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आेला वार ी से प्रति एकड़ दो क्विंटल घटेगा झाड़

एक वर्ष पहले
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कोरोना का असर: 12 मार्च से शुरू होने वाले किसान मेले रद्द, बीज मिलते रहेंगे

कोरोना वायरस के मद्देनजर जारी निर्देशों का पालन करते हुए पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी ने 12 मार्च से शुरू हो रही किसान मेलों की शृंखला को रद्द कर दिया है। विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. जसकरन सिंह महल ने बताया कि यह निर्णय उप-कुलपति डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। डॉ. माहल ने कहा कि ऐसी गंभीर स्थिति में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, पंजाब सरकार के निर्देशों का पालन करना हमारा सामाजिक कर्त्तव्य है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि किसानों की बुआई की जरूरतों को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र / क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बीज भंडार में बीज, जैव उर्वरक और कृषि सामग्री की आपूर्ति जारी रखेंगे। पीयू के गेट नंबर-1 पर सप्ताह में सात दिन बीज और खेती की दुकानें खुली रहेंगी। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया कि कोई भी समस्या नहीं आने देंगे।

गायें चुका रहीं भारत-पाक के बीच खराब रिश्तों की कीमत

जालंधर | भारत-पाकिस्तान के बीच खराब रिश्तों की कीमत पशुधन को भी चुकानी पड़ रही है। साहिवाल नस्ल के सुधार में पाकिस्तान हमसे आगे है। दोनों देशों के बीच खटास के कारण पशुधन और विकसित स्पर्म का आयात प्रतिबंधित है। नूरमहल स्थित डीजेजेएस संस्थान की कामधेनू गौशाला में देसी गायों की नस्ल सुधार पर काफी काम किया जा रहा है। इस संबंध में स्वामी चिन्मयानंद का कहना है कि देसी गायों की नस्ल सुधरेगी तो पूरे देश को फायदा होगा। साहिवाल नस्ल से मिलने वाला ए-2 दूध स्वास्थ्य के अाैषधी समान है। दुनियाभर में देसी गायों के दूध काे जर्सी की तुलना में बेहतर माना गया है। नस्ल सुधार कार्यक्रम के लिए भारत सरकार पशुधन के आयात की इजाजत दे तो इससे फायदा होगा। देसी गायों की नस्ल सुधरेगी तो गाय पालक किसान के साथ-साथ पूरे देश काे फायदा हाेगा।

नदीननाशक का अधिक प्रयोगगेहूं की फसल के लिए नुकसानदेह

भास्कर न्यूज |गुरदासपुर

गेहूं सहित किसी भी फसल पर नदीन नाशकों का असर तब होता है, जब फसल 30 से 35 दिन की हो। यदि मेट्रिबूजिन तत्व वाले नदीन नाशक जैसे शगुन, एसीएम-9 व अन्य जैसे एटलांटिस का इस्तेमाल गेहूं की छोटी फसल पर किया जाए तो यह बुरा असर डाल सकते हैं। नदीन नाशकों का इस्तेमाल अधिक देरी से करने पर भी यह फसल का नुकसान करते हैं। नदीन नाशकों की सिफारिश की मात्रा को 150 लीटर पानी में घोलकर फ्लैट फैन नोजल बरतकर और खेत में एक सार स्प्रे करना बहुत जरुरी है। नदीन नाशकों की स्प्रे \\\'गन स्प्रे\\\' से बिना किए या यूरिए में मिलाकर छट्‌टा देने से भी पूरा फायदा नहीं मिल पाता।

मधुमक्खी पालन से सालाना चार लाख कमा रहा बलजीत

भास्कर न्यूज |फाजिल्का

जिले के गांव भागो का प्रगतिशील किसान बलजीत सिंह 10 साल से मधुमक्खी पालन कर रहा है। बलजीत सिंह ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र बठिंडा से मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग के बाद बागबानी विभाग से 50 बॉक्स पर 80 हजार रुपए की सब्सिडी लेकर 20 बॉक्सों से कारोबार शुरू किया। आज उसके पास 500 बॉक्स हैं। इनसे वह प्रति वर्ष 3-4 लाख रुपए सभी खर्च निकालकर कमा रहे हैं। मधुमक्खी पालन से परिवार का बढ़िया गुजारा चल रहा है। उसने जिले के बेरोजगार नौजवानों को सहायक धंधों से जुड़ने को कहा। उसने बताया कि मौसम के अनुसार एक वर्ष में एक बक्से से करीब 30 किलो शहद निकाला जा सकता है। बक्सों को फूलों के मौसम के हिसाब से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश आदि लेकर जाना पड़ता है।

