पितृपक्ष की अमावस्या पर सर्व पितृ मोक्ष संयोग

Patiala News - पितृपक्ष का शुभारंभ शुक्रवार को पूर्णिमा से हो गया। इस बार पितृ पक्ष पूरे 16 दिन के होंगे। समापन 28 सितंबर को सर्व...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:23 AM IST
Patiala News - all pitra moksha coincidence on the new moon of pitriksha
पितृपक्ष का शुभारंभ शुक्रवार को पूर्णिमा से हो गया। इस बार पितृ पक्ष पूरे 16 दिन के होंगे। समापन 28 सितंबर को सर्व पितृ मोक्ष अमावस्या पर होगा। श्रद्धालु पितरों को याद करते हुए उनके निमित्त तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान कर अपनी श्रृद्धा, अास्था और कृतज्ञता प्रकट करेंगे। पितृ पक्ष के पहले दिन शुक्रवार से ही पडितों के सान्निध्य में शहर के छोटे-बड़े तालाबों के घाटों पर तर्पण के जरिए जलांजलि देने की शुरुअात हो गई जो पितृमोक्ष अमावस्या तक जारी रहेगी। पं. होशियार चंद शर्मा अत्री के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या तक का समय पितृपक्ष, श्राद्धपक्ष या कनागत 16 श्राद्ध कहलाता है। पितृपक्ष 13 सितंबर से शुरू होकर 28 सितंबर तक है। शनिवार को प्रतिपदा (एकम) तिथि मानी जाएगी और एकम का श्राद्ध होगा। पितृ कार्य व श्राद्ध कर्म मध्यान्ह व्यापिनी किए जाते हैं। ब्रह्म पुराण के अनुसार इस अवधि में पितृ परिजनों के घर वायु रूप में आते हैं, अतः उनके निमित्त तर्पण व पिंडदान का विधान है।

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या तक का समय पितृपक्ष

पितृ पक्ष में सभी तिथियों का अलग-अलग महत्व है। आमतौर पर किसी व्यक्ति की मृत्यु जिस तिथि पर होती है, पितृ पक्ष में उसी तिथि पर श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। पितृ पक्ष में किस तिथि पर किसका श्राद्ध होता है...

पूर्णिमा, 13 सितंबर|जिन लोगों की मृत्यु पूर्णिमा तिथि पर हुई हो, उनका श्राद्ध करना चाहिए। इस तिथि से पितृ पक्ष शुरू होता है।

प्रतिपदा, 14 सितंबर| उनका श्राद्ध कर्म किया जाता है, जिनकी मृत्यु किसी भी माह के किसी भी पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर हुई हो। नाना-नानी के परिवार किसी की मृत्यु हुई हो और उसकी मृत्यु तिथि ज्ञात न हो तो उसका श्राद्ध प्रतिपदा पर किया जाता है।

द्वितीया, 15 सितंबर|द्वितिया तिथि पर मृत लोगों का श्राद्ध इस दिन किया जाता है।

तृतीया, 16 और 17 सितंबर|जिसकी मृत्यु तृतीया तिथि पर हुई हो, उसका श्राद्ध इस दिन किया जाता है। इस बार दो दिन तृतीया तिथि रहेगी।

चतुर्थी, 18 सितंबर|इस तिथि पर उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु चतुर्थी तिथि पर हुई हो।

पंचमी, 19 सितंबर| पंचमी तिथि पर मृत व्यक्ति का इस दिन किया जाता है। अगर किसी अविवाहित व्यक्ति की मृत्यु हो गई है तो उसका श्राद्ध इस तिथि पर करना चाहिए।

षष्ठी, 20 सितंबर|षष्ठी तिथि पर उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु षष्ठी तिथि पर हुई हो।

सप्तमी, 21 सितंबर|जिस व्यक्ति की मृत्यु किसी भी माह और किसी भी पक्ष की सप्तमी पर हुई है, उसका श्राद्ध इस तिथि पर किया जाता है।

अष्टमी, 22 सितंबर| जिन लोगों का देहांत किसी माह की अष्टमी तिथि पर हुई है, उनका श्राद्ध इस दिन किया जाता है।

नवमी और दशमी, 23 सितंबर|इस बार नवमी और दशमी तिथि एक ही दिन रहेगी। अगर किसी महिला की मृत्यु हो गई है और मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है तो उसका श्राद्ध नवमी तिथि पर किया जाता है। दशमी तिथि पर मृत लोगों का श्राद्ध दशमी तिथि पर किया जाता है। अगर माता की मृत्यु हो गई है तो नवमी तिथि पर उनका श्राद्ध करने की परंपरा है।

एकादशी, 24 सितंबर|इस तिथि पर मृत लोगों का और मृत संन्यासियों का श्राद्ध एकादशी पर किया जाता है।

द्वादशी, 25 सितंबर|मृत लोगों का श्राद्ध द्वादशी तिथि पर किया जाता है।

त्रयोदशी, 26 सितंबर|अगर किसी बच्चे की मृत्यु हो गई है तो उसका श्राद्ध इस तिथि पर करने की परंपरा है।

चतुर्दशी, 27 सितंबर| जिन लोगों की मृत्यु किसी दुर्घटना में हो गई है, उनका श्राद्ध चतुर्दशी तिथि पर करना चाहिए।

अमावस्या, 28 सितंबर|सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों के लिए श्राद्ध करना चाहिए।

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