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राष्ट्रपति कोविंद पहुंचे अमृतसर, कहा- दर्शन करना सौभाग्य, शहीदों की धरती पर आंखें हुई नम

राष्ट्रपति ने श्री दरबार साहिब, दुर्ग्याणा तीर्थ और जलियांवाला बाग की विजिटर बुक्स में लिखा।

Danik Bhaskar | Nov 17, 2017, 04:46 AM IST

अमृतसर. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दाे घंटे तक शहर में रहे। वे दरबार साहिब में नतमस्तक होने और जलियांवाला बाग में शहीदों को नमन करने के बाद दुर्ग्याणा तीर्थ पहुंचे और माथा टेका। इसके बाद श्री दुर्ग्याणा कमेटी के प्रधान रमेश चंद्र शर्मा के नेतृत्व में उनसे अपील की गई कि दुर्ग्याणा मंदिर के साथ लगती 6 एकड़ भूमि रक्षा मंत्रालय से लेकर कमेटी को दी जाएगी। शर्मा ने बताया कि कुल 9.03 एकड़ भूमि रक्षा मंत्रालय के संरक्षण में है, जिसमें से 3 एकड़ पंजाब सरकार को आवंटित की गई है। 6 एकड़ जगह पर कुछ लोगों ने नाजायज कब्जे किए हुए हैं, जिनमें से लकड़ी के व्यवसायियों की पट्टेदारी भी खत्म हो चुकी है। यह जगह मंदिर में आने वाले 50 हजार श्रद्धालुओं और दशहरा त्यौहार मनाने के लिए प्रयोग होगी।

यह जगह कमेटी को दिलवाई जाए, जिसके बदले बनती कीमत देने को तैयार हैं। शर्मा ने कहा कि जिला प्रशासन भी इस जगह को कमेटी देने के लिए सिफारिश कर चुका है। श्री बड़ा हनुमान मंदिर के साथ लगती डिफेंस की जमीन मंदिर को दिलवाई जाए। अगर डिफेंस चाहे तो कमेटी जगह के बराबर की अन्य जमीन खरीद कर डिफेंस को दे देगी। इस भूमि के साथ ही रामकालीन विश्व प्रसिद्ध श्री बड़ा हनुमान मंदिर का प्रवेश द्वार भी है। आजादी के बाद से इसी जगह पर दशहरा पर्व मनाया जाता है।

जलियांवाला बाग में पहुंच आंखें नम होने का दिया हवाला

राष्ट्रपति के रूट पर कहीं भी लंबे समय तक ट्रैफिक नहीं रोकी गई। वह 50 मिनट तक गोल्डन टैंपल, 15 मिनट श्री दुर्ग्याणा मंदिर और 15 मिनट जलियांवाला बाग में रहे। उनका काफिला दोपहर 2.20 बजे श्री दरबार साहिब पहुंचा और उन्होंने 14 मिनट तक लंगर हाल में रहकर लंगर छका। इसके बाद उन्होंने परिक्रमा पूरी की, लेकिन इस दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ा। राष्ट्रपति ने विजिटर बुक्स में पावन स्थल दरबार साहिब में माथा टेकने का सौभाग्य मिलने, श्री दुर्ग्याणा मंदिर में भक्ति कला का संगम देख प्रसन्न होने और जलियांवाला बाग में पहुंच आंखें नम होने का हवाला दिया। राष्ट्रपति श्री दुर्ग्याणा मंदिर में माथा टेकने के लिए पहुंचे तो सुरक्षा कारणों से मंदिर के बाहर खड़े कुछ श्रद्धालुओं को कुछ समय लिए रोक दिया गया। बाद दोपहर 3.12 मिनट पर राष्ट्रपति, उनकी पत्नी सविता कोविंद, गवर्नर वीपी सिंह बदनौर और उनकी पत्नी अल्का सिंह, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल और कैबिनेट मंत्री राणा गुरजीत सिंह जलियांवाला बाग में दाखिल हुए। जहां जलियांवाला बाग मैमोरियल ट्रस्ट के सेक्रेटरी एसके मुखर्जी ने उनका स्वागत किया। उन्होंने शहीदी स्मारक पर जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और वहां दो मिनट का मौन भी धारण किया। गौरतलब है कि राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुबह से ही टूरिस्टों को अमर ज्योति के पास नहीं जाने दिया गया।


