पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Pathankot News Dc And Mla Engaged In Civil Line 2 2 Times But Patients Still Have To Buy Medicines From Outside

डीसी व विधायक 2-2 बार सिविल की लाइन में लगे, पर अभी भी मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही दवाएं

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सिविल अस्पताल में कमीशन के चक्कर में डाॅक्टरों द्वारा मरीजों को बाहरी मेडिकल स्टोरों से खरीदने के लिए लिखी जा रही दवाओं पर रोक लगाने के लिए खुद डीसी रामवीर व विधायक अमित विज 2-2 बार लाइन में लगकर चेकिंग कर चुके हैं। सिविल की डिस्पेंसरी में दवाएं नहीं मिलने पर अस्पताल प्रशासन को सख्ती के साथ बाहरी दवाएं लिखना रोकने के निर्देश दिए थे और कहा था कि अस्पताल की डिस्पेंसरी से ही मरीजों को सभी दवाएं दी जाएं। भास्कर ने बुधवार को मरीजों को कितनी दवाएं मिल रही हैं, इसका रियलिटी चेक किया तो पाया कि अभी भी मरीजों को बाहर से ही दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। डाॅक्टर्स द्वारा लिखी जा रही 5-6 दवाओं में से 2 से 3 दवाएं बाहर से ही खरीदनी पड़ रही हैं। बताया गया कि सिविल की डिस्पेंसरी में फ्री में मिलने वाली करीब 80 तरह की दवाएं मौजूद हैं, जबकि डिस्पेंसरी में 110 तरह की जरूरी दवाएं होनी चाहिए। बुधवार को भास्कर के रियलिटी चेक में हालात में ज्यादा सुधार देखने नहीं मिला।

एसएमओ डाॅ.भूपिंद्र सिंह का कहना है कि सभी डाॅक्टर्स से मीटिंग कर कहा गया है कि ओपीडी व इमरजेंसी में आने वाले सभी मरीजों को फ्री दवाएं ही लिखी जाएं।

डिस्पेंसरी में मरीजों को फ्री मिलने वाली 110 में से 80 दवाइयां ही उपलब्ध, 30 की शॉर्टेज

सिविल की डिस्पेंसरी के बाहर दवा लेने के लिए खड़े मरीज।

कैल्शियम की मेडिसन मिली, 2 बाहर से खरीदीं

तारागढ़ के मराडा निवासी कुलवीर ने बताया कि बेटे विकास की टांग में दर्द था। उन्होंने हडि्डयों के डाॅक्टर से चेकअप करवाया। वह पर्ची पर लिखी मेडिसन डिस्पेंसरी में लेने गए तो उन्हें कैल्शियम की मेडिसन मिली। उन्हें 2 दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ीं।

आंखों में परेशानी थी, ड्रॉप्स बाहर से लाना पड़ा

सिविल अस्पताल में चेकअप करवाने पहुंचे हुलेड़ निवासी बुजुर्ग प्रेम सिंह ने बताया कि उसकी आंख में प्राॅब्लम थी। उसने सिविल अस्पताल में आकर चेकअप करवाया। उसे आंख का ड्राॅप्स डिस्पेंसरी से नहीं मिला। उसे पैसे खर्च कर आंखों का ड्रॉप्स लेना पड़ा।

6 अगस्त को प्रकाशित अंक में छपी खबर। -भास्कर

पीसीएम, स्किन, बच्चों, आंखों की दवाएं नहीं मिल रहीं

डिस्पेंसरी में मौजूदा समय में 110 तरह की दवाओं में 80 से अधिक दवाएं मौजूद हैं। लेकिन, डिस्पेंसरी में फ्री में मिलने वाली पीसीएम (पैरासिटामोल), स्किन, छोटे बच्चों, आंखों, कानों के ड्राप्स, व हडि्डयों की कुछ दवाएं खत्म हैं। इससे नवजात व स्किन के मरीजों को मजूबरी में दवाएं जन औषधि व प्राइवेट मेडिकल स्टोर पर खरीदनी पड़ रही हैं। लोगों ने सेहत विभाग व सरकार से मांग रखी है कि जो दवाएं डिस्पेंसरी में खत्म है, उसे मुहैया करवाया जाए।

गर्भवती बहू की दवाई लेनी थी, दो बाहर से लीं

नगरोटा निवासी महिला स्वर्ण देवी ने बताया कि उनकी बहू सुमन देवी गर्भवती है। वह बहू की मेडिसन लेने अस्पताल में आई थी। यहां उसे तीन दवाइयां तो अस्पताल की डिस्पेंसरी से मिल गईं, लेकिन दो मेडिसन बाहर से खरीदनी पड़ीं। इससे परेशान होना पड़ा।

पर्ची पर लिखी 3 में से एक दवाई खरीदनी पड़ी

रानीपुर निवासी महिला स्वर्ण कौर ने बताया कि वह सिविल अस्पताल में चेकअप करवाने आई थी। ओपीडी में डाक्टरों से चेकअप करवाने के बाद पर्ची पर लिखी दवाएं डिस्पेंसरी में लेने गई। जहां उसे दो दवाएं मिल गई, लेकिन एक दवा नहीं मिली।

कमीशन के चक्कर में बाहर की दवाएं लिखने की मिली थी शिकायतें

सिविल अस्पताल में डाॅक्टर्स द्वारा कमीशन के लिए मरीजों को बाहरी मेडिकल स्टोर की दवाएं लिखने की शिकायतों के बाद 18 जनवरी को डीसी रामवीर खुद डिस्पेंसरी में मरीजों के साथ लाईन में लगे थे और शिकायतें सही पाई गईं। इसके बाद 31 जनवरी को विधायक अमित विज ने भी अस्पताल में पहुंचकर लाइन में लगे और मरीजों को मिल रही दवाओं की जानकारी ली। बाद में उन्होंने सख्ती से कहा कि लोगों को हाॅस्पिटल से ही दवाएं दी जाएं। इसके बाद डीसी ने फिर अस्पताल पहुंचकर मरीजों को डिस्पेंसरी से दवाएं देने को कहा था। अब 5 अगस्त को विधायक अमित विज सिविल अस्पताल पहुंच दूसरी बार दवाओं के लिए खुद लाइन में लगे थे तो डिस्पेंसरी में दवा होने के बावजूद कुछ मरीजों को बाहर मेडिकल स्टोर पर मेडिसन खरीदने को भेजा गया था, जिस पर विधायक ने एसएमओ को इसे सख्ती से रोकने को कहा।

खबरें और भी हैं...