नवांशहर मिल सेंटर कोटे की 70,000 क्विंटल चीनी निर्यात करेगी, पहले गुजरात भेजने के निर्देश

अमित शर्मा | नवांशहर

केंद्र सरकार की तरफ से नई चीनी नीति के तहत चीनी मिल नवांशहर में रिजर्व रखवाई गई चीनी का निर्यात करना शुरू कर दिया है। इसके तहत चीनी िमल नवांशहर से केंद्र सरकार ने करीब 70 हजार 900 क्विंटल चीनी निर्यात करने के लिए मिल को निर्देश जारी किए हैं। चीनी मिल की तरफ से केंद्र के निर्देशों पर चीनी की निकासी शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि उक्त चीनी को फिलहाल गुजरात भेजने को कहा गया है। इसके बाद चीनी संभावित रूप से समुद्री रास्ते से अन्य देशों को सप्लाई की जाएगी। चीनी के निर्यात से चीनी मिल प्रबंधन खुश है। 2017-18 के दौरान नई पॉलिसी के तहत जो चीनी केंद्र सरकार ने रिजर्व रखवाई थी, उसको केंद्र निर्यात करना चाहता है, इससे चीनी मिल को आमदनी होगी ही साथ 70 हजार क्विंटल चीनी रखने में रिजर्व जगह भी खाली होगी। जगह खाली होने पर चीना का नया स्टाक लगाने को जगह मिलेगी।

युवा लेक्चरर ने नौकरी छोड़ हाइड्रोपोनिक खेती अपनाई, आज एग्रो कंपनी के मालिक

हरबिंदर सिंह भूपाल | मोगा

हाइड्रोपोनिक खेती के लिए आपको न तो जमीन चाहिए और न ही मिट्‌टी। इस खेती में पाइपों में केवल पानी और कुछ खनिजों के घोल की मदद से पौधों को उगाया जाता है। गेहूं और धान की रिवायती खेती तक सीमित किसानों के लिए उदाहरण बने धर्मकोट सब-डिवीजन के गांव केला के गुरकिरपाल सिंह ने लेक्चरर की नौकरी छोड़कर हाइड्रोपोनिक खेती को अपनाया और नौकरी से तीन गुना ज्यादा आय अर्जित कर रहे हैं। कमाई के नए साधन पैदा कर वो अब इलाके के किसानों के लिए मिसाल बन चुके हैं। किसान ने हाइड्रोपोनिक तकनीक से ब्रह्मी आैषधी की खेती शुरू की है। 37 साल के गुरकिरपाल सिंह कंप्यूटर एप्लीकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। प्रगतिशील किसान बनने की ललक में अच्छी आय वाली लेक्चरर की नौकरी छोड़ने वाले गुरकिरपाल आज लाखों में टर्नओवर वाली एग्रो बायोटेक्नाेलॉजी कंपनी के मालिक हैं।

फूलों के गजरे, बालियां और हेयर बैंड को प्रथम पुरस्कार

भास्कर संवाददाता | जालंधर

पीएयू में डॉ. एमएस रंधावा की याद में फूलों की प्रदर्शनी और प्रतियोगिता करवाई गई। पुरस्कार वितरण समारोह में पीएयू के विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. जेएस माहल ने कहा कि फूलों की बढ़ती मांग के कारण कई किसानों ने फूलों की खेती को लाभदायक व्यवसाय के रूप में अपनाया है। शो के प्रति प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, उन्होंने विजेताओं को पुरस्कार देकर बधाई दी। फ्लोरिकल्चर और लैंडस्केपिंग विभाग की प्रमुख डॉ. किरनजीत कौर भट्ट ने बताया कि विभिन्न फूलों की श्रेणियों के विजेताओं को लगभग 170 पुरस्कार (80 प्रथम और 90 द्वितीय पुरस्कार) दिए गए।

ट्राइसोइक्लाजोल एवं बुपरोफेजिन पर लगा प्रतिबंध

जालंधर | देशभर में ट्राइसोइक्लाजोल एवं बुपरोफेजिन पर सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय नई दिल्ली द्वारा भारत के राजपत्र में जारी असाधारण अधिसूचना क्रमांक 493 दिनांक 3 फरवरी 2020 में ट्राइसोइक्लाजोल एवं बुपरोफेजिन के इस्तेमाल से मनुष्य, पशुओं और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए उन्हें प्रतिबंधित किया गया है। इस अधिसूचना के बाद ये दोनों कीटनाशकों का प्रमाण-पत्र निरस्त माना जाएगा।

