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होली का तोहफा : निगम की 607 दुकानों के किराएदारों को मिलेगा मालिकाना हक

एक वर्ष पहले
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पिछले कई साल से दुकानों के मालिकाना हक के लिए नगर निगम के चक्कर लगाने वाले नगर निगम के 607 किराएदारों के लिए होली पर अच्छी खबर आई है। पंजाब विधानसभा में द पंजाब मैनेजमेंट एंड ट्रांसफर आॅफ म्युनिसिपल प्रॉपटी एक्ट-2020 पास किए जाने से इन दुकानदारों को मालिकाना हक मिलने का रास्ता क्लीयर हो गया है। इससे दुकानदार एकमुश्त पैसा जमा कर मालिक बन जाएंगे। इसके लिए कलेक्टर रेट तय किए गए हैं। इससे निगम भी आर्थिक तौर पर मजबूत होगा।

अधिकारियों के मुताबिक 607 दुकानदारों के मालिकाना हक देने से निगम को करीब 18 करोड़ की आमदनी होगी। पॉलिसी के मुताबिक 12 साल या उससे अधिक समय से निगम की प्राॅपर्टी पर काबिज लोगों को इसका मालिकाना हक मिलेगा। इससे पहले 30 साल से पुराने कब्जाधारियों को मालिकाना हक देने का प्रावधान था और उन्हें तीन प्रूफ भी जमा कराने होते थे। निगम के पास कुल 607 दुकानें हैं जो कि गांधी चौक, मेन बाजार, डाकखाना चौक, शाहपुर रोड, कबीर नगर, सैनगढ़, माॅडल टाउन, सब्जी मंडी में हैं, दुकानों की कीमत करोड़ों रुपए है, लेकिन किराया मात्र 100 रुपए प्रति महीने से 7 हजार रुपए प्रति महीना है।

निगम के सुपरिंटेंडेंट इंद्रजीत सिंह का कहना है कि अभी पॉलिसी विधानसभा में पास की गई है और उसका नोटिफिकेशन आने के बाद ही सारे नियम क्लीयर होंगे। बहरहाल प्राॅपर्टी का मालिकाना हक तय दरों पर देने से निगम को भी आमदनी हो सकेगी। सरकार के इस फैसले का दुकानदारों ने स्वागत किया है।

}पॉलिसी के मुताबिक 12 साल या इससे अधिक समय से निगम की प्राॅपर्टी पर काबिज दुकानदारों को मिलेगा लाभ

61 लाख किराया, 21 लाख बकाया

मौजूदा समय में शहर के गांधी चौक, कबीर नगर, कार्पोरेशन कार्यालय के सामने वाली मॉडल टाउन ढांगू रोड की कुल 607 दुकानों से 61 लाख रुपए सालाना किराए के रूप में वसूल कर रहा है, जबकि अभी भी दुकानदरों का 21 लाख रुपए बकाया पड़ा हुआ है। 12 दुकानदारों ने 15 साल से 12 लाख रुपए जमा नहीं किया है।

18 करोड़ के करीब होगी आमदन

निगम को 150 गज की एक दुकान से जहां सालाना 1200 से 7 हजार रुपए किराया मिलता था, दुकानें बेचकर 18 करोड़ के आसपास रेवेन्यू आने की उम्मीद है। इसके बाद निगम दुकानदारों से प्रॉपर्टी टैक्स वसूलेगा। 150 गज की दुकान को प्रॉपर्टी टैक्स के बेसिक रेट पांच रुपए से कैलकुलेट किया जाए तो दुकानदार को सालाना 6750 रुपए देने पड़ेंगे।
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