आधुनिकता के दाैर ने कुम्हारों से उनका रोजगार छीना

Moga News - फ्रिजों ने मिट्टी के घड़ों की कदर कम दी है। इनका ठंडा व मीठा पानी स्वास्थ के लिए तो लाभदायक था, परंतु अब यह लुप्त होते...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:30 AM IST
Ajitwal News - the modernity of the potters took their job
फ्रिजों ने मिट्टी के घड़ों की कदर कम दी है। इनका ठंडा व मीठा पानी स्वास्थ के लिए तो लाभदायक था, परंतु अब यह लुप्त होते जा रहे हैं। इस आधुनिक जमाने और सुविधा की वजह से मिट्टी के घड़े बनाने वालों के बुरे दिन आ गए हैं। इससे कुम्हारों के चाक की स्पीड कम हो गई है।

अब भी किसी आस से गर्मी आते ही कुम्हार सड़क के किनारे साधारण व रंग-बिरंगे घड़े सजाकर बैठ जाते हैं। लेकिन उनके चेहरों पर पहले जो रौनक होती थी, अब नहीं दिखती। आधुनिकता के दाैर ने कुम्हारों के हाथ से उनका रोजगार छीन लिया है। क्योंकि जमाना बदला तो हम भी बदल गए और घड़े की जगह हम फ्रीज इस्तेमाल करने लगे। अब सड़क के किनारे मटके लगाकर बैठा कुम्हार आने जाने वालों की अाेर देखता है कि कोई तो आए जो हमसे मटका खरीदकर ले जाए।

मिट्टी को कुम्हार जब चाक पर डालकर घड़ा बनाता है तो उसकी आंखों में सपने होते हैं और यही सोच कर वो प्यार से चाक चलाते हुए उसे बनाता है। उस पर कई तरह के रंग करता है कि जिसे जिस रंग का घड़ा पसंद होगा वह वैसा खरीद कर ले जाएगा।

इनको बनाने के बाद उन्हें बेचने के लिए सड़कों के किनारे सजाकर रखा जाता है। लेकिन जिस उम्मीद से उन्हें बनाया जाता हैं वह उम्मीद पूरी नहीं हो पाती और गर्मी निकलने के बाद कुम्हारों को अपने घड़े वापस लेकर घरों की अाेर जाना पड़ता है।

घड़े बेचने के लिए खड़ा कुम्हार।

पहले सस्ते जमाने में भी सीजन में 300 घड़ा बेच लेते थे अब 50 नहीं बिकते : राम कृष्ण

कुम्हार राम कृष्ण का कहना है कि उसके अपनों के 5 परिवार हैं। पहले हर परिवार गर्मी के सीजन में 3 से साढ़े 3 महीने में 300 घड़े बेच लेते थे लेकिन अब एक परिवार 50 घड़े भी नहीं बेच पाता। गुजारा कैसे होगा। इसलिए नई पीढ़ी इस हुनर को सीखना छोड़ रही है। हमें भी जीवन यापन को लेबर करनी पड़ती है। मिट्टी का घड़ा शुद्ध पानी देता है, फिर भी लोग आरो व फ्रिज के नकली केमिकल वाला पानी पी रहे हैं।

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