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एनआईएस में प्रेक्टिस करने वाले और अर्जुन अवार्डी सतीश कुमार ने ओलंपिक के लिए किया क्वालीफाई

एक वर्ष पहले
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एनआईएस में प्रैक्टिस करने वाले और अर्जुन अवार्डी सतीश कुमार ने अमान में चल रहे एशियन क्वालीफायर मुकाबले में क्वार्टर्स फाइनल में मंगोलिया के बॉक्सर को हराकर जापान में होने वाले ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है। सुपर हैवीवेट 91 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में क्वालीफाई करने वाले पहले बॉक्सर है। उन्होंने भास्कर को बताया कि उनका एक ही सपना था कि ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर गोल्ड जीते। जिसके लिए उन्होंने क्वालीफाई कर एक कदम आगे बढ़ा लिया है। अब वह ओलंपिक की तैयारी में जुट जाएगे और अच्छा प्रदर्शन करेंगे। बता दें कि अच्छे प्रदर्शन पर उन्हें 2018 में अर्जुन अवार्ड भी मिला। अब वह पटियाला के एनआईएस सेंटर में चीफ बॉक्सिंग कोच सीए कुटप्पा की देख रेख में ट्रेनिंग ले रहे है।

10 साल पहले ज्वाइन की थी आर्मी


सतीश कुमार यूपी के बुलंदशहर के पचौता गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता किरनपाल सिंह एक किसान हैं। जबकि बड़े भाई आर्मी में हैं और 2 छोटे भाई ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2008 में आर्मी में नौकरी लगने के बाद 2011 में उनकी शादी हो गई थी। अब एक बेटा और एक बेटी है। जब उनसे पूछा कि आप अपने बच्चों को बॉक्सर बनाएंगे तो उन्होंने कहा कि दोनों बच्चों को जो इच्छा होगी वही बनाएंगे।

था तब कोच भीमानंद और रविशंकर सांगवान कोच ने कहा कि तुम भी बॉक्सिंग कर सकते हो। उनकी सलाह के बाद मैंने बॉक्सिंग प्रेक्टिस शुरू की। सतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने अपना पहला मेडल 2010 में उत्तर भारत एरिया चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर शुरू की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सतीश ने पहला नेशनल चैंपियनशिप सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने एशियन गेम्स 2014 में ब्रांज मेडल जीता और 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता। एशियन चैंपियनशिप में 2015 में ब्रांज जीता।

एनआईएस में प्रैक्टिस करने वाले और अर्जुन अवार्डी सतीश कुमार ने अमान में चल रहे एशियन क्वालीफायर मुकाबले में क्वार्टर्स फाइनल में मंगोलिया के बॉक्सर को हराकर जापान में होने वाले ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया है। सुपर हैवीवेट 91 किलोग्राम से अधिक भार वर्ग में क्वालीफाई करने वाले पहले बॉक्सर है। उन्होंने भास्कर को बताया कि उनका एक ही सपना था कि ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कर गोल्ड जीते। जिसके लिए उन्होंने क्वालीफाई कर एक कदम आगे बढ़ा लिया है। अब वह ओलंपिक की तैयारी में जुट जाएगे और अच्छा प्रदर्शन करेंगे। बता दें कि अच्छे प्रदर्शन पर उन्हें 2018 में अर्जुन अवार्ड भी मिला। अब वह पटियाला के एनआईएस सेंटर में चीफ बॉक्सिंग कोच सीए कुटप्पा की देख रेख में ट्रेनिंग ले रहे है।

बुलंदशहर के पचौता गांव के रहने वाले इंटरनेशनल बॉक्सर सतीश कुमार ऐसे बॉक्सर हैं, जिन्होंने 2008 में आर्मी में नौकरी लगने के बाद 2010 में आर्मी कोच भीमानंद और रविशंकर सांगवान की देख बॉक्सिंग शुरू की थी। जब उनसे पूछा गया कि बॉक्सिंग ही क्यों कि तो उन्होंने बताया कि मैंने कई जवानों को बॉक्सिंग करते हुए देखता था तब कोच भीमानंद और रविशंकर सांगवान कोच ने कहा कि तुम भी बॉक्सिंग कर सकते हो। उनकी सलाह के बाद मैंने बॉक्सिंग प्रेक्टिस शुरू की। सतीश कुमार ने बताया कि उन्होंने अपना पहला मेडल 2010 में उत्तर भारत एरिया चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर शुरू की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। सतीश ने पहला नेशनल चैंपियनशिप सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद उन्होंने एशियन गेम्स 2014 में ब्रांज मेडल जीता और 2018 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता। एशियन चैंपियनशिप में 2015 में ब्रांज जीता।

कदम आगे बढ़ा लिया है। अब वह ओलंपिक की तैयारी में जुट जाएगे और अच्छा प्रदर्शन करेंगे। बता दें कि अच्छे प्रदर्शन पर उन्हें 2018 में अर्जुन अवार्ड भी मिला। अब वह पटियाला के एनआईएस सेंटर में
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