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गुरुद्वारा साहिब में अमृत संचार, दीवान सजाए और रागी जत्थाें ने किया कीर्तन

Bhaskar News Network

Apr 15, 2019, 08:20 AM IST

Patiala News - गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही, बहादुरगढ़ में खालसा पंथ के प्रगट दिवस पर मेला आयोजित किया गया। इसमें पांच गांवों...

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गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही, बहादुरगढ़ में खालसा पंथ के प्रगट दिवस पर मेला आयोजित किया गया। इसमें पांच गांवों की संगत के सहयोग से लंगर व गन्ने के रस की खीर का प्रबंध किया गया। कार सेवा व गुरुद्वारा साहिब की प्रबंधक कमेटी ने कढ़ी, दाल, राजमा व फुल्के का लंगर लगाया। गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही के हेड ग्रंथी भाई अवतार सिंह ने बताया कि खालसा पंथ के प्रकट दिवस पर गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही में जोड़ मेल की तरह मेला भरता है। बहादुरगढ़, नरड़ू, भठलां, गंडा खेड़ी व खेड़ी मंडला की संगत गुरुद्वारा साहिब में लंगर की सेवा करती है। गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही के हेड ग्रंथी भाई अवतार सिंह ने बताया िक खालसा पंथ के प्रकट दिवस पर गुरुद्वारा साहिब में अमृत संचार, दीवान सजाए जाते हैं। रागी जत्थे कीर्तन करते हैं। भाई अवतार सिंह ने बताया कि जिस जगह पर गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही बहादुरगढ़ स्थापित है वहां नवाब सैफ खान के किले का पंचवटी बाग था। श्री आनंदपुर साहिब से दशहरा देखकर आ रहे श्री गुरु तेग बहादुर जी ने 6 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 1656 तक नवाब सैफ खान के किले में स्थापित पंचवटी बाग में डेरा लगाया था। उदासी संप्रदा के दौरान बाबा दूधातारी जी ने पंचवटी बाग में श्री गुरु तेग बहादुर की सेवा की थी। बाबा दूधातारी जी ने 1774 में महाराजा कर्म सिंह को कहकर पंचवटी बाग में इमारत बनवाई थी। 1937 में महाराजा कर्म सिंह ने बहादुरगढ़ किले की नींव रखी थी। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत के बाद महाराजा कर्म सिंह ने गांव सैफाबाद की नाम बदल कर बहादुरगढ़ किया था।

भास्कर संवाददाता|पटियाला

गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही, बहादुरगढ़ में खालसा पंथ के प्रगट दिवस पर मेला आयोजित किया गया। इसमें पांच गांवों की संगत के सहयोग से लंगर व गन्ने के रस की खीर का प्रबंध किया गया। कार सेवा व गुरुद्वारा साहिब की प्रबंधक कमेटी ने कढ़ी, दाल, राजमा व फुल्के का लंगर लगाया। गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही के हेड ग्रंथी भाई अवतार सिंह ने बताया कि खालसा पंथ के प्रकट दिवस पर गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही में जोड़ मेल की तरह मेला भरता है। बहादुरगढ़, नरड़ू, भठलां, गंडा खेड़ी व खेड़ी मंडला की संगत गुरुद्वारा साहिब में लंगर की सेवा करती है। गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही के हेड ग्रंथी भाई अवतार सिंह ने बताया िक खालसा पंथ के प्रकट दिवस पर गुरुद्वारा साहिब में अमृत संचार, दीवान सजाए जाते हैं। रागी जत्थे कीर्तन करते हैं। भाई अवतार सिंह ने बताया कि जिस जगह पर गुरुद्वारा श्री नौवीं पातशाही बहादुरगढ़ स्थापित है वहां नवाब सैफ खान के किले का पंचवटी बाग था। श्री आनंदपुर साहिब से दशहरा देखकर आ रहे श्री गुरु तेग बहादुर जी ने 6 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 1656 तक नवाब सैफ खान के किले में स्थापित पंचवटी बाग में डेरा लगाया था। उदासी संप्रदा के दौरान बाबा दूधातारी जी ने पंचवटी बाग में श्री गुरु तेग बहादुर की सेवा की थी। बाबा दूधातारी जी ने 1774 में महाराजा कर्म सिंह को कहकर पंचवटी बाग में इमारत बनवाई थी। 1937 में महाराजा कर्म सिंह ने बहादुरगढ़ किले की नींव रखी थी। श्री गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत के बाद महाराजा कर्म सिंह ने गांव सैफाबाद की नाम बदल कर बहादुरगढ़ किया था।

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