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खाली पीपों, प्लास्टिक के मर्तबानों से बनाए तैराकी सहायक यंत्र, बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकाला

एक वर्ष पहले
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दरिया सतलुज में बाढ़ की संभावना में पानी में फंसे लोगों को बाहर लाने के उद्देश्य से शुक्रवार को 7-एनडीआरएफ की टीम ने ताजोवाल-मंढाला में मॉक ड्रिल की। मॉक ड्रिल के दौरान दरिया के पानी में बनावटी तौर पर लोगों के फंसे होने का माहौल पैदा कर उनको पानी से सुरक्षित जगह पर लाने का अभ्यास किया गया।

एडीसी (ज) आदित्य उप्पल ने कहा कि ऐसी मॉक ड्रिल का उद्देश्य लोगों को बाढ़ के हालात में घरेलू उपायों द्वारा पानी से सुरक्षित बाहर आने के बारे में जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि खाली पीपों, प्लास्टिक के मर्तबानों/बोतलों आदि की मदद से ‘तैराकी सहायक यंत्र’ (फ्लोटिंग डिवाइस) बनाए जा सकते हैं और आज की मॉक ड्रिल का यह सभी चीजें हिस्सा भी रही। एनडीआरएफ के इंस्पेक्टर हरी ओम और अशोक शर्मा की अगुवाई में पहुंची टीम ने सबसे पहले दरिया के पानी में बहते लोगों का बनावटी दृश्य बना कर उनको बाढ़ में फंसे लोगों को निकालने की ड्रिल की। उसके बाद एक अभ्यास में पानी में फंसे व्यक्ति को रस्सों के साथ पानी से बाहर लाया गया। टीम ने खाली पीपों, प्लास्टिक के मर्तबानों/बोतलों से ‘तैराकी सहायक यंत्र’ भी बनाकर दिखाए। दरिया के पानी में फंसे लोगों को किश्तियों के जरिए सुरक्षित बाहर लाने का अभ्यास भी किया गया। एनडीआरएफ जवानों ने लोगों को गंभीर हालातों में घरेलू समान से तैराकी सहायक यंत्र बनाने की विधि बताई। इस मौके पर नवांशहर के एसडीएम जगदीश सिंह जौहल, बंगा के एसडीएम गौतम जैन, बलाचौर के एसडीएम जसबीर सिंह भी मौजूद रहे।

दरिया सतलुज पर ताजोवाल-मंढाला में मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए बरते जाते तरीकों के बारे में बताते 7-एनडीआरएफ की टीम मेंबर।
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