फूल गोभी के भाव बढ़े 35 रुपए तक हुआ रेट

जालंधर | सब्जी आैर फल के दाम में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। सब्जी विक्रेता रितेश ठाकुर के अनुसार मंडी में मटर 50 से 60 रुपए, बैंगन 25 से 30 रुपए किलो, लहसुन 100 से 120 रुपए, हरी मिर्च 50 से 60 रुपए, आलू 20 से 22 और प्याज 35 से 40 रुपए किलो, खीरा 30 से 35 रुपए, गाजर 20-25 रुपए किलो, टमाटर 20 से 25 रुपए किलो, अदरक 90 से 100 रुपए किलो, पत्ता गोभी 15-20 रुपए, शिमला मिर्च 50 से 55, फूल गोभी 30 से 35 रुपए, ब्रोकली 80-90, नींबू 60-65, मूली 15-20 रुपए किलो बिक रही है।

न्यूनतम तापमान 140 पहुंचा, रात को भी गर्मी

पटियाला | धूप खिलने से सूबे में अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेलिस्यस तक पहुंच गया है जबकि न्यूनतम तापमान में एक डिग्री का इजाफा होकर यह 14 डिग्री तक आ गया है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले 96 घंटे में हल्की बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले तीन दिन तक धूप खिली रहेगी। कृषि विज्ञानियों के अनुसार धूप अभी फसलों के अच्छी है। धूप खिलने से ही गेहंू का दाना परिपक्व होगा।

रोगग्रस्त फसलों से बीज संग्रहित करना फैलाता है करनाल बंट

संगरूर, बरनाला, तरनतारन और पठानकोट जिलों में ज्यादा नुकसान

क्या किया-किसानों की कमाई के नए रास्ते तलाशे, मंत्रा- फसली चक्र से निकलकर ही बन सकते हैं खुशहाल

हरपाल रंधावा | कपूरथला

मौसम में बदलाव से फसलों पर गिरे आेले वायरस की तरह काम करेंगे। वो इसलिए भी क्योंकि जल्द बोई गई गेहूं की फसल में अब डंडी यानी नाड़ की गांठें बननी शुरू हो गई हैं। आेलों से टूटी इन गांठों के चलते बिछी फसल का उठना अब संभव नहीं है। दो दिन की बे-मौसमी बारिश, आंधी और ओलावृष्टि से तापमान गिरने से ठंड भी बढ़ गई है। फसलों का अधिकतम नुकसान संगरूर, बरनाला, तरनतारन और पठानकोट जिलों में हुआ है। पंजाब सरकार ने माल विभाग को सूबे में नुकसान का जायजा लेने के लिए गिरदावरी कर दो दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। मौसम विभाग के अनुसार फसलों पर अभी खतरा टला नहीं है। 11 मार्च को एक बार फिर से बारिश का अलर्ट है। कृषि विभाग ने किसानों को इन दिनों गेहूं की फसल को पानी न देने की सलाह दी है। यदि बारिश से खेत में अधिक पानी जमा होता है तो उसे तुरंत बाहर निकालने की सिफारिश है। सूबे में 28 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल है। बे-मौसम बारिश से सब्जियां, मक्की व आलू की फसल को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में नमी से आलू पुटाई में देरी हो सकती है। कृषि विभाग के अनुसार गेहूं की फसल बिछने से प्रति एकड़ दो क्विंटल तक झाड़ में कमी आ सकती है। किसानों को सलाह है कि खेती माहिरों के बिना पूछे कोई स्प्रे न करें। जहां फसल बिछी है, वहां जलभराव न होने दें।

पैदावार मिलियन मीट्रिक टन में

असर नहीं करने वाली दवा का फिर इस्तेमाल न करें

जिन नदीन नाशकों ने पिछले वर्षों में अच्छा काम नहीं किया, उनका इस्तेमाल इस साल न किया जाए, बल्कि नए नदीन नाशक प्रयोग में लाएं। धान के जिन खेतों में खड़े नाड़ में हैप्पी सीडर से गेहूं की बिजाई और हाथ से चलने वाली त्रिफाली से गोडी हुई है, वहां पर नदीनों की अच्छी रोकथाम रहती है और गेहूं की फसल भी बहुत बढ़िया होती है। इसलिए किसानों को नदीनों की रोकथाम के लिए सिर्फ नदीन नाशकों पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए। बल्कि नदीन नाशकों के साथ-साथ उचित काश्तकारी ढंग इस्तेमाल कर नदीनों की रोकथाम को प्राथमिकता देनी चाहिए।

