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इंटर स्टेट माल की ढुलाई पर आज से ई-वे बिल जरूरी

देशभर में राज्य के अंदर और बाहर एक अप्रैल से 50 हजार से ऊपर की माल ढुलाई पर ई-वे बिल लागू कर दिया गया है। रविवार से 50...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:55 AM IST

इंटर स्टेट माल की ढुलाई पर आज से ई-वे बिल जरूरी
देशभर में राज्य के अंदर और बाहर एक अप्रैल से 50 हजार से ऊपर की माल ढुलाई पर ई-वे बिल लागू कर दिया गया है। रविवार से 50 हजार रुपए के माल की ढुलाई पर ई-वे बिल लेना जरूरी होगा। पंजाब सरकार ने इंट्रा स्टेट ई-वे बिल का समय और 2 महीने बढ़ा दिया है। दूसरी तरफ होलसेल मेडिकल एसोसिएशन ने ई-वे बिल के जटिल प्रावधानों के चलते लाइफ सेविंग ड्रग्स को दायरे से बाहर करने की मांग की है।

बता दें कि एक फरवरी से ई-वे बिल लागू किया था। इसके तहत 50 हजार से ज्यादा की बिक्री उसको एक से दूसरी जगह ले जाने से पहले कारोबारियों को इलेक्ट्रॉनिक-वे यानी ई-वे बिल के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूर किया गया था। जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) वेबसाइट पर पंजीकरण के बिना राज्य के भीतर और बाहर सामान ले जाने पर रोक लगाई गई थी। इसके तहत 100 किलोमीटर तक के लिए एक दिन और एक हजार किलोमीटर से ज्यादा के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया गया है।

कॉमन पोर्टल पर ई-वे बिल जेनरेट होने के बाद सप्लायर, माल पाने वाले और ट्रांसपोर्टर को ई-वे बिल नंबर उपलब्ध कराया जाना था। ट्रांसपोर्टर या माल ढुलाई करने वाले व्यक्ति को रसीद या सप्लाई बिल अथवा डिलीवरी चालान के साथ ही ई-वे बिल की कॉपी या इसका नंबर साथ में रखना जरूर किया गया था। इसे या तो बिल के रूप में रखा जाएगा या वाहन में रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन डिवाइस (आरएफआइडी) लगा होने पर इलेक्ट्रॉनिक मोड में रखने की बात कही गई थी। ई-वे बिल की साइट स्लो और क्रैश होने की वजह से ट्रेडर्स दिक्कत के बाद उसे सरकार ने दो महीने के लिए मुलतवी कर दिया था। अब रविवार से देशभर में इंटर स्टेट माल ढुलाई पर ई-वे बिल लेना जरूर होगा।

पंजाब ने इंट्रा स्टेट ई-वे बिल 2 माह बढ़ाया

केंद्र सरकार पहली अप्रैल से इंटर स्टेट 50 हजार से ऊपर माल की ढुलाई पर ई-वे बिल लागू करने जा रहा ही। वहीं, पंजाब सरकार ने इंट्रा स्टेट (अंतर जिला) ई-वे का समय दो महीने के लिए और आगे बढ़ा दिया है। इस संबंधी डिपार्टमेंट आॅफ एक्साइज एंड टेक्सेशन ने नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि 2 महीने में सप्लायर को इंट्रा स्टेट छोड़कर इंटर स्टेट ई-वे बिल ही जनरेट करना होगा।

होलसेल मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट राजेश महाजन ने कहा कि ई-वे बिल के प्रावधान में एक प्रोडेक्ट को दूसरी जगह पहुंचाने का समय तय किया गया था, जबकि मरीज को किसी भी समय लाइफ सेविंग ड्रग्स की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए ई-वे बिल में दवाओं को बाहर किया जाना चाहिए।

व्यापार मंडल के सेक्रेटरी एलआर सोढ़ी का कहना है कि जीएसटी पोर्टल ठीक से चल नहीं पा रहा है। ई-वे बिल लागू कर नई मुसीबत खड़ी की जा रही है। पहले सरकार अपने पोर्टल को दुरुस्त करे।

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