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1135 एकड़ में बनीं 252 अवैध कॉलोनियां, 10 हजार घर रेगुलराइजेशन में उलझे, 35 फीट सड़क का आदेश, यहां 20 फीट से ज्यादा कोई नहीं

पंजाब सरकार की नई रेगुलराइजेशन पॉलिसी का पटियाला जिले में बनी 252 कॉलोनियों पर असर हो रहा है। 1135 एकड़ जमीन पर बनी इनर...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 02:55 AM IST

  • 1135 एकड़ में बनीं 252 अवैध कॉलोनियां, 10 हजार घर रेगुलराइजेशन में उलझे, 35 फीट सड़क का आदेश, यहां 20 फीट से ज्यादा कोई नहीं
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    पंजाब सरकार की नई रेगुलराइजेशन पॉलिसी का पटियाला जिले में बनी 252 कॉलोनियों पर असर हो रहा है। 1135 एकड़ जमीन पर बनी इनर अवैध कॉलोनियों के 10 हजार घर रेगुलराइजेशन में उलझे हैं। अब लोगों को न तो कॉलोनाइजर ढंूढे मिल रहे हैं, न सरकार उन्हें राहत दे रही है।

    असल में पॉलिसी के मुताबिक उन्हीं कॉलोनियों में प्लॉट-बिल्डिंग रेगुलर होंगी, जहां की कॉलोनी पहले रेगुलर हुई है। अगर कॉलोनी रेगुलर नहीं होती तो फिर प्लॉट-बिल्डिंग को भी रेगुलराइजेशन सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा। इसके बाद न तो वो कभी प्लॉट, बिल्डिंग को बेच आगे रजिस्ट्री करा पाएंगे और न नए प्लॉट पर बिल्डिंग बनाने के बाद उन्हें बिजली, सीवरेज-पानी और टेलीफोन कनेक्शन मिलेगा। इस बीच भास्कर ने 11 कॉलोनियों के हालात देखे तो उसमें पब्लिक से लेकर कॉलोनाइजर्स दोनों फंसे नजर आए। पब्लिक का कहना है कि कॉलोनियां 90 फीसदी डेवलप हो चुकी हैं। पॉलिसी में साफ है कि कॉलोनी में सड़क 30 से 35 फुट चौड़ी होगी तो ही रेगुलर हो पाएंगी। यहां 20 फुट से ज्यादा सड़क नहीं है। कॉलोनाइजर्स इसलिए परेशान हैं क्योंकि जब कॉलोनी काटी गई थी तो पार्टनरशिप में 5 से 10 कॉलोनाइजर्स थे, अब जब कॉलोनी के 90 फीसदी प्लाट बिक गए हैं तो 1-2 को छोड़कर बाकी का कोई अता-पता नहीं है, अब एेसे कॉलोनी को रेगुलर करवाने को लेकर कौन अागे अाए, इसको लेकर संशय बना है।

    कॉलोनियाें सेभास्कर लाइव

    मोती बाग पैलेस के पीछे बनी ऑफीसर्स एन्क्लेव कॉलोनी जिसकी सबसे चौड़ी सड़क 18 फीट है।

    10 कॉलोनी वालों का रेगुलराइजेशन फीस भरने से इनकार

    मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की रिहाइश न्यू मोती बाग पैलेस के पीछे बने आफिसर्स एन्क्लेव फेज 1, 2 के अलावा बजट होम, फतेह एन्क्लेव, जीवन कंप्लैक्स, खोखर कंप्लैक्स, महिंदरा कंप्लैक्स, साई विहार, न्यू साई विहार, आफिसर्स कॉलोनी का कुछ हिस्सा व एयर एवेन्यू के लोगों ने रेगुलराइजेशन फीस न भरने का फैसला लिया है। इस इलाके के कई दशकों तक सरपंच रहे बीएस तेजा कहते हैं कि पॉलिसी को इन कॉलोनियों में लागू करना मुमकिन ही नहीं है। जब कॉलोनी काटी गई थी तो 20 फुट सड़क पर सरकार ने क्यों रजिस्ट्रियां कर दीं? तब इन्हें नहीं पता था कि सड़क 35 फुट रखनी है।

