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दो जगह से लिया कर्ज 18 से 27 Rs. लाख हुआ सोसायटी का भी नहीं हुआ माफ, जान दी

Dainik Bhaskar

May 23, 2018, 03:55 AM IST

Rahon News - कर्ज चुकाने में असमर्थ किसानों की ओर से आत्महत्या करने का क्रम जारी है। नजदीकी गांव पल्लियां खुर्द में भी कर्ज में...

दो जगह से लिया कर्ज 18 से 27 Rs. लाख हुआ सोसायटी का भी नहीं हुआ माफ, जान दी
कर्ज चुकाने में असमर्थ किसानों की ओर से आत्महत्या करने का क्रम जारी है। नजदीकी गांव पल्लियां खुर्द में भी कर्ज में डूबे एक किसान ने सल्फॉस खाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

मृतक किसान उजागर सिंह ने कुछ साल पहले बैंक व कोआपरेटिव सोसायटी से करीब 18 लाख रुपए का कर्ज लिया था। पिछले साल आलू, फिर मटर और गेहूं की फसल खराब होने की वजह से वह कर्ज नहीं चुका सका। 18 लाख रुपए का कर्ज बढ़कर 27 लाख तक पहुंच गया था। इसी परेशानी में शनिवार रात को किसान उजागर सिंह ने अपने कुएं पर जाकर सल्फॉस निगल ली। कुछ ही देर बाद किसान ने सल्फॉस खाने की जानकारी खुद अपने भाइयों को दी। उसके तुरंत बाद परिवार वाले उजागर सिंह को नवांशहर के राजा अस्पताल में ले आएं, जहां उसकी मौत हो गई। मृतक किसान के भाई हरभजन सिंह ने बताया कि उजागर सिंह की बड़ी बेटी प्लस टू में और छोटा बेटा दसवीं का छात्र है।

पिछले साल मटर फिर आलू और गेहूं फसल हुई खराब

कई दिनों से ज्यादा परेशान था उजागर सिंह, दो-तीन दिन से चुप था

कर्ज में डूबा गांव पल्लियां का किसान उजागर पिछले छह-सात दिनों से ज्यादा परेशान था लेकिन अपनी इस परेशानी का जिक्र उजागर ने किसी के साथ भी नहीं किया था। पांचों भाई एक साथ ही खेती करते थे और जमीन भी ठेके पर एक साथ ही लेते थे लेकिन बढ़ते कर्ज के कारण उजागर परेशान था और दो-तीन दिन से चुप-चुप भी था। वह इस तरह का कदम उठाता इस बात का किसी को भी यकीन नहीं था।

ढाई एकड़ जमीन का मालिक है किसान परिवार

मृतक किसान के बड़े भाई हरभजन सिंह ने बताया कि उजागर सिंह सहित उन सभी भाइयों के पास लगभग साढ़े 12 एकड़ जमीन है। हर किसी के हिस्से ढाई-ढाई एकड़ जमीन है। हरभजन सिंह ने बताया उनका परिवार ठेके पर जमीन लेकर भी खेती करता है। उन्होंने बताया कि उजागर सिंह और उनके एक और भाई शिंगारा सिंह ने मिलकर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की राहों ब्रांच से 17 लाख रुपए कर्ज लिया था। उन्होंने बताया कि दो साल पहले जिले में मटर की फसल खराब हो गई थी, जिसमें उजागर सिंह की भी फसल थी। फिर आलू का भाव नहीं मिला और गेहूं का भी झाड़ ओलावृष्टि के कारण बहुत कम हुआ। ऐसे में उजागर सिंह बैंक से लिया कर्ज वापस नहीं कर पाए और ब्याज पर ब्याज पड़कर कर्ज 25 लाख तक पहुंच गया। सोसायटी से भी लिया कर्ज करीब एक लाख 60 हजार तक पहुंच गया था। कर्ज की कुल रकम 27 लाख रुपए हो गई थी और इसी वजह से उजागर सिंह परेशान रहता था।

उजागर सिंह की बड़ी बेटी प्लस टू में और छोटा बेटा दसवीं में पढ़ता है।

कर्ज माफी की आस भी सरकार ने तोड़ दी थी

मृतक किसान के भाई हरभजन सिंह ने कहा कि दो साल पहले जिला नवांशहर के किसानों की मटर और आलू की काफी ज्यादा फसल बुरी तरह से खराब हो गई थी। उसके बाद ओलावृष्टि के कारण गेहूं का झाड़ भी बेहद कम हुआ। हालात ये थे कि आलुओं का एक कट्टा (40 किलो) उन्हें 60 रुपए में और मटर पांच रुपए किलो के हिसाब से मंडी में बेचने पड़े थे। उन्होंने बताया कि आलू और मटर की फसल के घाटे से किसान बुरी तरह कर्ज में डूब गए थे। फिर पंजाब में बनी कांग्रेस सरकार ने किसानों के साथ वादा किया था कि उनके सभी कर्ज माफ कर दिए जाएंगे, जिससे उनमें आस जगाई थी लेकिन अब सिर्फ सोसायटियों से किसानों द्वारा लिए कर्ज ही माफ किए जा रहे हैं लेकिन उनके भाई का तो एक लाख 60 हजार का कर्ज अभी तक माफ नहीं हुआ था।

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