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केमिकल प्यूरिफाइंग टैंक की पाइप वेल्ड कर रहा था कर्मी, रिएक्शन से ब्लास्ट, 120 फीट दूर जा गिरा, मौत

पंजाब एल्कालाइन केमिकल लिमिटेड (पीएसीएल) में मंगलवार दोपहर ब्लास्ट होने के कारण एक कर्मचारी की मौत हो गई और एक...

Dainik Bhaskar

May 16, 2018, 02:50 AM IST
केमिकल प्यूरिफाइंग टैंक की पाइप वेल्ड कर रहा था कर्मी, रिएक्शन से ब्लास्ट, 120 फीट दूर जा गिरा, मौत
पंजाब एल्कालाइन केमिकल लिमिटेड (पीएसीएल) में मंगलवार दोपहर ब्लास्ट होने के कारण एक कर्मचारी की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। ब्लास्ट इतना भीषण था कि मारे कर्मचारी की लाश करीब 120 फीट दूर जाकर गिरी।

जानकारी के अनुसार पीएसीएल के यूनिट नंबर एक के रिकवरी टैंक (एफआरपी टैंक) में ब्लास्ट हुआ है। यह टैंक दो साल पुराना था। इस रिकवरी टैंक में सीपीडब्ल्यू प्लांट से निकलने वाली वेस्ट क्लोरीन को एब्जार्व करके साफ किया जाता है। वेस्ट क्लोरीन को साफ करने के लिए उपयोग होने वाले पानी की सप्लाई पाइप में लीकेज हो रही थी। कर्मचारी रजिंदर ट्रेनी अजय कुमार के साथ मंगलवार दोपहर 12.40 बजे उसी पाइप को वेल्ड कर रहा था कि अचानक ब्लास्ट हो गया। धमाके से राजिंदर लगभग 120 फीट दूर जाकर गिरा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई जबकि अजय गंभीर जख्मी हो गया। घायल अजय को पहले नंगल के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया पर उसकी हालत गंभीर होने के कारण उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया। धमाके में जान गंवाने वाला कर्मचारी रजिंदर सिंह (55) कंपनी में 1983 से काम कर रहा था। वह गांव भड़ौली का रहने वाला था। रजिंदर कुमार फैक्टरी का पक्का मुलाजिम था। घायल अजय कुमार ट्रेनी है जो एक साल से कंपनी में काम कर रहा है। मृतक रजिंदर कुमार के घर में प|ी व दो बेटे हैं। रजिंदर का बेटा भी पीएसीएल में काम कर रहा है। दूसरा बेटा अभी रोजगार की तलाश में है।

मृतक रजिंदर


फाइबर का बना हुआ था टैंक, कमजोर होने के कारण आग के संपर्क में आते ही फटा

पीएसीएल मान्यता प्राप्त यूनियन के अध्यक्ष संजय कुमार का कहना है कि सीपीडब्ल्यू प्लांट से जो वेस्ट क्लोरीन गैस आती है, उसे पीएसीएल न्यूट्रलाइज करती है जबकि सीपीडब्ल्यू प्लांट से जो वेस्ट क्लोरिन गैस आती है, उसमें तेल के अंश भी होते हैं। तेल के अंश रिकवरी टैंक से होकर गुजरते हैं। ये अंश आग के संपर्क में आने पर हादसे का कारण बन सकते हैं। इस टैंक की सफाई लंबे समय से नहीं हुआ जिससे इस तेल के अंश रुके रह जाते हैं, और हो सकता है कि आज भी पाइप वेल्ड करते हुए तेल के ये अंश हादसे का कारण बने हों। जिस टैंक में ब्लास्ट हुआ वह फाइबर का बना हुआ था। विशेषज्ञों के अनुसार फाइबर टैंक में उतनी मजबूती नहीं होती। अगर टैंक किसी अन्य धातु से बना होता तो ब्लास्ट इतना घातक नहीं होता।


रजिंदर ने गार्ड गुरविंदर से कहा था, आज मेरा काम करने को दिल नहीं कर रहा, दिल करता है घर चला जाऊं

