम अकेले चलो। अंत में जीत तुम्हारी ही होगी। कभी भी खतरों से मत घबराओ। परेशानी उन्हीं के रास्ते में आती है, जो कुछ करने को उद्यत एवं तैयार होते हैं। दुनिया का सबसे मुश्किल काम अपने काम से काम रखना है।

सिविल लाइंस स्थित जैन स्थानक में प्रवचन सभा में श्रद्धालुओं ने लगाई हाजिरी।

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