इस मौके पर राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद, बेटा प्रशांत कुमार, बेटी स्वाति, बहू गौरी कुमार, पोता अभिवर्या कुमार, पोती अन्नया कुमार, राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर, राज्यपाल की पत्नी अलका सिंह, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल, डीसी कमलदीप सिंह संघा, आईजी सुरिंदर पाल सिंह परमार, आईजी अरुण कुमार आिद मौजूद थे।

प्रेसीडेंट कब कहां पहुंचे
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आने से दो घंटे पहले ही टाउन हाल भरावां दा ढाबे से लेकर श्री दरबार साहिब तक जाने वाली एक तरफ की लेन को खाली करवा लिया गया था। श्रद्धालुओं के लिए दूसरी तरफ की लेन खुली रखी गई। दोपहर 2.10 बजे राष्ट्रपति का काफिला मलकां बुत्त से गुजरा जहां 7 मिनट के लिए ही ट्रैफिक रोकी गई। राष्ट्रपति के काफिले में 27 इनोवा गड़ियां और दो एम्बुलेंस शामिल थी। इस दौरान दोपहिया वाहन और आॅटो रिक्शा केसरी बाग से होते हुए घी मंडी की तरफ निकलते रहे। राष्ट्रपति का काफिला एयरपोर्ट से निकल कर कचहरी पुल, कोर्ट रोड, भंडारी पुल, हाल गेट के अंदर से दरबार साहिब पहुंचा था। इन रास्तों पर सिर्फ 10-10 मिनट के लिए ही ट्रैफिक रोकी गई।

जलियांवाला बाग - मै अन्त:करण की गहराई से शहीदों के सम्मान में नतमस्तक

आज अपने अमृतसर दौरे पर मुझे जलियांवाला बाग में देश के लिए कुर्बानी देने वाले शहीदों को नमन करने का अवसर प्राप्त हुआ। इस ऐतिहासिक स्थल पर आकर और अपने प्राणों की सर्वोच्च आहुति देने वाले शहीदों को याद कर मेरी आंखें नम हो आईं। मैं अपने अन्त: करण की गहराई से उन सभी शहीद सपूतों के सम्मान में नतमस्तक हूं।- राम नाथ कोविंद, राष्ट्रपति

दुर्ग्याणा मंदिर - भक्ति-कला का समन्वय देखकर प्रसन्नता मिली

भक्ति और कला का समन्वय देखकर प्रसन्नता हुई। श्री हरिमंदिर साहिब और श्री दुर्ग्याणा मंदिर की वास्तुकला में समानताओं को देखकर सिख और हिंदू समुदायों के बीच विद्यमान अभिन्न संबंध की दृढ़ता के प्रति विश्वास और गहरा हो जाता है। ईश्वर से अनेक रूपों का दर्शन करके और मां दुर्गा को शीश नवा करके, देवी अनुकंपा का सुखद अनुभव प्राप्त हुआ।- राम नाथ कोविंद, राष्ट्रपति

मांग पत्र देने की कोशिश में मान ग्रुप के 2 लोग गिरफ्तार

गुरु नगरी पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को मांग पत्र देने की कोशिश में शिरोमणि अकाली दल अमृतसर (सिमरनजीत सिंह मान ग्रुप) के दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। महामहिम के जाने के बाद उनको रिहा कर दिया गया। पार्टी के महासचिव भाई जनरैल सिंह सखीरा तथा ऑफिस सचिव भाई हरबीर सिंह संधू महामहिम को रास्ते में यह मांग पत्र देना चाहते थे। इन लोगों ने मांग की है कि 1984 में दरबार साहिब पर हुए फौजी हमले के दौरान सेना द्वारा उठाए गए दुर्लभ दस्तावेज वापस करने दंगों के दौरा मारे गए हजारों सिखों के बारे ह्वाइट पेपर जारी किया जाए।