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गुरदासपुर से हदबंदी में घालमेल का फायदा उठाकर माइनिंग माफिया ने अदालतगढ़ और मराड़ा खड्‌डों में पार की हदें

राज्य में माइनिंग माफिया किस तरह बेखौफ होकर सारी हदें पार कर चुका है और जिन माइनिंग अधिकारियों पर अवैध माइनिंग...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:55 AM IST

गुरदासपुर से हदबंदी में घालमेल का फायदा उठाकर माइनिंग माफिया ने अदालतगढ़ और मराड़ा खड्‌डों में पार की हदें
राज्य में माइनिंग माफिया किस तरह बेखौफ होकर सारी हदें पार कर चुका है और जिन माइनिंग अधिकारियों पर अवैध माइनिंग रोकने के लिए तैनात किया गया है, वे ही माफिया के वश में होकर कैसे सरकार की आंख में धूल झोंककर असली हालात की गलत रिपोर्ट दे रहे हैं, इसका उदाहरण गुरदासपुर के एडीसी जनरल की 6 मार्च को पठानकोट की दो खड्डों पर कार्रवाई में सामने आया है। गुरदासपुर के एडीसी जनरल विजय स्याल ने 6 मार्च देर रात पठानकोट के गांव मराड़ा और गांव अदालतगढ़ की खड्डों में माइनिंग का जायजा लेकर वहां अवैध माइनिंग करते हुए एक पोकलेन मशीन और 6 टिप्पर जब्त किए थे और मौके पर ही मराड़ा खड्ड में माइनिंग बैन कर दी थी।

छापे के बाद एडीसी ने डीसी पठानकोट को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें जानकारी दी है कि अदालतगढ़ खड्ड में भी 10 फीट से ज्यादा गहरी माइनिंग हो चुकी है, जिससे धुस्सी बांध को खतरा है। पोकलेन मशीनों से सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक गैरकानूनी माइनिंग की जा रही थी। अदालतगढ़ खड्ड में न तो भार तोलने वाला कोई कंडा है और न ही कम्प्यूटराइज्ड बिल काटने की व्यवस्था है। खड्डों की बाउंड्री नहीं है और पूर्व से पश्चिम तक पिलरों के दोनों ओर माइनिंग हो रही है। छापे के दौरान पकड़े गए ड्राइवर से जो बिल कब्जे में लिया गया था, वह जीएम माइनिंग से स्वीकृत नहीं था। ठेकेदार निश्चित की गई रेट लिस्ट के नोटिस बोर्ड नहीं लगाते। जमीन के मालिक को रॉयल्टी नहीं दी जा रही।

रिपोर्ट में लिखा है कि रात साढ़े 9 बजे रेत से भरे टिप्पर मिलने से यह बात क्लियर है कि खड्डों में माइनिंग निर्धारित समय के बाद भी की जा रही है। इसके अलावा सारी मशीनरी बिना कागजों के इस्तेमाल हाेती है।

जिले की दो खड्‌डों पर गुरदासपुर के एडीसी जनरल के छापे की रिपोर्ट का सच

खनन से खतरे में धुस्सी बांध, सरकार को गुमराह कर रहे माइनिंग अफसर

सरहद की खड्ड में कार्रवाई पर भाग जाते हैं पड़ोसी जिले में

रिपोर्ट में बताया गया है कि जो खड्डें दो जिलों की सरहद पर हैं, वहां अवैध माइनिंग करने वाले कानूनी कार्रवाई के समय पड़ोसी जिले में भाग जाते हैं। मिसाल के तौर पर अदालतगढ़ और मराड़ा में गैरकानूनी माइनिंग होती है। जब पठानकोट के अधिकारी छापा मारते हैं तो माइनिंग करने वाले गुरदासपुर में भाग जाते हैं और जब गुरदासपुर से कार्रवाई होती है तो पठानकोट में शेल्टर ले लेते हैं।

खड्‌ड पर कार्रवाई के समय दोनों सरहदी जिलों के नोडल अफसर एडीएम संग तैनात किए जाएं

एडीसी ने लिखा है कि माइनिंग विभाग के अधिकारी झूठी जानकारी देकर प्रशासन को गुमराह करते हैं। एडीसी ने तैयार की इस रिपोर्ट की कॉपी माइनिंग विभाग के मुख्य सचिव को भेजकर सिफारिश की है कि जिला स्तर पर विभाग प्रमुखों, जिनमें ब्लॉक और सब डिवीजन स्तर के अधिकारी शामिल हों, पर आधारित मोबाइल टीम बनाई जानी चाहिए। चेकिंग के दौरान माल विभाग, पुलिस, ट्रांसपोर्ट, एक्साइज और माइनिंग विभाग का 1-1 मैंबर होना चाहिए। दोनों जिलों के नोडल अफसर एडीएम को दिए जाएं ताकि कानूनी कार्रवाई के समय माइनिंग करने वाले दूसरे जिले में न भाग सकें।

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