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शहीद सतवंत सिंह की फोटो यहां लगाई गई, अमेरिका में किया था हमलावरों से मुकाबला

क्रीक सिख टेंपल में हमलावर का मुकाबला कर कई लोगों को बचाया था।

Danik Bhaskar | Nov 17, 2017, 04:40 AM IST

अमृतसर. शहादत हमेशा याद की जाती है और यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत होती है। ऐसी ही याद को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अपने केंद्रीय सिख अजायब घर में वीरवार को चार प्रमुख शख्सियतों की तस्वीरें लगाकर जीवंत किया है। इनमें एक हैं अमेरिका में गुरुद्वारा साहिब में संगत को बचाते शहीद हुए भाई सतवंत सिंह कालेका। उनकी पत्नी सतपाल कौर, जो कि घटनास्थल पर मौजूद थीं, उस खौफनाक मंजर को आज तक नहीं भूल पाई हैं। 5 अगस्त, 2012 को अमेरिका के क्रीक सिख टैंपल में 40 के करीब लोग सेवा कर रहे थे।

सुबह करीब 10.30 बजे अधेड़ उम्र का माइकल पेज नामक व्यक्ति आटोमैटिक गन के साथ गुरुद्वारा साहिब में घुस आया और अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। मौके पर ही पांच लोगों की मौत हो गई। सतपाल कौर बताती हैं कि गोलियों की आवाज सुन गुरुद्वारे के प्रधान सतवंत सिंह बाहर आए और स्थिति देख भौंचक हो गए। बचाव या फिर विरोध का कोई रास्ता नहीं दिखा तो सब्जी काटने वाले चाकू से पेज पर हमला बोल दिया। सतवंत सिंह के भाई अमरजीत सिंह बताते हैं कि उन्होंने हमलावर पर तीन वार किए और उसने एकाएक गन उनकी तरफ घुमा दी। उनका शरीर गोलियों से छलनी हो गया और मौके पर ही वह शहीद हो गए। उनके द्वारा रुकावट पैदा किए जाने के कारण हमलावर संगत की तरफ नहीं आ सका। इसी बीच सतपाल कौर ने बच्चों व अन्य लोगों को गुरुद्वारा साहिब के पीछे बने कमरे में ले जाकर छुपा दिया। बौखलाया हमलावर बाहर की तरफ भागा जहां पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया।

शहादत पर परिवार को गर्व

भाई अमरजीत सिंह ने बताया कि अमेरिका में तीन दिन तक शोक में राष्ट्रीय ध्वज झुकाकर रखा गया। वहां के इतिहास में पहली बार किसी भारतीय के सम्मान में ऐसा हुआ। उनके भोग में अमेरिका और कैनेडा के 5000 लोगों ने हिस्सा लेकर उनको श्रद्धांजलि अर्पित की थी। सतपाल कौर कहती हैं कि उनके पति की शहादत से भले ही उनका परिवार प्रभावित हुआ लेकिन उनकी शहादत से सभी को गर्व है।