रानी मक्खियों, मक्खियों के जहर से भी कमाई

बलजीत सिंह ने बताया कि शहद उत्पादन से साथ रानी मक्खियाँ तैयार कर, रॉयल जैली, पराग (पोलन) , जहर इकट्ठा करके भी आमदन बढ़ाई जा सकती है।

दूसरे किसान भी अपनाएं: बागवानी अफसर

बागबानी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. जसपाल सिंह ने बताया कि काश्तकार सहायक धंधे अपनाकर लाभ बढ़ाएं। जिले के दूसरे किसानों से अपील की है कि वह िरवायती फसली चक्र से बाहर निकलकर सहायक धंधों जैसे कि मधुमक्खी पालन को अपनाएं।

चीनी का बाजार मूल्य 3600 रु. क्विंटल, मगर निर्यात 1960 रु. में हो रहा

निर्यात की जाने वाली चीनी मिल को 1960 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से देगी पड़ेगी जबकि इसका थोक मूल्य 3400 से लेकर 3600 रुपए है। ऐसे में इतनी कम कीमत पर 70 हजार क्विंटल चीनी निर्यात करके मिल को घाटा हो सकता है। मगर प्रबंधन की मानें तो यह चीनी केंद्र सरकार के कोटे में रिजर्व है। इसके तहत बाकी पैसा केंद्र सरकार चीनी मिल को देगी। जीएम कंवलजीत सिंह का कहना है कि मिल की ओर से केंद्र सरकार की रिजर्व चीनी काे ही निर्यात किया जा रहा है। इसकी तय कीमत के अनुसार ही राशि केंद्र सरकार देगी।

2017-18 में केंद्र सरकार ने पॉलिसी के तहत निर्यात के लिए रखवाई थी चीनी

लुधियाना | करनाल बंता रोग पंजाब के लगभग सभी भागों में पाया जाता है, लेकिन यह निकटतम पहाड़ियों और नदियों में अधिक प्रचलित है। इस पर जानकारी देते हुए पादप रोग विभाग के प्रमुख डॉ. नरेन्द्रपाल सिंह ने कहा कि हमले से केवल कुछ अनाज पर बीमारी का असर हुआ। रोगग्रस्त दानों से घिसने पर उनमें से काले रंग के ऊन के कीटाणु निकल आते हैं, जिससे दुर्गंध आती है। संक्रमित गर्भनाल संक्रमित है, जबकि परिणाम अभी भी बाहर हैं। रोग वायुजनित रोगजनकों के माध्यम से फैलता है। जई के कीटाणु 2-3 साल तक खेतों में रहते हैं, और जब गेहूं अंकुरित होते हैं, तो रोगाणु मिट्टी से हवा में बढ़ते हैं और बीजों पर बीज को संक्रमित करते हैं। ऐसी फसल से सुरक्षित बीज अगले साल तक फैल जाते हैं। यदि कटाई के समय फसल बादल पर टपक रही है, तो संक्रमण अधिक गंभीर हो जाता है। इसके अलावा, नाइट्रोजन उर्वरकों की अत्यधिक खपत और गिरती फसलें भी बीमारी को और गंभीर बना देती हैं। गेहूं के अंकुरण के समय, बीज की फसल पर 200 मि.ली. आप 25 टी / एकड़ की दर से 200 लीटर पानी में उबालकर कर्नेल बंट-फ्री बीज का उत्पादन कर सकते हैं।

कब कितनी पैदावार

2009 15.73 एमटी

2010 15.17 एमटी

2011 14.47 एमटी

2012 17.28 एमटी

2013 16.59 एमटी

2014 17.62 एमटी

2015 15.5 एमटी

कहां कितनी बारिश

क्षेत्र बारिश

बरनाला 50.0 एमएम

मुक्तसर 32.4 एमएम

कपूरथला 22.0 एमएम

फरीदकोट 19.2 एमएम

बठिंडा 19.8 एमएम

मोगा 12.0 एमएम

फिरोजपुर 12.0 एमएम

मुआवजा...2019 से 12 हजार रुपए प्रति एकड़ हुआ है तय

पंजाब में धान, गेहूं या अन्य फसल का मुआवजा 8 हजार रुपए प्रति एकड था। 2017 में सत्ता में आते ही कांग्रेस सरकार ने इस मुआवजा राशि में बढ़ौतरी की। अब मुआवजा 12 हजार रुपए प्रति एकड़ है।

