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दयानंद चेयर का संस्कृत विभाग में विलय सही नहीं : तुली

पंजाब विश्वविद्यालय में यूजीसी द्वारा स्थापित दयानंद चेयर को संस्कृत विभाग में विलय करने के विरोध में आर्य समाज...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:30 AM IST

पंजाब विश्वविद्यालय में यूजीसी द्वारा स्थापित दयानंद चेयर को संस्कृत विभाग में विलय करने के विरोध में आर्य समाज मंदिर माडल टाउन, आर्य समाज मेन बाजार व आर्य समाज मंदिर सुजानपुर ने डीसी निलिमा को ज्ञापन सौंपा। प्रधान कैलाश चंद्र सैनी, नरेंद्र महाजन, जगदीश सैनी, विनोद महाजन की अध्यक्षता में मीटिंग की गई।

इस अवसर पर आर्य समाज मंदिर माडल टाउन के प्रवक्ता पंकज तुली और आर्य समाज मैन बाजार के मंत्री संजीव तुली ने बताया कि महर्षि दयानंद चेयर को संस्कृत विभाग में विलय करना आर्य समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ हैं। महर्षि दयानंद का मानव जाति के लिए अपूर्ण योगदान रहा हैं, स्त्री शिक्षा, विधवा विवाह, स्त्री प्रथा व छुआ छूत दूर करने में अहम योगदान रहा हैं। उन्होंने कहा कि चेयर की स्थापना 1975 से हुई थी तब से लेकर इस चेयर के माध्यम से 70 शोधकर्ताओं ने महर्षि दयानंद के विचारों तथा आर्य समाज तथा वेदो पर शोध करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की हैं। पंजाब विश्व विद्यालय अपनी कुटनीति के द्वारा पहले ही महाकवि कालिदास व भक्त कबीर चेयर को समाप्त कर चुका हैं अब महर्षि दयानंद चेयर को संस्कृत विभाग के अंतर्गत कर खत्म करने की तैयारी की जा रही है जोकि सहन न होगा। अवसर पर मुन्नी लाल त्रेहन, अशोक कुमार, संतोष महाजन, शांति, बलदेव राज, सुशील गुप्ता, इंद्र सैन मित्तल चन्द्र कांता, मनीषा,तरुण, विकास गुप्ता, किरण, निर्मल सैनी मौजूद थे।

आर्य समाज मंदिरों का शिष्टमंडल डीसी पठानकोट को मांग पत्र सौंपते हुए।

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