    इधर;कॉलोनाइजर्स बोले- पार्टनर्स पैसे लेकर विदेश गए, अब भरे कौन

    कॉलोनाइजर्स भी परेशान है। शहर में 250 अवैध कॉलोनियां है। एक कॉलोनी को एक साथ 8 से 10 पार्टनरों ने काट कर प्लाट बेचे। चूंकि रजिस्ट्रेशन एक या दो कॉलोनाइजर्स के नाम पर है, बाकी बैकसाइड पर थे, इसलिए वो तो अपना फायदा लेकर निकल गए, लेकिन अब फ्रंट पर रहने वाले कॉलोनाइजर्स फंस गए। उन्हें अब ढूंढ़े से भी अपने पुराने पार्टनर नहीं मिल रहे है। बता दें कि कॉलोनाइजर ने ही फीस भर कर अपनी कॉलोनी रेगुलर करवानी है। उसके बाद ही प्लाट रेगुलर होंगे।

    सीएम के आवास के पीछे पॉश कॉलोनी, सड़क यहां भी 18 फीट की

    चौड़ाई 18 फीट

    पीयू के सामने न्यू प्रोफेसर कॉलोनी-

    कॉलोनाइजर्स का पता नहीं, इनवेस्ट करने वाले फंसे

    खेती बेच घर बनाया सड़क बढ़ी तो टूटेगा

    मैंने गांव की खेतीबाड़ी वाली जमीन बेच कर यहां 2002 में प्लॉट लेकर मकान बनाया था, अास थी कि कॉलोनी रेगुलर होगी, अब अगर घर के सामने वाली सड़क चौड़ी होगी तो मेरा सारा मकान टूटेगा।

    रिटायरमेंट के बाद बनाया मकान, अब फंसे

    मैं जीअारपी से 2010 में रिटायर हुअा हूं। मैंने 2001 में बैंक से लोन लेकर यहां प्लॉट लिया था। चूंकि अब इस कॉलोनी का कॉलोनाइजर्स का कोई अता पता नहीं है तो कॉलोनी रेगुलर न होने की सूरत में सारा पैसा फंसता नजर आ रहा है। सरकार बिना आम आदमी के बारे में सोचे रोज नए नियम बनाती है।

    (कॉलोनाइजर और रजिस्ट्री कार्यालय से मिले आंकड़ों के अनुसार)

    17 साल पहले घर बनाया, अब कैसे पैसे

    मैं कारपेंटर हूं। दिहाड़ी करके पैसे इकट्ठे कर न्यू प्रोफेसर कॉलोनी में 2001 में मकान लिया था, सारी उम्र की जमापूंजी लगाकर अब फंस गया हूं क्योंकि कॉलोनी रेगुलर होती नहीं दिख रही है।

    पॉलिसी के विरोध में उतरे कॉलोनाइजर्स

    प्लॉट होल्डर्स, डीलर्स अौर कॉलोनाइजर्स एसोसिएशन की एक मीटिंग राज कुमार राणा के नेतृत्व में हुई जिसमें सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके इस पॉलिसी को सिरे से नकार दिया गया। इस मौके पर कॉलोनाइजर्स गुरइकबाल सिंह, राज कुमार राणा, राजन पुरी, जगदेव जेपी, टिवंक्ल, प्रेम गर्ग, पाल, राकेश गुप्ता, गोल्डी, हरी सिंह, गुरमीत सिंह, लक्की बाबा, प्रीत शर्मा, निशान सिंह, जसविंदर सिंह, प्रीतइंदर सिंह आदि शामिल थे। इनका कहना है कि सरकार ने कुछ संशोधन के साथ पुरानी पॉलिसी ही लागू कर दी है इससे लोगों को कोई राहत नहीं मिली है।

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