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बलाचौर सिविल में करवाया सिजेरियन, पेट दर्द बंद न हुआ तो पीजीआई में ऑपरेशन, निकली पटि्टयां
एक साल पहले स्थानीय सिविल अस्पताल में हुई बच्चे की डिलीवरी के वक्त डॉक्टरों व स्टाफ की लापरवाही से महिला के पेट में पटि्टयां छूट गईं, जिसका पता महिला को कई महीने के बाद पेट दर्द के दौरान चला। महिला का चंडीगढ़ पीजीआई में इलाज करवाया गया, जहां पेट में से यह पटि्टयां निकाली गईं। डिलीवरी के वक्त महिला का ऑपरेशन करने वाली दोनों डॉक्टर अब इस मामले में जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं हैं तथा एक-दूसरे पर बात फेंक रही हैं। इस संबंध में सिविल अस्पताल के एसएमओ डाक्टर रविंदर सिंह ठाकुर ने बताया कि बलाचौर के अस्पताल में हर महीने करीब 70 से 80 तक डिलीवरीयां की जा रही हैं। इस समय दौरान यही टीम इस अस्पताल में काम करती थी। मगर उन्हें कोई भी पीड़ित की तरफ से शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। अगर कोई इस संबंध में उनके पास शिकायत आएगी तो डॉक्टरों की टीम बनाकर जांच करवाई जाएगी।
आरोप-प्रत्यारोप }डॉ. रूबी v/s डॉ. दीपाली
मैंने सिर्फ ऑपरेशन किया
डिलीवरी करने वाली डॉक्टर रूबी कहना है कि उन्होंने सिर्फ ऑपरेशन किया था, जबकि बाद में टांके टीम के अन्य स्टाफ ने लगाए थे।
वो पटि्टयां जो लापरवाह डॉक्टर भूलीं
एसएमओ : इस बारे कोई जानकारी नहीं, शिकायत मिलने पर करवाई जाएगी जांच
रूबी मैडम ने टांके लगाए
डॉ. दीपाली ने कहा कि वे टीम में जरूर थीं व सीनियर डॉक्टर को असिस्ट कर रही थीं। केस रूबी मैडम का व टांके भी उन्होंने लगाए।
जानकारी देते विनोद कुमार व रंजना कुमारी।
पीड़ित दंपति ने प्रशासन से मांगा इंसाफ, कहा- हमारे पैसे और समय का हुआ काफी नुकसान
जानकारी देते हुए गांव मझोट (बलाचौर) निवासी रंजना कुमारी ने बताया कि जब वह गर्भावस्था में थी तो उसका ट्रीटमेंट सरकारी अस्पताल बलाचौर में ही चल रहा था और डिलीवरी के समय जब उसको सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया तो 11 मार्च 2019 को बड़ा ऑपरेशन हुआ था जिस दौरान उसकी गर्भ से 1 लड़के का जन्म हुआ। उस समय डॉक्टर रूबी और डॉक्टर दपाली ने अपनी टीम सहित ऑपरेशन किया। अस्पताल से करीब 10 दिन बाद उसको छुट्टी मिली। कई दिनों के बाद उसकी टांग व पेट में दर्द रहने लगा। उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ से इलाज करवाना शुरू किया तो वहां डॉक्टरी जांच में पता चला कि उसके पेट में कुछ ऐसी चीज है जिसके कारण उसको यह तकलीफ आ रही है। उसने बताया कि 11 फरवरी 2020 को ऑपरेशन के दौरान उसके पेट से पट्टियों के गुच्छे को बाहर निकाला, जोकि डिलीवरी के समय डाक्टरों द्वारा छोड़ दिया गया था। रंजना कुमारी व उसके पति विनोद कुमार ने बताया कि इस समय के दौरान वह जिंदगी और मौत के साथ जूझती रही, वहीं उनके पैसे और समय का भी काफी नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें इंसाफ चाहिए। गांव के सरपंच हीरा खेपड़ मझोट ने प्रशासन से परिवार को इंसाफ दिलाने की मांग की है।