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साधु की मूर्ति पर प्रसाद स्वरूप चढ़ाई जा रही थी शराब, गुरु ग्रंथ साहिब के ले गई सत्कार कमेटी

मूर्ति हटाने के लिए सत्कार कमेटी ने दिया था 15 नवंबर तक का समय, ग्रामीणों में सहमति न बनने पर गुरुद्वारा साहिब को लगाया

Danik Bhaskar | Nov 17, 2017, 05:22 AM IST

होशियारपुर. गांव प्यालां के एक गुरुद्वारा साहिब में कुछ महीनों से मूर्ति स्थापित कर उस पर शराब चढ़ाने के विवाद में वीरवार को सत्कार कमेटी ने वहां से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 20 स्वरूप उठाकर ऐतिहासिक गुरुद्वारा गरना साहिब दसूहा भेज दिए और गुरुद्वारा साहिब को ताला लगा दिया। यह सारा कुछ जिला प्रशासन के अफसरों और पुलिस की मौजूदगी में किया गया। सत्कार कमेटी ने गुरुद्वारा साहिब से मूर्ति व पीर की कब्र हटाने के लिए गांववासियों को 15 नवंबर तक का समय दिया था। बुधवार शाम तक फैसला न होने पर कमेटी ने यह कार्रवाई की है।


होशियारपुर-जालंधर रोड पर नसराला के पास गांव प्यालां के एक गुरुद्वारा साहिब में यह विवाद कई महीनों से था। लोगों ने बताया कि गांव में बाबा लाठीवाला नामक एक साधु था, जिसकी काफी समय पहले मौत हो गई थी। लोगों का कहना है कि साधु शराब पीता था। कुछ महीने पहले एनआरआइज ने साधु की याद में गुरुद्वारा साहिब के परिसर में थड़ा बनाकर उस पर बाबा लाठीवाले की मूर्ति स्थापित कर दी। वहां हवन करवाया। बाद में वहां प्रसाद स्वरूप शराब चढ़ने लगी। इसकी भनक लगी तो डेढ़ महीने पहले सत्कार कमेटी के सदस्य गांव में आए और गांव वालों को गुरुद्वारा परिसर में यह सारी चीजें बंद करने और मूर्ति उठाने के लिए 15 नवंबर तक का समय दे गए। तय समय पर बुधवार दोपहर को सत्कार कमेटी के अध्यक्ष भाई सुखजीत सिंह खोसा सुल्तानपुर लोइयां, भाई हरजिंदर सिंह मोगा, भाई बलवीर सिंह मुच्छल, भाई तरलोचन सिंह सोहल, भाई लखवीर सिंह मुहल्लम, भाई दविंदर सिंह मुकेरियां, भाई बलविंदर सिंह बुड्ढीपिंड, भाई गुरनाम सिंह, भाई कल्याण सिंह धर्म प्रचार कमेटी गरना साहिब, भाई अमरजीत सिंह जड़ी गांव पहुंचे। उन्होंने गांव वालों के साथ एक मीटिंग की और मूर्ति को गुरुद्वारा साहिब से उठाने, शराब का चढ़ावा बंद करने और कब्र को तोड़ने पर चर्चा की।

मामला सुलझाने के लिए बनाई 11 मेंबरी कमेटी में मतभेद, एसपी-एसडीएम पहुंचे मौके पर

इसी दौरान प्रशासनिक अधिकारी एसपी बलवीर सिंह भट्टी, एसडीएम जतिंदर सिंह जोरवाल, तहसीलदार अरविंदर वर्मा, एसएचओ हरियाना यादविंदर सिंह और इंस्पेक्टर जसकमल कौर भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने दोनों पक्षों को मीटिंग के लिए सहमत किया और पास के गांव खानपुर थियाड़ा के गुरुद्वारा साहिब में मीटिंग करने का फैसला लिया गया। मीटिंग के लिए गांव की 11 मेंबरी कमेटी का गठन किया गया, लेकिन 10 लोग ही मीटिंग में आए। सत्कार कमेटी ने कमेटी से फैसला पूछा तो पांच मेंबरों धर्मेंद्र सिंह राजा, मंजीत सिंह बाबा, सुखविंदर सिंह नूरा, कुलविंदर सिंह किंदा और सुखदेव सिंह ने कहा कि मूर्ति उठाकर कब्र को उखाड़ दिया जाए और शराब पर भी पाबंदी लगाई जाए लेकिन दूसरे पांच मेंबर पलविंदर सिंह, बलकार सिंह, नंबरदार फकीर सिंह, अमरजीत सिंह, जगरूप सिंह रूपा ने मूर्ति उठाने से मना कर दिया। जब बात किसी तरफ न लगी तो सत्कार कमेटी ने फैसला लिया कि यहां से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप उठा लिए जाएं। देर रात ऐतिहासिक गुरुद्वारा गरना साहिब से स्पेशल गाड़ी मंगवाकर गुरुद्वारा साहिब से 20 श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को उठाकर पूरी मर्यादा के साथ गरना साहिब ले जाया गया।

गांव में 3 गुरुद्वारा साहिब
गांव में कुल तीन गुरुद्वारा साहिब हैं। एक सिंह सभा गुरुद्वारा, दूसरा रविदास महाराज का गुरुद्वारा और तीसरा यह सबसे पुराने गुरुद्वारा था जहां ताला लगा दिया गया है।

दूसरी जगह का विकल्प दिया था : सुखजीत

मीटिंग में पीर की कब्र को उखाड़ने और शराब पर पाबंदी की सहमति बन गई थी, लेकिन मूर्ति को लेकर कोई सहमति नहीं बनी। सत्कार कमेटी ने गांव वालों को यह विकल्प दिया था कि मूर्ति को कहीं और जगह बना कर स्थापित कर दिया जाए। सत्कार कमेटी के अध्यक्ष भाई सुखजीत सिंह ने कहा कि उनके लिए गुरु ग्रंथ साहिब की मर्यादा अहम है। किसी भी गुरुद्वारा साहिब में इन चीजों की अनुमति नहीं दी जाएगी और ऐसे में इस गुरुद्वारा में अगर मूर्ति रहती, तो गुरुद्वारा साहिब की मर्यादा नहीं रह सकती थी।