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निगम की सफाई संबंधी रेटिंग के वेरिफिकेशन के बाद मिलेगी ग्रांट

गत तीन वर्षों से केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए स्वच्छता अभियान को मिल रहे खराब परफार्मेंस के बाद अब केंद्र सरकार ने...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 03, 2018, 02:45 AM IST

निगम की सफाई संबंधी रेटिंग के वेरिफिकेशन के बाद मिलेगी ग्रांट
गत तीन वर्षों से केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए स्वच्छता अभियान को मिल रहे खराब परफार्मेंस के बाद अब केंद्र सरकार ने सिटी डेवलपमेंट के लिए दी जाने वाली ग्रांट के साथ शहर के सफाई अभियान को जोड़ दिया है। इसके लिए तय मानकों के अनुसार नगर निगम को स्वयं रेटिंग देनी होगी, उसके वेरिफिकेशन के बाद ही केंद्र उस अनुसार ग्रांट जारी करेगा।

यहां बता दें कि केंद्र ने पहले से इस ग्रांट के लिए चल रही मुफ्त सुविधाओं को बंद करने की रखी शर्तों को भी ज्यूं का त्यूं रखा हुआ है। अब जो केंद्र ने स्टार रेटिंग रखी है, उसमें वन से सेवन तक की रेटिंग निगम को खुद को देनी होगी। स्वच्छता अभियान को सख्ती से लागू करने के लिए केंद्र ने इस रेटिंग को रखा है। इस रेटिंग अनुसार शहर को कचरामुक्त बनाना है। खुले में शौच से मुक्त बनाना है, कचरे को प्रोसेसिंग प्लांट तक ले जाना है और वेस्ट प्लांट को चलाना है। अब स्वच्छ भारत अभियान के तहत होने वाले कार्यों को निगम को रोजाना करने होंगे।

स्वच्छता अभियान को सख्ती से लागू करने के लिए केंद्र ने रेटिंग की शर्त लगाई, उसी के आधार पर ग्रांट भी जारी करेगा

इस प्रोजेक्ट में इन कामों को किया गया शामिल

इस रेटिंग प्रोजेक्ट में जिन कामों को शामिल किया गया है, उनमें डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, सफाई, वेस्ट मैनेजमेंट, डंपों को कवर करना जरूरी है। यहां बता दें कि यही काम स्वच्छता सर्वे में जरूरी होते हैं।

सफाई मुलाजिमों की कमीयूं तो मोगा नगर निगम बाकी निगमों को मुकाबले अमीर निगमों में आंका जाता है। मोगा नगर निगम की आमदनी लाभ वाली है परंतु निगम की बचत हर साल घाटे की भेंट चढ़ने लगी है, क्योंकि प्राॅपर्टी टैक्स, पानी व सीवरेज के बिलों की कलेक्शन में निगम का परफारमेंस ठीक नहीं है। यही नहीं गत पांच सालों से समाप्त हुए हाउस टैक्स के 3 करोड़ के बकाए को रिकवर करने में निगम नाकाम रहा है। सफाई कर्मियों की भी कमी है। इस समय निगम के पास जितने सफाई कर्मी हैं वो शहर का 65 प्रतिशत हिस्सा ही साफ करने की क्षमता रखते हैं, परंतु ड्यूटियां लगाने की मिस मैनेजमेंट के चलते शहर 50 प्रतिशत भी साफ नहीं हो पाता। इस समय पक्के सफाई कर्मियों की संख्या 385 है और मोहल्ला सेनिटेशन में 41 हैं, जबकि 170 की और जरूरत है।

स्टार रेटिंग की होगी वेरिफिकेशन

इनमें हम अभी बहुत पीछे |इस प्रोजेक्ट में जो काम तय किये गए है, उनमें हम अभी बहुत पीछे हैं।

डोर टू डोर कचरा कलेक्शन: इसमें जुलाई 2016 के बाद अभी तक नगर निगम डोर टू डोर कचरा कलेक्शन के लिए किसी कंपनी से करार नहीं कर सका है। सेग्रिगेशन नहीं: क्योंकि डोर टू डोर कचरा उठाने वाली कंपनी ही नहीं है। इसलिए अभी घरों से कचरा उठाने वाले गीला और सूखे कचरे को अलग-अलग नहीं ले जा पाते। वेस्ट प्रोसेस- प्लांट के लिए जमीन तो है परंतु कंपनियों से बातचीत ही चल रही है।

सफाई- शहर में कुल 650 किलोमीटर सड़कें हैं और सफाई सेवक 426 हैं, जिससे शहर की 325 किलोमीटर सड़कें ही साफ हो पाती हैं। प्लास्टिक बैन पर काम हो ही नहीं रहा। डंपों को कवर नहीं किया जाता। डस्टबिन फेसेलिटी- नाम मात्र। अंडरग्राउंड डंपों के लिए जगह नहीं है। बरसाती नालों की सफाई भी नहीं होती

इसमें नगर निगम में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन, सफाई, वेस्ट मैनेजमेंट, खुले में शौच से मुक्त, कवर डंपों संबंधी खुद को रेटिंग देगा, जिसकी वेरिफिकेशन के बाद नोटिफिकेशन होगी।

ग्रांट के लिए यह करना होगा

डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए 60 प्रतिशत काम होने पर 1 रेटिंग मिलेगी, 100 प्रतिशत होने पर 3 से 7 स्वीपिंग हर हाल में 100 प्रतिशत हो। दो डस्टबिन 25 प्रतिशत होने पर 1 रेटिंग व 100 प्रतिशत होने पर 4 से 7 तक रेटिंग मिलेगी। सेग्रिगेशन 25 प्रतिशत पर 1 व 100 पर 4 से 7 वेस्ट प्लांट शुरु होने वाला है तो 1 पूरे नियमों वाला है तो 4 से 7 अंक देनी है।

कमियों को दूर कर रहे हैं : मेयर

नगर निगम के मेयर अक्षित जैन ने कहा कि अभी हम सेग्रिगेशन अवेयरनैस कर रहे हैं। कुछ कमियां हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है।

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