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श्रीलंका लाल मिर्च का सबसे बड़ा खरीदार उसी की डिमांड से तय होता है भारत में रेट

नाभा के गांव खोख के किसान नेक सिंह ने प्रोग्रेसिव खेती में कामयाबी पाकर मिसाल कायम की है। पहले नेक सिंह कुछ ही बीघा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:45 AM IST

श्रीलंका लाल मिर्च का सबसे बड़ा खरीदार उसी की डिमांड से तय होता है भारत में रेट
नाभा के गांव खोख के किसान नेक सिंह ने प्रोग्रेसिव खेती में कामयाबी पाकर मिसाल कायम की है। पहले नेक सिंह कुछ ही बीघा जमीन में धान और गेहूं जैसी रिवायती फसलों की खेती करते थे लेकिन फिर कुछ कर गुजरने की ललक मन में लिए पीएयू के खेती माहिरों से संपर्क किया और तकनीकी जानकारी हासिल कर 1993 में मिर्च की खेती शुरू कर दी। धीरे-धीरे मेहनत और लगन रंग लाई। पहले मिर्च की फसल मंडी में बेचते थे फिर पीएयू की सलाह से अलग-अलग बैरायटी की मिर्च नर्सरी में उगाने लगे। आज किसान नेक सिंह अपनी नर्सरी से पहचान बना चुका है। यहां उगाई गई मिर्च की पौध की इतनी डिमांड है कि हिमाचल, हरियाणा सहित कई राज्यों के किसान नेक सिंह से नर्सरी तैयार करवाने के लिए एडवांस बुकिंग करवाते हैं। वह खुद तो कमा ही रहे हैं साथ ही दो से तीन एकड़ जमीन के मालिक कई किसानों के समूहों को पौध देकर मिर्च की खेती करवाकर आर्थिक तौर पर सबल कर रहे हैं। किसान नेक सिंह ने बताया कि श्रीलंका ही एकमात्र ऐसा देश है जहां मिर्च खासकर लाल मिर्च की सबसे ज्यादा डिमांड रहती है। जैसे ही वहां पर लाल मिर्च की मांग बढ़ती है तो भारत में मिर्च का रेट बढ़ जाता लेकिन अगर डिमांड कम हो तो भारत में मिर्च का रेट गिर जाता है।

मांग के अनुसार ही करते हैं लाल मिर्च का उत्पादन

पनीरी नाजुक होती है, इस पर खास ध्यान देते हैं

किसान नेक सिंह के मुताबिक वह पीएयू की रिसर्च के अनुसार तैयार सीएच-1 और नई ब्रीड सीएच-27 के अलावा निजी कंपनियों से मिर्च के बीज खरीदते हैं। हाईब्रिड बीज की कीमत लगभग 35000 रुपए किलो है। बिजाई से पहले जमीन को अच्छे से तैयार कर भुरभुरा करने के बाद बीज बोए जाते हैं। इसके बाद इन्हें फव्वारों से पानी दिया जाता है। पनीरी नाजुक होती है इसलिए तापमान का खास ध्यान रखना पड़ता है। हाथों से ही पनीरी से नदीन निकाला जाता है। कुल मिलाकर फसल को आंखों से दूर नहीं होने देते। लेबर एक-एक पौधे को जमीन से निकाल पैक करती है।

दोनों बेटे भी पिता के साथ संभाल रहे काम

नेक सिंह के दो बेटे कुलवंत सिंह और जसवंत सिंह भी पिता के साथ खेती में हाथ बटांते हंै जिन्होंने काम का आप में बंटवारा कर रखा है। एक खेतों में देखरेख करता है तो दूसरा सप्लाई में हाथ बंटा रहा है। नेक सिंह ने कहा की पैत्रिक जमीन कुछ ही बीघा थी लेकिन इस खेती से आज 65 एकड़ जमीन के मालिक हैं। एक कामयाब किसान के तौर पर नेक सिंह को पूर्व सीएम प्रकाश सिंह बादल के अलावा कई समारोहों में सम्मानित किया जा चुका है। नेक सिंह ने बताया कि उनकी कोशिश है कि इस काम को बेटों को बेहतर तरीके से सिखाया जाए, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका फायदा मिल सके। हालांकि इस काम में सावधानी के साथ नई तकनीक भी बहुत जरूरी होती है।

पड़ोसी राज्यों में सप्लाई कर रहे नर्सरी...किसाननेक सिंह के मुताबिक मिर्च की बिजाई मांग के अनुसार ही की जाती है क्योंकि कई राज्यों में कड़वी तो कहीं कम कड़वी मिर्च की मांग रहती है। वह दूसरे किसानों को भी मिर्च की खेती के लिए लगातार प्रोत्साहित करते रहते हैं। हरियाणा, हिमाचल और यूपी में भी पनीरी की सप्लाई कर रहे हैं। इसके अलावा खुद भी पनीरी के साथ ही 15 एकड़ में मिर्च की खेती कर रहे हैं।

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