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सब्जियों की नई फसल बर्बाद, जिमींदारों को फसली मुआवजा देने की मांग : निर्मल सिंह

एक वर्ष पहले
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इस बार अच्छी फसल होने पर लाभ मिलने की उम्मीद में बैठे किसानों को पिछले तीन दिन से हो रही भारी बारिश तथा ओलावृष्टि ने चिंताओं में डुबो दिया है। पहले ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसानों के लिए यह बारिश बड़ी आफत बनकर आई है। भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के जिला प्रधान निर्मल सिंह औजला तथा उपाध्यक्ष सुरिंदर पाल, शहरी प्रधान भूपिंदर सिंह, बलविंदर सिंह धैंगड़पुर तथा संतोख सिंह रैलमाजरा ने बताया कि इस बार किसानों को हाड़ी की लहलहाती फसल को दाना पड़ा देख बड़ी उम्मीद बंधी थी कि इस बार किसानों की झोली में कुछ लाभ जरूर होगा, मगर इस कुदरती आफत ने मचाई तबाही के साथ-साथ जमीन पर बिछ चुकी गेहूं की फसल को देखकर किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है। उन्होंने कहा कि चाहे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा माल विभाग के अधिकारियों को नुकसानी गई फसल की गिरदावरी करने के आदेश जारी कर दिए हैं, लेकिन मौसम में गड़बड़ी अभी भी जारी होने से किसानों की फसलों का कितना नुकसान हुआ है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। फसल के नुकसान का सर्वे करने वाले भी महज खानापूर्ति ही करते हैं, फसली नुकसान के सर्वे वाले अधिकारी भी पूरी ईमानदारी के साथ सर्वे नहीं करते, जिस कारण किसानों का काफी नुकसान होता है। इसके बाद किसानों को फसल के मुआवजे के लिए दफ्तरों में भटकना पड़ता है। उन्होंने बताया कि गेहूं के अलावा सब्जियों की नई फसल भी बिल्कुल बर्बाद हो गई है। मौसम की मार झेलती बची-खुची गेहूं का झाड़ भी काफी कम निकलेगा। अगर इस मौके पर भी सरकार ने किसानों की बाजू न पकड़ी तो उनकी आर्थिक हालत और भी नीचे आ जाएगा। उन्होंने केंद्र व प्रदेश सरकार से मांग की है कि जिमींदारों को बनता योग्य फसली मुआवजा दिया जाए।

कुदरती आफत ने मचाई तबाही : जमीन पर बिछी किसानों की फसल

फसली नुकसान के संबंध में जानकारी देते भाकियू के किसान। (दाएं) बारिश व ओलावृष्टि से बर्बाद हो चुकी फसल देख चिंता में डूबा किसान परिवार।
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