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गुरु सेवा का अवसर सौभाग्य से मिलता है

एक वर्ष पहले
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चैत्र संक्रांति के पावन अवसर पर खत्री सभा हाल में निर्मल सेवानंद बाई की अध्यक्षता में वार्षिक सत्संग, भजन-कीर्तन करवाया गया। निर्मल सेवानंद बाई ने बताया कि इस सत्संग, भजन-कीर्तन समारोह में श्री अद्वैत स्वरूप हीरा परम श्रद्धाधाम के पीठाधीश्वर श्रोत्रिय ब्रह्मनिष्ठ श्री श्री 1008 स्वामी दिव्यानंद पुरी महाराज विशेष रूप से मौजूद रहे। स्वामी दिव्यानंद पुरी महाराज ने उपस्थित संगतों के विशाल समूह को गुरु महिमा के बारे में प्रवचन किए। कहा कि जब तक पारब्रह्म, परमेश्वर स्वरूप गुरु की कृपा ना हो तब तक प्राणी को सत्संग में उपस्थित होना दुर्लभ होता है। उन्होंने बताया कि प्राणी को गुरु चरणों की सेवा का अवसर बड़े सौभाग्य से प्राप्त होता है, इस सुअवसर को व्यर्थ नहीं जाने देना चाहिए। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में भी गुरु को सर्वोपरि बताया गया है। सत्संग में स्वामी दिव्यानंद पुरी महाराज ने अपने गाए हुए प्रभु भक्ति के भजनों द्वारा उपस्थित श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। पूरा पंडाल प्रभु भजनों से गूंज उठा।

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