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होली पर चढ़ा स्वदेशी रंग...इस बार गुलाल भी अपना, पिचकारी भी

एक वर्ष पहले
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पिछले तीन दिनों से रूक-रूक कर हो रही बारिश के बाद रविवार को मौसम साफ हो गया तथा आने वाले दो-तीन दिन तक और बना रहेगा। ऐसे में होली पर आसमान साफ रहने की उम्मीद है। लेकिन होली में सिर्फ दो दिन बचे हैं, परंतु दो-तीन दुकानों को छोड़कर शनिवार तक बाजार अभी भी सूना पड़ा है। इस बार कोरोना वायरस के कारण चीन से होली का सामान आयात न होने के कारण जिले में देशी सामान की भरमार है। होली के लिए रंग, पिचकारी, गुलाल व मुखौटों की दुकानें सजनी शुरू हो गई हैं। खराब मौसम और दाम अधिक होने अभी ग्राहक कम नजर आ रहे हैं। लेकिन रविवार के बाद सोमवार व मंगलवार को बाजारों में रौनक लौट आने की उम्मीद है।

अधिकांश उत्पाद मेड इन इंडिया

बाजार में फैंसी आइंटमेंट भी इस बार ज्यादातर स्वदेशी ही हैं। फिलहाल होली का जो स्टॉक व्यापारी मंगवा रहे हैं, उसमें अधिकांश उत्पाद मेड इन इंडिया है। हर बार त्योहारों पर चाइनीज उत्पादों की भरमार रहती है। भारत में बने उत्पादों के दाम पहले ही चाइनीज उत्पादों के मुकाबले अधिक होते हैं। चीन से आयात रुकने पर इस बार दाम में और इजाफा हुआ है। पिछले साल जो पिचकारी 40 रुपए में बिकी थी, वह इस बार करीब 50 रुपए की है। रंग और गुलाल के दामों पर कोई खास असर नहीं है तथा ये पिछले साल के दामों पर ही बिक रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार, बच्चों के लिए इस बार मोटू-पतलू, डोरेमॉन, छोटा भीम, स्पाइडरमैन, मोगली, पबजी, बेनटेन, फ्रॉजन आदि कई तरह के कार्टून करेक्टर्स की पिचकारियां आई हैं। बाजार में पिचकारियां 50 रुपए से लेकर 500 रुपए तक में उपलब्ध हैं।


}ये बरतें सावधानियां

भीड़-भाड़ वाले इलाके में न जाएं करें।

किसी को जबरदस्ती रंग न लगाएं।

जिनको सर्दी जुकाम हैं वे होली न खेलें।

जरूरी बात हाथों को बार-बार धोएं।

मुंह पर मास्क लगाकर होली खेलें।

छोटे बच्चों को रंगों से दूर रखें क्योंकि बच्चों को वायरस जल्दी घेरता है।

बरसात से प्राकृतिक रंग मिलना मुश्किल| क्षेत्र के लोग परसा के पेड़ों में लगे लाल फूलों से होली के लिए प्राकृतिक रंगों का निर्माण करते हैं। इस वर्ष प्राकृतिक रंग भी नहीं बन पाएंगे क्योंकि ठंड व बारिश के कारण इस वर्ष परसा के फूल नहीं खिले हैं।

नवांशहर के दानामंडी में एक दुकान पर सजा होली का सामान।
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