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तलने में इस्तेमाल किए जाने वाले तेल को बेचने में हाेटल, रेस्टाेरेंट और ढाबा मालिक नहीं ले रहे दिलचस्पी
सेहत महकमे की सुस्ती का खामियाजा जिले के करीब 20 लाख लाेगाें काे भुगतना पड़ रहा है। कारण पाबंदी के बावजूद हाेटल, ढाबा, रेस्टाेरेंट व बेकरी मालिक तेल काे बार-बार इस्तेमाल कर रहे हैं। इन सबकाे अच्छे मालूम है कि 2-3 बार इस्तेमाल तेल से तैयार खाद्य पदार्थाें का सेवन करने से व्यक्ति के शरीर में लो डेंसिटी लीपोप्रोटीन यानी बैड कॉलेस्ट्रोल बढ़ता है। इसके बढ़ने से हृदय रोग, स्ट्रोक और छाती में दर्द की संभावना बढ़ जाती है। कहने सेहत महकमे ने एक पिछले हफ्ते एक मीटिंग करके समूह हाेटल, ढाबा, रेस्टाेरेंट व बैकरी मालिकाें काे बार-बार इस्तेमाल तेल 25 रुपए में बेचने तक का विकल्प तक दिया है, लेकिन शहर की गाेपाल स्वीट्स शाॅप काे छोड़कर बाकी किसी ने इस अटेर दिलचस्पी नहीं दिखाई।
सरकार ने तेल का बार-बार इस्तेमाल करने को रोकने और इस में ट्रांसफैट की मात्रा घटाने के लिए फूड पदार्थ बनाने के लिए दो या तीन बार प्रयोग के बाद बचे हुए तेल को 25 रुपए खरीद करने के लिए प्रमाण किया गया है और इस संबंधी कोई भी फूड उत्पादक होटल, ढाबे, बेकरी, हलवाई आदि) दुकानदार बचा हुआ तेल के इस्तेमाल पर राेक लगाने के अादेश हैं। इस्तेमाल हुअा तेल खरीदने के लिए सरकार ने एक कंपनी काे काम दिया है। यह कंपनी 25 रुपए लीटर के हिसाब से बार-बार इस्तेमाल हुअा तेल खरीदेगी अटेर कंपनी इस तेल से बॉयोडीजल बनाया जायेगा, जाे वाहनों को चलाने के लिए इस्तेमाल करा जाएगा। बिजनस डिवेलपमेंट मैनेजर अमित पाल कहना है कि हमारी तरफ से हरेक फूड उत्पादक के साथ तालमेल किया जा रहा है, लेकिन गोपाल स्वीट्स शाॅप ने 300 लीटर तेल देने काे कहा है। सिविल सर्जन डा. हरीश मल्होत्रा कहा कि तेल का बार-बार इस्तेमाल कैंसर का खतरा बढ़ाता है, तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें धीरे-धीरे फ्री रेडिकल्स का निर्माण होता है. इससे तेल में एंटी ऑक्सीडेंट की मात्रा समाप्त होने लगती है और कैंसर के कीटाणुओं की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कोलेस्ट्रोल, हृदय रोग और एसिडिटी का रहता है ज्यादा खतरा
तेल का एक से ज्यादा बार इस्तेमाल करने से उसका रंग काला पड़ता जाता है. ये तेल शरीर में लो डेंसिटी लीपोप्रोटीन यानी बैड कॉलेस्ट्रोल को बढ़ाता है. इसके बढ़ने से हृदय रोग, स्ट्रोक और छाती में दर्द की संभावना बढ़ जाती है। तेल का एक से ज्यादा बार इस्तेमाल करने से उसका रंग काला पड़ता जाता है. ये तेल शरीर में लो डेंसिटी लीपोप्रोटीन यानी बैड कॉलेस्ट्रोल को बढ़ाता है. इसके बढ़ने से हृदय रोग, स्ट्रोक और छाती में दर्द की संभावना बढ़ जाती है। एसिडिटी और गले में जलन- ज्यादातर स्ट्रीट फूड बनाने के लिए ऐसे ही तेल का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें बने खाने का सेवन करने से आपको गले में जलन और एसिडिटी की शिकायत हो सकती है। मोटापा और डायबिटीज- तेल का बार-बार इस्तेमाल करने से आप मोटापा, डायबिटीज और अन्य तरह के हृदय रोगों का शिकार हो सकते हैं। रीयूज ऑयल का सेवन बंद करने से और भी कई तरह की बीमारियों का खतरा टाला जा सकता है।
ये हैं बचाव के तरीके
री-हीटिड कुकिंग ऑयल के बार-बार इस्तेमाल से बचने के लिए कुछ चीजों पर ध्यान देना जरूरी है. पहला, खाना जरूरत के हिसाब से बनाएं. ऐसा करने से आपके पैन में न तो फालतू तेल बचेगा और न आप उसका दोबारा इस्तेमाल कर पाएंगे।