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मौके पर सुनी जाएगी आपकी समस्या, गांवों व वार्डों में 445 वीपीओ तैनात

एक वर्ष पहले
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जिला पुलिस की ओर से गांवों में लोगों की छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाने के साथ पुलिस व गांववासियों के बीच संवाद अच्छा हो, इसके लिए एसएसपी ने वीपीओ सिस्टम (विलेज पुलिस अफसर) के नाम से लांच किया है। इसमें डीएसपी से लेकर कांस्टेबल तक गांव में जाकर सरपंच से लेकर गांव के लोगों तक से मिलकर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी हासिल करेंगे।

एसएसपी मोगा हरमनबीर सिंह गिल व एसपी-डी हरिन्दरपाल सिंह परमार ने बताया कि 9 मार्च को पुलिस लाइन में परेड के दौरान जिला पुलिस की ओर से एक नई पहल करते हुए वीपीओ सिस्टम (विले पुलिस अफसर) के नाम से लांच किया है।

बीट बुक में दर्ज करनी होगी कार्यप्रणाली

इस स्कीम के तहत 445 वीपीओ जिले के 323 गांवों में अपनी सेवाएं देंगे। इनमें कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, एएसआई, एसआई, एसएचओ व डीएसपी रैंक के अधिकारी को एक-एक गांव दिया गया। वहीं 122 वीपीओ मोगा, बाघापुराना, निहाल सिंह वाला व धर्मकोट के विभिन्न वार्डों में अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। इसमें थानों के पुलिस मुलाजिमों के अलावा पुलिस लाइन व एसएसपी कार्यालय के मुलाजिम को भी गांवों में जाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके अलावा बीट बुक दे दी गई है। इसमें वह जिस गांव में जाएंगें, वहां उनके द्वारा की जाने वाली कार्यशैली के संबंध में लिखेंगे। उनके द्वारा गांव के सरपंच समेत पंचायत सदस्य के साथ गांववासियों से मिलकर उनको पेश आ रही रोजमर्रा की समस्याओं के बारे में जानकारी हासिल करने के बाद सीनियर अधिकारियों को उन समस्याओं के बारे में अवगत करवाएंगे। गांव में किसी की मौत होने पर वह संस्कार में शामिल होकर संवेदना प्रकट करेंगे। साथ ही अगर किसी घर में शादी समारोह है तो अगर उसमें निमंत्रण पत्र मिलने पर शादी में जाकर लोगों की खुशियों में भी शामिल होंगे। पुलिस अधिकारी ने कहा कि गांव में होने वाले छोटे-छोटे झगड़ों को मौके पर ही निपटाना होगा। इसके अलावा गांव के शरारती तत्वों की पहचान करने के अलावा उनको पहले समझाना होगा, अगर नहीं समझते तो फिर सीनियर अधिकारियों के नोटिस में लाकर उनके खिलाफ बनती कार्रवाई करनी होगी।


अच्छा काम करने वाले मुलाजिम होंगे सम्मानित

पुलिस मुलाजिम को उसके लिए पहले पंचायत से बात करके पंचायत घर या किसी सांझे स्थान पर मेज कुर्सी लगाकर सप्ताह में तीन से चार दिन तक जिस मुलाजिम को जो गांव दिया है, उसे वहां जाना होगा। जो पुलिस मुलाजिम अच्छा काम करेगा। उसे सम्मानित किया जाएगा। इस सिस्टम को शुरू करने का मकसद इतना है कि लोग हर छोटी से छोटी बात को लेकर एसएचओ व डीएसपी के पास पहुंच जाते हैं। इससे लोगो के समय की बर्बादी होती है। कई बार अधिकारी के पास काम होने के चलते वह लोगों की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाता है। जबकि ऐसे मामले में गांव स्तर पर ही हल हो सकते हैं। ऐसे में लोगों का समय बचेगा। वहीं पुलिस व ग्रामीण लोगों के बीच आपस में प्रेम व सौहार्द बढ़ेगा।

एसएसपी हरमनबीर सिंह गिल व एसपीडी हरिन्द्रपाल सिंह परमार मीडिया को वीपीओ संबंधी जानकारी देते हुए।
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