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गुरुद्वारा करतारपुर साहिब में नतमस्तक होकर लौटा नवांशहर का पहला जत्था, लोगों ने बताया-दोनों देशों में बसे हैं एक ही जैसे लोग

Nawashahar News - करीब 72 साल पहले पाकिस्तान के हिस्से में रह गए गुरुद्वारा करतारपुर साहिब में गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 08:31 AM IST
Nawanshahr News - the first batch of nawanshahr returned to the gurudwara kartarpur sahib by bowing down people told the same people have settled in both countries
करीब 72 साल पहले पाकिस्तान के हिस्से में रह गए गुरुद्वारा करतारपुर साहिब में गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा साहिब के दर्शन करके लौटे गुरु रामदास सेवा सोसायटी के सदस्य सुखविंदर थांदी ने कहा कि गुरु नानक देव जी ने सच में सरहदों के भेद को मिटा दिया है। पाकिस्तान गए पहले जत्थे में शामिल हुए सोसायटी सदस्यों ने जहां गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होकर गुरु घर के दर्शन किए वहीं पर कॉरिडोर उद्घाटन समारोह का भी आनंद लिया। थांदी ने अपनी एक दिन की फेरी का अनुभव सांझा करते हुए कहा कि भारत-पाकिस्तान में एक जैसे ही लोग बसते हैं। वे भी चाहते हैं कि सरहदों पर कड़वाहट मिटे और हम भी यही चाहते हैं। गुरुद्वारा साहिब के कांप्लेक्स में सिक्योरिटी में लगे एक पाकिस्तानी पुलिस कर्मचारी ने बातों ही बातों में जब बताया कि उनके बुजुर्ग तब जिला जालंधर के गांव सरहाल काजियां से उजड़ कर पाकिस्तान के चक्क बंगा में आए थे तो थांदी ने उन्हें बताया िक अब सरहाल काजियां जिला शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) का हिस्सा है तो पुलिस कर्मी की आखों में चमक आ गई कि जत्थे में शामिल लोग उसी हिस्से से संबंधित हैं जिस जमीन पर कभी उनके बाप दादा जन्मे व खेल-बड़े हुए थे।

पासपोर्ट व फिंगर प्रिंट जांचने के बाद ई-रिक्शा से बॉडर्र पर पहुंचाया गया

करतारपुर साहिब के गुरुद्वारे में माथा टेकने के उपरांत गुरु रामदास सोसायटी के सदस्य।

सुखविंदर थांदी ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब के दर्शनों के लिए उनके साथ सोसायटी के सदस्य सुरजीत सिंह, जगजीत सिंह, कुलजीत सिंह, बलवंत सिंह शामिल थे। यहां से भारतीय सीमा में उन्हें कड़ी सिक्योरिटी के बीच पासपोर्ट की जांच व फिंगर प्रिंट जांचने के बाद एक ई-रिक्शा में बैठाकर बॉर्डर पर पहुंचाया गया। जहां पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की तरफ से भी उनके दस्तावेजों की पूर्ण रूप से जांच करने के बाद फिंगरप्रिंट लिए गए। जिसके बाद उन्हें फिर से एक ई-रिक्शा के जरिए बसों तक पहुंचाया गया। वहीं से बसों में सवार होकर वे गुरुद्वारा साहिब तक पहुंचे। उन्होंने बताया कि जत्थे को सिर्फ गुरुद्वारा साहिब के भीतर की घूमने की मंजूरी थी। वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। थांदी ने बताया कि वहां पर उद्घाटनी समारोह देखने व गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक होने के बाद वह वापस बसों के जरिए बॉर्डर पर पहुंचे और देर रात वे अपने-अपने घर पहुंचे।

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