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गांव बनां में खैर की कटाई मामले में गड़बड़ी की आशंका, जांच की मांग, ~1.73 करोड़ में हुआ 1129 पेड़ों को काटने का टेंडर

एक वर्ष पहले
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काठगढ़ के गांव बनां में खैर कटाई को लेकर विपक्ष ने नियमों की अनदेखी की आशंका के आरोप लगाए हैं। 28 फरवरी को हुई बोली को लेकर पूर्व सरपंच व मौजूदा एक पंच ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच करवाने की मांग की है। जानकारी के अनुसार 28 फरवरी को गांव बनां में करीब 1100 खैर के पौधे काटने का पब्लिक नोटिस निकाला गया था। एक कंपनी ने पौधे काटने का ठेका 1 करोड़ 73 लाख रुपए में ले लिया। कंपनी की ओर से कुछ पैसे जमा करवाने के बाद पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई। मामले को लेकर राजनीति शुरू हो गई है। खैर के इन पेड़ों की कटाई संबंधी कुछ वीडियो भी वायरल हुए हैं। मौजूदा सरपंच गुरमीत कौर के पति वासदेव ने खैर के पौधों की पेमेंट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस ठेकेदार ने इन पौधों को काटने का ठेका लिया था, उसने करीब 60 लाख रुपए की पेमेंट जमा करवा दी है, जबकि बाकी के पैसों के 2 चेक जमा करवाए हैं। जबकि कटाई की शर्त में कैश या ड्राफ्ट ही पैसे लेने के सवाल पर उन्होंने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। उधर, इस मामले में बीडीपीओ धर्मपाल ने कहा कि पूरी प्रक्रिया पर पहली नजर पंचायत ने रखनी है तथा अगर कोई कमी मिली तो कार्रवाई की जाएगी। चेक क्यों नहीं लिए जाते, चेक लेने से इसलिए गुरेज किया जाता है, क्योंकि अगर चेक बाउंस हो जाए तो बेवजह की परेशानी होती है। ऐसे में विभागों की ओर से पैसे जमा करवाने के लिए कैश या ड्राफ्ट का ही विकल्प दिया जाता है, ताकि बाद में पैसों संबंधी कोई दिक्कत ही न खड़ी हो।

कैप्टन सरकार की आर्थिक हालत इसी तरह से हुई कमजोर : शिव कर्ण चेची

आम आदमी पार्टी के जिला प्रधान शिव कर्ण चेची ने कहा कि प्रदेश की कैप्टन सरकार की आर्थिक हालत के कमजोर होने के कारण यही हैं कि प्रदेश में इस तरह भ्रष्टाचार हो रहा है। सरकार की करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी कौड़ियों के भाव बिक रही है तथा सत्ता पक्ष के नेता जानबूझकर चुप बैठे हैं।

क्या कहना है पूर्व सरपंच का

पंचायत नियमों को पूरी तरह से नजर अंदाज कर राजनीतिक दबाव में खैर के करोड़ों रुपए के पौधे काटने का काम कर रही है। उनकी जानकारी के अनुसार गांव की जमीन पर खैर के 3 हजार से ज्यादा पौधे हैं, लेकिन मात्र 1100 पौधों का टेंडर देकर बाकियों को भी काटने की तैयारी है। यही नहीं कंपनी को चैक की सुविधा क्यों दी गई, जांच होनी चाहिए।
पमरजीत पम्मा, पूर्व सरपंच

काटे गए खैर के पेड़।-भास्कर
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