गोमती नाथ मंदिर में सत्संग|नर्क और स्वर्ग का रास्ता इंसान की संगत तय करती है : भारती

Nawashahar News - दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा स्थानीय गोमती नाथ मंदिर में साप्ताहिक सतसंग में साध्वी रुपिंदर भारती ने कहा...

Nov 11, 2019, 08:30 AM IST
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा स्थानीय गोमती नाथ मंदिर में साप्ताहिक सतसंग में साध्वी रुपिंदर भारती ने कहा कि मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और उसे अपना जीवन यापन करने के लिए अन्य रिश्ते नातों की आवश्यकता होती है। अपने मित्रों व रिश्ते नातों से ही वह अपनी निजी व भावनात्मक जरूरतें पूरी करता है। जब हम किसी का संग करते हैं तो उस संगत के विचार हम पर सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव डालते हैं, इससे हमारे कर्म संस्कार बनते हैं। हम अपने जीवन में वही कार्य करते हैं जो हमने जाने अनजाने में अपने आसपास के लोगों से विचारों के रूप में ग्रहण किए होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्र कहते हैं कि नर्क और स्वर्ग का रास्ता इंसान की संगत तय करती है। इसलिए हमारे महापुरूषों ने सत्संग की बड़ी महिमा गाई है। सत्संग का अर्थ है सत्य का संग करना लेकिन परमात्मा के अलावा यहां संसार में जो भी हम अपनी इंद्रियों द्वारा अनुभव कर रहे हैं वह सब मिथ्या है। उन्होंनें कहा कि प्रभु कृपा के बिना सत्संग की प्राप्ति नहीं हो सकती है। जब हमारे कई जन्मों के पुण्य एकत्रित होते है तभी हमें किसी ब्रह्मनिष्ठ संत का सानिध्य प्राप्त होता है। उन्होंनें कहा कि मानव तन का मिलना परम सौभाग्य की बात है, लेकिन अगर हम अपने मानव जीवन को संसार के विषय लोगों में लिप्त करके इसे व्यर्थ गंवा देते है जो हमारी आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग कभी नही भूल पाता। हम पशुवत जीवन जीकर अंत में संसार से यूं ही विदा हो जाते हैं। जो विवेकशील आत्माएं होती है वे इस मानव जीवन को व्यर्थ नहीं गंवाती और पूर्ण सतगुरू से ब्रह्मज्ञान की दीक्षा प्राप्त कर अपना आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त कर लेती है। जीवन का सत्य जानकर अपने भीतर ही प्रभु के निराकार रूप प्रकाश का दर्शन करना चाहिए तभी हम संसार में रहना सीख पाएंगे।

प्रवचन करतीं साध्वी रुपिंदर भारती।

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