पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Nawanshahr News Civil Hospital Painless System Numb No Bullet For Headache Civil Surgeon Oblivious Will Speak

सिविल अस्पताल बेदर्द, सिस्टम सुन्न: सिरदर्द तक की गोली नहीं, सिविल सर्जन बेखबर, बोले-पता करेंगे

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भले ही राज्य सरकार लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के कितने ही दावे करे लेकिन आम लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाओं का कितना लाभ पहुंच रहा है, इसका अंदाजा नवांशहर के सिविल अस्पताल में दवाइयों की उपलब्धता देख कर लगाया जा सकता है। सरकार की ओर से जारी की गई 236 प्रकार की दवाइयों में से सिर्फ 161 प्रकार की दवाइयां ही अस्पताल में उपलब्ध हैं। वहीं, सिविल सर्जन डाॅ. आरपी भाटिया ने कहा कि वह यहां नए आए हैं और उन्हें अस्पताल में दवाइयां न होने के बारे में जानकारी नहीं है। वह पता करेंगे कि दवाइयां क्यों नहीं है।

हैरानी तो इस बात की है कि अगर किसी व्यक्ति के कान में दर्द हो रहा हो और वह कान में डालने वाली दवाई लेने के लिए अस्पताल में आए तो उसे न तो कान में डालने वाली दवाई मिलेगी और न ही कोई दर्द दूर करने वाली दवाई मिलेगी। क्योंकि अस्पताल की स्टाक में यह दवाएं ही नहीं हैं। इसके अलावा जिला स्तरीय अस्पताल में इमरजेंसी में डाॅक्टरों की भी भारी कमी है। इस कारण नवांशहर के जिला अस्पताल में आने वाले गंभीर मरीजों को चंडीगढ़, लुधियाना व अन्य निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है।

अस्पताल में 236 प्रकार की दवाइयों में से सिर्फ 161 का ही है स्टाक, इमरजेंसी में भी डाॅक्टरों की कमी

अस्पताल में आने वाले मरीजों का संख्या के हिसाब से कम हैं डाॅक्टर

जिला अस्पताल में स्टाफ की कमी पूरी नहीं की गई और डाॅक्टरों की कमी के कारण मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ती है। सिविल सर्जन डाॅ. आरपी भाटिया ने कहा कि सेहत विभाग के पास डाॅक्टरों की कमी चल रही है। जिला स्तरीय अस्पताल में मरीजों के आने की संख्या अधिक है। उन्होंने कहा कि जिले में डाॅक्टरों की कमी के बारे में विभाग के उच्चाधिकारियों को बताया जाता है। उम्मीद है कि डाॅक्टरों की कमी पूरी होगी।

अस्पताल में नहीं रहता पक्के तौर पर कोई पुलिस मुलाजिम

जिला अस्पताल में सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा किसी कर्मचारी की तैनाती नहीं की गई, जिस कारण कई बार सिविल अस्पताल में उपद्रव या विवाद की स्थिति में कई बार रोगियों द्वारा डाॅक्टर व अन्य स्टाफ के साथ मारपीट तक नौबत आई है। ऐसी स्थिति में स्टाफ को फोन कर पुलिस को बुलाना पड़ता है। लेकिन पुलिस के आने तक बात कहीं की कहीं बड़ जाती है।

जिला अस्पताल में नहीं है सिटी स्कैन की मशीन और न ही लगता है हैपेटाइटस रोकने का टीका

नवांशहर को जिला मुख्यालय बने हुए लगभग 23 वर्ष हो चुके हैं और नवांशहर के जिला अस्पताल में सिटी स्कैन जैसी सुविधा तत्कालीन तक नहीं है। इस कारण लोगों को निजी अस्पतालों में महंगे भावों पर स्कैन करवानी पड़ती है। पंजाब सरकार की ओर से लोगों को मुफ्त सेवाएं देने की बात की जा रही है लेकिन जिला अस्पताल में लगाए जाने वाले फ्री टीकों में से काला पीलिया व पीलिया का टीका ही नहीं लगाया जाता। जब कोई मरीज अस्पताल में यह टीका लगवाने के लिए आता है तो उसे निराश होकर वापिस आना पड़ता है तथा निजी अस्पतालों में महंगा टीका लगवाना पड़ता है।

अस्पताल में नहीं है शुगर की गोली और टीका

जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में हालात ऐसे ही कि यहां आने वाले मरीजों को अगर शुगर है या कहीं दर्द हो रहा है तो उनका यहां पर इलाज तो हो जाएगा लेकिन उन्हें अस्पताल में दवाई नहीं मिल सकती। क्योंकि जिला अस्पताल में शुगर की गोली या इंजेक्शन व दर्द की कोई दवाई मौजूद ही नहीं है। दवाई लेने के लिए मरीज को मेडिकल स्टोर पर जाना पड़ेगा। अगर किसी व्यक्ति के चोट लग जाए और उसे टांके लगाने की नौबत आ जाए तो टांके लगाने वाली जगह को सुन्न करने के लिए लगाया जाने वाला इंजेक्शन भी जिला अस्पताल में नहीं है। इसके अलावा चोटिल व्यक्ति के बहते रक्त को रोकने के लिए लगाए जाने वाला टीका भी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है।

खबरें और भी हैं...