‘अध्यात्म कामनाआें से कर सकता है मुक्त’

Patiala News - वीर हकीकत राय ग्राउंड में 25वें 5 दिवसीय भक्ति योग वेदांत संत सम्मेलन के दूसरे दिन स्वामी परमानंद गिरी जी महाराज ने...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:16 AM IST
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वीर हकीकत राय ग्राउंड में 25वें 5 दिवसीय भक्ति योग वेदांत संत सम्मेलन के दूसरे दिन स्वामी परमानंद गिरी जी महाराज ने सत्संग करते हुए कहा कि मन को काबू में रखना जरूरी है। मन की कामनाएं ही दुःख देती हैं। सिर्फ़ अध्यात्म ही मन की कामनाआें से मानव को मुक्त कर सकता है। स्वामी परमानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को चाहिए कि हमेशा लेने की बजाय किसी को देने में सहयोगी बने। उन्होंने कहा कि गृहस्थी बनो, परन्तु श्रेष्ठ गृहस्थी बनो। राजा बनो, परन्तु भरत की तरह बनो जैसे भरत ने राजा राम की चरण पादूकाएं सिहांसन पर रख कर आप निर्लिप्त हो कर राज किया, उसी तरह ही व्यक्ति संसारिक काम तो करे, परन्तु मन में परमात्मा का ध्यान न भूले। मौके स्वामी ज्योतिर्मय नंद गिरी, स्वामी अनूभूतानन्द गिरी, स्वामी जगत प्रकाश त्यागी, स्वामी दिव्य चेतना, स्वामी वेदानन्द गिरी, स्वामी सत प्रकाश, हरिदास शास्त्री ने प्रवचन किए।

जो सीखता है वह ही शिष्य है: संत राम सिंह

संत बाबा राम सिंह नानकसर सींघड़ा करनाल वालों ने कहा कि जो सीखता है वह ही शिष्य है, वह ही सिक्ख है। शिष्य और सिक्ख में कोई भी भेद नहीं है। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि हम दिन रात लग कर मकान, धन, शोहरत अपने परिवार और बच्चों के लिए कमाते हैं। फिर भी हमें कई बार दुख मिलता है क्योंकि जीवन में शान्ति नहीं है, शान्ति केवल अध्यात्म और गुरुओं के पास से प्राप्त हो सकती है।

भास्कर संवाददाता|पटियाला

वीर हकीकत राय ग्राउंड में 25वें 5 दिवसीय भक्ति योग वेदांत संत सम्मेलन के दूसरे दिन स्वामी परमानंद गिरी जी महाराज ने सत्संग करते हुए कहा कि मन को काबू में रखना जरूरी है। मन की कामनाएं ही दुःख देती हैं। सिर्फ़ अध्यात्म ही मन की कामनाआें से मानव को मुक्त कर सकता है। स्वामी परमानंद गिरी जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को चाहिए कि हमेशा लेने की बजाय किसी को देने में सहयोगी बने। उन्होंने कहा कि गृहस्थी बनो, परन्तु श्रेष्ठ गृहस्थी बनो। राजा बनो, परन्तु भरत की तरह बनो जैसे भरत ने राजा राम की चरण पादूकाएं सिहांसन पर रख कर आप निर्लिप्त हो कर राज किया, उसी तरह ही व्यक्ति संसारिक काम तो करे, परन्तु मन में परमात्मा का ध्यान न भूले। मौके स्वामी ज्योतिर्मय नंद गिरी, स्वामी अनूभूतानन्द गिरी, स्वामी जगत प्रकाश त्यागी, स्वामी दिव्य चेतना, स्वामी वेदानन्द गिरी, स्वामी सत प्रकाश, हरिदास शास्त्री ने प्रवचन किए।

स्वामी ने किया था अांदाेलन|केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने सत्संग सुना। कहा कि वह आज धर्म और राजनीति में जो कुछ भी हैं वह अपने गुरू की कृपा से ही हैं। उन्होंने कहा कि मेरे गुरू स्वामी परमानंद गिरी ने धारा 370 ख़त्म कराने के लिए बड़ा आंदोलन किया था। भाग्यशाली हूं कि मैं धारा 370 और 35ए को खत्म होते अपनी आंखों के साथ देख सकी। उन्होंने कहा कि मेरा राजनीति में जाना सार्थक हो गया।

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