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11 साल से कैंसर के खिलाफ मुहिम चला रहे धालीवाल, कहा- शर्म आती है इस बात से

इंग्लैंड के कुलवंत धालीवाल की संस्था पंजाब में फ्री जांच कैंप लगा कैंसर के मरीज डिटेक्ट कर इलाज के लिए प्रेरित कर रही है

Danik Bhaskar | Nov 17, 2017, 06:00 AM IST
कुलवंत धालीवाल की संस्था के पास जांच के लिए 7 मोबाइल वैन हैं। कुलवंत धालीवाल की संस्था के पास जांच के लिए 7 मोबाइल वैन हैं।

मोगा. ‘बहुत शर्म आती है जब कोई बठिंडा से बीकानेर चलने वाली पैसेंजर गाड़ी को कैंसर ट्रेन के नाम से बुलाता है। अब ये लाहनत खत्म करनी होगी। कैंसर ट्रेन को फिर पैसेंजर ट्रेन में बदलना होगा। पंजाब से कैंसर का दाग धोना होगा’। इस मकसद के साथ 11 साल से पंजाब में कैंसर के खिलाफ मुहिम चला रहे हैं इंग्लैंड के कुलवंत धालीवाल।


मोगा के गांव राउकेकलां के धालीवाल की मां की मौत भी 11 साल पहले कैंसर से हुई थी। तभी से इन्होंने कैंसर के खिलाफ जंग छेड़ी हुई है। पिछले चार साल से इंग्लैंड की संस्था ‘वर्ल्ड कैंसर केयर आर्गेनाइजेशन से मिलकर काम कर रहे हैं। संस्था एक बार फिर पूरे पंजाब में 3 सालों में 1500 कैंसर जांच कैंप लगाएगी। सबसे ज्यादा मालवा में लगेंगे। टीम गांव-गांव जा लोगों की फ्री मेडिकल जांच करेगी। कैंसर के पहली स्टेज के मरीजों को डिटेक्ट कर इलाज के लिए प्रेरित करेगी। दवाएं भी फ्री देगी। टीम इससे पहले भी पंजाब के 12428 गांवों में से 8000 में कैंप लगा चुके हैं। वीरवार को धालीवाल अपनी टीम और 4 मोबाइल लैब के साथ मोगा पहुंचे और लोगों की जांच की। दो मोबाइल वैन मानसा और मुक्तसर में रहती हैं क्योंकि वहां ज्यादा मरीज हैं।

पंजाब में कैंसर का पता तीसरी स्टेज में लगता है

बेसिकली किसान कुलवंत धालीवाल 11 साल पहले इग्लैंड की किसी फर्म में एमडी थे। मां की मौत के बाद कैंसर के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले धालीवाल बताते हैं, उनकी संस्था का टारगेट डेढ़ दो साल में पंजाब को कैंसर से मुक्त करना है। इंग्लैंड की बात करते हुए उन्होंने कहा, वहां की 7 करोड़ जनता में से हर रोज 786 कैंसर के मरीज सामने आते हैं लेकिन इंग्लैंड में कैंसर से मरने वाले मरीजों की संख्या बहुत कम है। इसका कारण है कि वहां कैंसर को प्रथम स्टेज में डिटेक्ट कर लिया जाता है, जबकि पंजाब में कैंसर का पता तीसरी स्टेज पर लगता है, उस समय मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है। संस्था मुंह, छाती,, बच्चेदानी व गदूदों के कैंसर की जांच करती है। संस्था ने ब्राजील, सुडान, इथोपिया, बंगलादेश, श्रीलकंा, कैनेडा, इंग्लैंड, अमेरिका समेत 53 देशों में मुहिम चला रखी है। डोनर्स की मदद से फंड जुटाया जाता है।