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मोगा में धान की रोपाई शुरू, 1.74 लाख हेक्टेयर में होगी फसल लेबर की कमी गंभीर समस्या और बिजली भी 6 घंटे ही मिल रही

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 08:25 AM IST

Moga News - भूमिगत पानी के दिन प्रति दिन गिर रहे स्तर से चिंतित पंजाब सरकार ने पहले राज्य भर में 20 जून से धान की बिजाई शुरू करने...

Moga News - plantation of paddy in moga will start 174 lakh hectare will be due to lack of crop labor serious problem and electricity is available for 6 hours only
भूमिगत पानी के दिन प्रति दिन गिर रहे स्तर से चिंतित पंजाब सरकार ने पहले राज्य भर में 20 जून से धान की बिजाई शुरू करने की घोषणा की थी परंतु किसान यूनियनों की 10 जून से धान की रोपाई शुरू करने की मांग के मद्देनजर पंजाब सरकार ने इस तारीख को 13 जून कर दिया था। इस लिए वीरवार को जिले भर में जगह-जगह खेतों में मजदूर धान की रोपाई करते नजर आए। हालांकि किसानों का कहना है कि इसके लिए प्रवासी लेबर कम आई है, जिससे उन्हें रोपाई में तेजी आने में दिक्कत आ रही है। इस बार जिले के 51,229 किसान परिवार 1.74 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की रोपाई करेंगे। हालांकि गत 5 वर्षों में धान की भूमि का रकबा 15 हजार हेक्टेयर ही कम हुआ है। जिले में 1.89 लाख हेक्टेयर भूमि कृषियोग्य है। पहले 5, फिर 8 और इस साल 15 हजार हेक्टेयर भूमि बागबानी व अन्य बदलवीं फसलों के लिए इस्तेमाल होने से इस बार 1.74 लाख हेक्टेयर पर धान की रोपाई होगी, जो वीरवार को शुरू हो गई है।

धान की बिजाई पर 45000 रुपए प्रति एकड़ खर्चा आता है। इस संबंधी किसान नेता सुखदेव सिंह कोकरी ने बता कि धान की बिजाई से लेकर उसको पालने में 1800 रुपए प्रति क्विंटल खर्चा आता है। एक एकड़ में 25 क्विंटल झाड़ निकलता है। ऐसे में एक एकड़ पर 45000 रुपए का खर्चा आता है। इस बार धान की बुआई के लिए लेबर 2000 से 2500 रुपए तक प्रति एकड़ ले रहा है।

किसान नेता सुखदेव सिंह कोकरी ने कहा कि पंजाब सरकार ने धान की बीजाई 13 जून से शुरू तो करा दी है परंतु आज भी बिजली सप्लाई 6 घंटे दी है। इसे 12 घंटे किया जाए।

किसानों का दर्द : रोपाई की मशीनें महंगी, सहकारी सभाएं मशीनरी खरीदतीं तोे किसान किराये पर लेकर करवा लेते काम

मोगा जिले के लोहारा गांव में धान की रोपाई करती लेबर।

धान का मूल्य

वित्तीय वर्ष एमएसपी

2013-14 1345

2014-15 1400

2015-16 1450

2016-17 1510

2017-18 1590

2018-19 1770

लागत

प्रति एकड़ पूरा खर्च

45000 रुपए

मजदूरी

2000 से 2500 रुपए

समस्या

बिजली सप्लाई 6 घंटे दी जा रही है। किसान इसे 12 घंटे करने की मांग कर रहे।

कृषि अधिकारी हरिंदर सिंह का कहना है कि फसली चक्र को बदलने के लिए साल में 12 सेमिनार किए गए और 4 किसान मेलों का आयोजन किया गया। साथ ही धान व गेहूं की सीधी बिजाई के लिए भी किसानों को प्रेरित किया गया परंतु अभी तक 1.89 लाख हेक्टेर कृषियोग्य भूमि में 15000 हेक्टेयर ही अन्य फसलों को बाेया जा रहा है। इसलिए इस बार 1.74 लाख हेक्टेयर पर धान की बिजाई होगी। गेहूं की बिजाई 1.76 लाख हेक्टेयर भूमि पर हुई थी।

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प्रवासी लेबर की आ रही समस्या

इस बार किसानों को प्रवासी लेबर की समस्या आ रही है। धल्लकलां से किसान अमरजीत सिंह, धल्लेके से राजविंदर सिंह, दोसांझ से इंद्रजीत सिंह का कहना है कि धान की पनीरी 20 मई से लगाई गई है, तबसे प्रवासी मजदूरों की कमीं चली आ रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब में प्रवासी मजदूर बहुत कम आए हैं। धान की रोपाई में माहिर होने व सस्ते होने के चलते किसानों की पहली पसंद प्रवासी मजदूर हैं। पंजाबी लेबर महंगी होने के चलते पहले पनीरी लगाने व अब धान की रोपाई में ज्यादा लागत आएगी। उन्होंने कहा कि धान की रोपाई की मशीनें महंगी होने के चलते इनको खरीदना मध्यमवर्गीय व छोटे किसानों के बस की बात नहीं। सरकार के बार-बार कहने के बावजूद भी सहकारी सभाएं भी इस मशीनरी को खरीद नहीं रही है। जिनसे किसान यह मशीनें किराए पर ही ले लें। किसानों ने बताया कि एक एकड़ में 10 से 15 लेबर की जरूरत होती है।

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