एक आदमी बुरे काम में सफल हो जाए, इससे बेहतर है कि वो भले काम में असफल हो : स्वामी सत्य वेदांत

Patiala News - मैं जब पढ़ता था तो वे कहते थे कि पढ़ोगे लिखोगे होंगे नवाब, तुमको नवाब बना देंगे, तुमको तहसीलदार बनाएंगे। तुम...

Bhaskar News Network

Sep 16, 2019, 07:15 AM IST
Patiala News - if a man succeeds in bad work it is better that he fail in good work swami satya vedanta
मैं जब पढ़ता था तो वे कहते थे कि पढ़ोगे लिखोगे होंगे नवाब, तुमको नवाब बना देंगे, तुमको तहसीलदार बनाएंगे। तुम राष्ट्रपति हो जाओगे। ये प्रलोभन हैं और ये प्रलोभन हम छोटे-छोटे बच्चों के मन में जगाते हैं। यह बात स्वामी सत्य वेदांत ने हरपाल टिवाणा ऑडिटोरियम में आयोजित सेमिनार में कही। उन्होंने कहा कि हमने कभी उनको सिखाया क्या कि तुम ऐसा जीवन बसर करना कि तुम शांत रहो, आनंदित रहो! नहीं। हमने सिखाया, तुम ऐसा जीवन बसर करना कि तुम ऊंची से ऊंची कुर्सी पर पहुंच जाओ। तुम्हारी तनख्वाह बड़ी से बड़ी हो जाए, तुम्हारे कपड़े अच्छे से अच्छे हो जाएं, तुम्हारा मकान ऊंचे से ऊंचा हो जाए, हमने यह सिखाया है। हमने हमेशा यह सिखाया है कि तुम लोभ को आगे से आगे खींचना, क्योंकि लोभ ही सफलता है। और जो असफल है उसके लिए कोई स्थान है?

इस पूरी शिक्षा में असफल के लिए कोई स्थान नहीं है, असफल के प्रति कोई जगह नहीं है और केवल सफलता की धुन और ज्वर हम पैदा करते हैं तो फिर स्वाभाविक है कि सारी दुनिया में जो सफल होना चाहता है वह जो बन सकता है, करता है। क्योंकि, सफलता आखिर में सब छिपा देती है। एक आदमी किस भांति चपरासी से राष्ट्रपति बनता है! एक दफा राष्ट्रपति बन जाए तो फिर कुछ पता नहीं चलता कि वह कैसे राष्ट्रपति बना, कौन सी तिकड़म से, कौन सी शरारत से, कौन सी बेईमानी से, कौन से झूठ से? किस भांति से राष्ट्रपति बना, कोई जरूरत अब पूछने की नहीं है! तो हम एक तरफ सफलता को केंद्र बनाए हैं और जब झूठ बढ़ता है, बेईमानी बढ़ती है तो हम परेशान होते हैं कि यह क्या मामला है। जब तक सफलता, सक्सेस एकमात्र केंद्र है, सारी कसौटी का एकमात्र मापदंड है, तब तक दुनिया में झूठ रहेगा, बेईमानी रहेगी, चोरी रहेगी।

यह नहीं हट सकती, क्योंकि अगर चोरी से सफलता मिलती है तो क्या किया जाए? अगर बेईमानी से सफलता मिलती है तो क्या किया जाए? बेईमानी से बचा जाए कि सफलता छोड़ी जाए, क्या किया जाए? जब सफलता एकमात्र माप है, एकमात्र मूल्य है, एकमात्र वैल्यू है कि वह आदमी महान है जो सफल हो गया तो फिर बाकी सब बातें अपने आप गौण हो जाती हैं। रोते हैं हम, चिल्लाते हैं कि बेईमानी बढ़ रही है, यह हो रहा है। यह सब बढ़ेगी, यह बढ़नी चाहिए। आप जो सिखा रहे हैं उसका फल है यह, और पांच हजार साल से जो सिखा रहे हैं उसका फल है। सफलता की वैल्यू जानी चाहिए, सफलता कोई वैल्यू नहीं है, सफलता कोई मूल्य नहीं है। सफल आदमी कोई बड़े सम्मान की बात नहीं है। सफल नहीं सुफल होना चाहिए आदमी-सफल नहीं सुफल! एक आदमी बुरे काम में सफल हो जाए, इससे बेहतर है कि एक आदमी भले काम में असफल हो जाए। सम्मान काम से होना चाहिए, सफलता से नहीं। ”

सेमिनार को संबोधित करते स्वामी सत्य वेदांत। भास्कर



इमोशनल वेल बींग विषय पर पर दिया लेक्चर

अध्यात्मिक गुरु ओशो के शिष्य और अोशो मल्टीवर्सिटी पुणे के पहले चांसलर रहे डॉ. वसंत जोशी जिन्हें ओशो ने सन्यास देकर स्वामी सत्य वेदांत नाम दिया, ने अपनी सहयोगी डॉ. निधि रस्तोगी के साथ ओशो विजन ऑन एजूकेशन विषय पर आयोजित सेमीनार में न सिर्फ बच्चों की इन समस्याओं पर चर्चा की, बल्कि दर्जनों स्कूलों के टीचर्स, पेरेंट्स के साथ इन सवालों के हल भी तलाशे। अायाेजक कपिल गुप्ता और नीरज रहेजा ने मंच पर दोनों मेहमानों का स्वागत करके कार्यक्रम शुरू किया। शुरूआत में मां प्रेम निधि ने इमोशनल वेल बींग विषय पर लेक्चर दिया। स्वामी सत्य वेदांत ने ओपन स्काई-न्यू एप्रोचिस फॉर ए न्यू बिगनिंग इन एजूकेशन पर लेक्चर दिया। उन्होंने पेरेंट्स, टीचर्स और स्टूडेंट्स को 3 लेवल पर जागरूक रहने की सलाह दी। पहला, शरीर के तल पर, दूसरा मन के और तीसरा भावनाओं के तल पर। स्वामी ने बताया कि अोशो ने दुनिया को शिक्षा पर बेहतरीन ज्ञान का खजाना दिया है। शिक्षा में ध्यान को शामिल कर लिया जाए तो बच्चों की प्रतिभा में निखार लाया जा सकता है।

X
Patiala News - if a man succeeds in bad work it is better that he fail in good work swami satya vedanta
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना