बीत के जंगल में माइनिंग माफिया ने बना दिया 8 किमी. लंबा रास्ता

Nawashahar News - गढ़शंकर के गांव मैरा व पंडोरी बीत के जंगल में वन विभाग के स्टाफ की मिलीभगत से माइनिंग माफिया ने करीब आठ किलोमीटर...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 08:40 AM IST
Nangal News - the mining mafia has made 8 km in the forest of beit long way
गढ़शंकर के गांव मैरा व पंडोरी बीत के जंगल में वन विभाग के स्टाफ की मिलीभगत से माइनिंग माफिया ने करीब आठ किलोमीटर लंबा और पंद्रह फीट चौड़ा अवैध रास्ता बना डाला है। इससे वन विभाग को करीब डेढ़ करोड़ से ज्यादा का चूना लगाया जा रहा है। उक्त रास्ते पर रात के समय रेत व बजरी के ओवरलोड टिप्पर जमकर दौड़ते हैं। अवैध रास्ता बनाने से कैप्टन अमरिंदर सिंह की अति महत्वकांक्षी योजना हरियावल मुहिम पर विभाग के अधिकारियों द्वारा चोट की जा रही है अौर पर्यावरण व वन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। एेसे अवैध रास्तों के पीछे राजनीतिक संरक्षण भी है। मैरा व पंडोरी बीत के जंगल में बनाए अाठ किलोमीटर अवैध रास्ते को बनाने में जिला फतेहगढ़ से संबंधित एक नेता के भाई की अहम भूमिका बताई जाती है, जिसकी सरकार के दरबार में ऊंची पहंुच है। रास्ते को देखकर साफ है कि उक्त रास्ता लंबे समय से चल रहा है और यह पहले किसी के भी ध्यान में नहीं अाया।

मैरा व पंडोरी बीत के जंगल में निकालने इस रास्ते के लिए किसी ने भी कोई मंजूरी नहीं ली है। इससे वन विभाग के स्टाफ की मिलीभगत का साफ पता चल जाता है। उक्त रास्ता एक तरफ गढ़शंकर नंगल रोड के साथ आकर लगता है तो दूसरी तरफ जिला शहीद भगत सिंह नगर के गांव रूड़की तक सरेआम बना हुआ है। गढ़शंकर नंगल रोड पर वन विभाग के अधिकारी अकसर गुजरते हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

8 किलोमीटर अवैध रास्ते से सरकार को डेढ़ करोड़ से अधिक का घाटा

गांव मैरा व पंडोरी बीत के जंगल में निकाला गया अवैध रास्ता।

मंजूरी के लिए प्रति एकड़ देने होते हैं 12 लाख

बता दें कि वन क्षेत्र में कमर्शियल एक्टीविटी के लिए केंद्र सरकार के वन विभाग से मंजूरी लेनी पड़ती है और प्रति एकड़ दस से बारह लाख रुपए जमा कराने के अलावा जितनी जमीन उपयोग की जाएगी उतनी जमीन वन विभाग को खरीद कर देनी पड़ती है। इस तरह आठ किलोमीटर रास्ते में जमीन भी करीब आठ एकड़ बन जाएगी, जिसका करीब एक करोड़ वन विभाग में जमा होगा और उतनी ही नॉन पीएलपीए 1900 एक्ट रहित जमीन भी विभाग को संबंधित व्यक्ति को देनी पड़ेगी। अगर एक एकड़ की जमीन का दाम दस लाख भी हो तो सत्तर लाख की विभाग को जमीन देनी पड़ेगी। जिससे साफ है कि जंगल में आठ किलोमीटर रास्ता बनाने के लिए डेढ़ करोड़ वन विभाग के खजाने में जमा करवाना होगा।

कार्रवाई करेंगे, रास्ता बंद करवाएंगे : डीएफअो


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