पीएसीएल के सिक्योरिटी में तैनात गुरविंदर सिंह ने बताया कि हादसा 12.40 बजे हुआ। धमाके से पहले लगभग 12 बजे रजिंदर कुमार मेरे पास आया और कहने लगा,‘आज मेरा दिल काम करने को बिल्कुल नहीं कर रहा...दिल करता है कि घर चला जाऊं।...मैंने उसे कहा कि आप अपनी मर्जी देखें...अब जब उसकी कही बात के बारे में सोचता हूं तो लगता है कि उसे हादसे का पहले ही एहसास हो गया था। अगर उस समय रजिंदर से कोई कहता कि घर चला जाए तो उसने पक्का घर चले जाना था पर होनी को कौन टाल सकता है।’

20 करोड़ की ग्रांट के बाद भी पीएसीएल में काफी काम जुगाड़ के सहारे

पीएसीएल में क्लोरीन कॉस्टिक, एचसीएल आदि रसायन व गैस का उत्पादन होता है। पीएसीएल फैक्टरी कई वर्षों से आर्थिक संकट में है जिसे अकाली- भाजपा सरकार के दौरान कोई वित्तीय सहायता नहीं मिली जिस कारण कंपनी का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी खराब हो गया। कांग्रेस ने सत्ता में आने पर स्पीकर केपी सिंह ने 20 करोड़ की ग्रांट दिलवाई जिससे पीएसीएल में मेनटेनेंस का काम शुरू हुआ। जानकारों के अनुसार अभी भी कंपनी में काफी कुछ जुगाड़ के सहारे चलाया जा रहा है।

न किसी का कसूर न कोई लापरवाही हुई, 24 साल से फैक्टरी में काम कर रहा रजिंदर तजुर्बेकार था : डीजीएम

फैक्टरी में ब्लास्ट के बाद पीएसीएल के डीजीएम एमपीएस वालिया, एजीएम क्वालिटी कंट्रोल व सेफ्टी रजनीश कुमार बिहाना और डीजीएम एचआर आर जायसवाल ने प्रेस कान्फ्रेंस कर कहा कि फैक्टरी में जो हादसा हुआ है, वह दुर्भाग्यवश हुआ है। इसमें किसी का कोई कसूर नहीं है और न ही किसी लापरवाही से काम लिया गया है। रजिंदर कुमार पिछले 24 वर्षों से फैक्टरी में काम कर रहा था। वह काफी तजुर्बेकार था। उसके साथ ट्रेनी अजय कुमार मौजूद था जो घायल हुआ है। वह उस समय सेफ्टी नियमों के अनुसार काम कर रहा था। तफ्तीश करवाकर हादसे के कारणों का पता लगाया जाएगा। मृतक के परिवार को कंपनी के नियम के अनुसार मुआवजा दिया जाएगा। बाकी उसकी एक्सीडेंट इंश्योरेंस होती है, वह भी मिलेगी।


पीएसीएल के पास एंबुलेंस तक नहीं, तड़पता रहा घायल | अजय

पीएसीएल के पास एंबुलेंस तक नहीं है। यूनियन ने डायरेक्टर अमित ढाका से अतिआधुनिक एंबुलेंस की मांग की थी। उन्होंने आश्वासन दिया था कि जल्द ही एंबुलेंस मिल जाएगी। आज जख्मी अजय कुमार हादसे के बाद तड़प रहा था। उसे किसी प्राइवेट गाड़ी में अस्पताल पहुंचाया गया।

यूनियन ने एमओयू की शर्तों पर सवाल उठाए | नंगल पीएसीएल के डीजीएम वालिया का कहना है कि सीपीडब्ल्यू प्लांट से जो वेस्ट क्लोरीन गैस आती है, उसे हम न्यूट्रलाइज करते हैं। यह एमओयू के तहत कर रहे हैं। उधर, यूनियन का कहना है कि पीएसीएल मैनजमेंट ने 2016 में एमओयू किया था। सीपीडब्ल्यू प्लांट मालिक से किए गए एमओयू की शर्तों को मैनजमेंट छुपा रही है।

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