आलू-गोभी, पालक सबको नुकसान

कृषि विज्ञान केंद्र कपूरथला के कृषि विशेषज्ञ डॉ. जुगराज सिंह बताते हैं कि बारिश, आंधी व ओलावृष्टि से गेहूं की ही फसल प्रभावित नहीं हुई बल्कि इस वक्त गोभी, आलू, पालक, मिर्च, सरसों सहित अन्य फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। दोआबा में मक्की की फसल भी अधिक है। मक्की अभी एक महीने की हुई है, ओलावृष्टि ने उसे भी नुकसान पहुंचाया है। आलू की पुटाई चल रही है। बारिश से खेतों में पानी भर आया है। इससे आलू खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।

2017-18 में राज्य ने 317 लाख टन अनाज उगाया।

2018-19 में राज्य में गेहूं की 182 लाख टन रिकार्ड पैदावार।

2017-18 में धान 199.65 लाख मीट्रिक टन पैदावार

2019-20 में नरमा प्रति हेक्टेयर 788 किलोग्राम का अनुमान।

वन्य क्षेत्र

धान का रकबा

31.0%

गेहूं का रकबा

46.43%

83% रकबे में 317 लाख टन अनाज पैदा कर रहा पंजाब

नेट से ली जानकारी

गुरकिरपाल सिंह ने बताया कि उन्होंने इंटरनेट पर हाइड्रोपोनिक खेती के बारे पढ़ा। पहले कमरे में ट्यूब लाइट रॉड में टमाटर के तीन पौधे उगाकर देखे। बतौर गुरकिरपाल-मैं यह देखकर हैरान रह गया जब टमाटर का पौधा सफलतापूर्वक बढ़ने लगा। इसके बाद 2012 में एक कनाल में पॉलीहाउस स्थापित कर हाइड्रोपोनिक तकनीक से टमाटर की खेती शुरू की, जो सफल रही।

हाइड्रोपोनिक तकनीक

पीएयू के डॉ. रणजीत सिंह ने बताया कि हाइड्रो का मतलब है पानी, जबकि पोनोक्स का अर्थ है कार्य। हाइड्रोपोनिक्स में पौधों और चारे वाली फसलों को 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर उगाया जाता है। सामान्यत: पेड़-पौधे अपने आवश्यक पोषक तत्व जमीन से लेते हैं, लेकिन हाइड्रोपोनिक तकनीक में पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने के लिये पौधों में एक विशेष प्रकार का घोल डाला जाता है। इस घोल में पौधों की बढ़वार के लिए आवश्यक खनिज एवं पोषक तत्व मिलाए जाते हैं।

बिना जमीन और मिट्‌टी के घर में करें हाइड्रोपोनिक खेती, मोगा के गांव केले के 37 वर्षीय गुरकिरपाल कमा रहे लाखों रुपए

ताजा फूलों के अरेंजमेंट के लिए देवकी देवी जैन मैमोरियल कॉलेज की आशिमा पुरी को प्रथम पुरस्कार मिला, गजरे के लिए शास्त्री नगर लुधियाना के सूर्या बढेरा को बी-4 कैटेगरी में पहला, फूलों की बालियों के लिए बी-5 कैटेगरी में भी सूर्या बढेरा। हेयर रिंग्स के लिए अनाइरा बढेरा को पहला इनाम मिला। मैरीगोल्ड (फ्रैंच) के लिए दोराहा के तपवीर सिंह को पहला इनाम मिला। मैरीगोल्ड (अफ्रीका) के लिए लुधियाना के सुभाष को पहला इनाम मिला। गजनिया के लिए वेरका मिल्क प्लांट के मनोज कुमा को प्रथम इनाम मिला।

इन्होंने जीते इनाम

फूलों की खेती}खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी ने लोगों को फूलों के व्यवसाय के लिए किया प्रेरित

सूबे में खेती और किसानों से जुड़े मुद्दों पर विशेष पेज पहली बार सिर्फ भास्कर में

खेत से खुशहाली तक आपके साथ

सोमवार, 9 मार्च, 2020

मंडी समीक्षा**

मौसम अनुमान**

 7.5% लाख टन रॉ-शुगर का निर्यात कर चुका है भारत। 15.5 लाख टन चीनी की शिपमेंट भी हो चुकी है

एग्रो फैक्ट**

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