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85 डेसीबल से तेज अावाज धड़कनें बढ़ाती है गेस्टहाउस में डीजे धीमी आवाज में चलाया जाएं

मैरिज पैलेसों में अाेपन डीजे सिस्टम चलने से ध्वनि प्रदूषण पर हाे रही बढ़ोतरी काे गंभीरता से लेते हुए पंजाब प्रदूषण...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 01, 2018, 02:55 AM IST

मैरिज पैलेसों में अाेपन डीजे सिस्टम चलने से ध्वनि प्रदूषण पर हाे रही बढ़ोतरी काे गंभीरता से लेते हुए पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने एक एडवाइजरी जारी की है। जिसमें बोर्ड ने प्रदेश के समूह मैरिज पैलेसों काे हिदायत की है कि वे मैरिज पैलेस हाल के अंदर ही डीजे निर्धारित अावाज पर चलाएं।

बोर्ड ने पंजाब स्टेट मैरिज पैलेसेज एसोसिएशन और डीजे बजाने वालों के साथ मीटिंग भी की। एयर पॉल्यूशन कंट्रोल एक्ट 1981 के अंतर्गत ध्वनि प्रदूषण भी हवा प्रदूषण का ही हिस्सा है और इस का सीधा और बुरा प्रभाव मानवीय सेहत और ओर जीव-जंतुओं पर पढ़ता है। यह निर्धारित हद से ज़्यादा नहीं होना चाहिए।

ध्वनि प्रदूषण से हो सकती है मानसिक परेशानी

राजिंदरा अस्पताल ईएनटी डिपार्टमेंट के हेड डाॅ. संजीव भगत ने बताया कि तेज शोर-गुल और आवाज ध्वनि को प्रदूषित करते हैं इससे सुनने से या लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से आपको कई शारीरिक और मानसिक परेशानियां हो सकती है। ध्वनि प्रदूषण किसी और प्रदूषण की तरह की मानव जीवन पर बुरा प्रभाव डालता है। इसके साथ ही यह कार्यक्षेत्र, ऑफिस, घर आदि में हमारे काम, नींद और अन्य क्रिया-कलाप को भंग करता है।

क्या होता है ध्वनि प्रदूषण

मनुष्य के कान 20 हर्ट्ज से लेकर 20000 हर्ट्ज वाली ध्वनि के प्रति संवेदनशील होते हैं। ध्वनि का मानक डेसीबल होता है सामान्यतया 85 डेसीबल से तेज ध्वनि को कार्य करने में बाध्यकारी माना जाता है जो कि ध्वनि प्रदूषण की श्रेणी में आता है। वातावरण सुरक्षा एक्ट के अंतर्गत एयर पॉल्यूशन कंट्रोल रूल्स में आबोहवा में ध्वनि प्रदूषण की हद निर्धारित की गई है।

नींद प्रभावित करता है

50 डेसीबल से अधिक तीव्र ध्वनि नींद को प्रभावित करते हैं। जिससे नींद पूरी नहीं होती और आपकी कार्यक्षमता इससे प्रभावित होती है। 85 डेसीबल से तेज ध्वनि दिल की धड़कनों, रक्त के प्रवाह को बढ़ा देता है। इससे ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है यहीं कारण है तेज ध्वनि के संपर्क में लगातार रहने से हार्ट-अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

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