20 टीमों ने दिखाए सिख शस्त्र कला के जौहर दिखाए
होला महल्ला मौके बाबा बलबीर सिंह 96 करोड़ी की अगुवाई में शिरोमणि पंथ अकाली बुड्ढा दल द्वारा गुरुद्वारा गुरु का बाग छावणी निहंग सिंह बुड्ढा दल में विरसा संभाल नेशनल गतका मुकाबले करवाए गए। इसमें विभिन्न जिलों की 20 टीमों ने सिख शस्त्र कला के जौहर दिखाए। मुकाबलों के दूसरे दिन ज्ञानी हरप्रीत सिंह कार्यकारी जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब, ज्ञानी रघबीर सिंह जत्थेदार तख्त श्री केसगढ़ साहिब, शिरोमणि पंथ अकाली बुड्ढा दल के मुखी साहिब जत्थेदार बाबा बलबीर सिंह 96 करोड़ी, बाबा अवतार सिंह सुरसिंह दल पंथ विधि चंद संपरदा, बाबा गज्जण सिंह तरना दल बाबा बकाला, बाबा निहाल सिंह हरीया वेला वालों समेत अन्य अहम सख्शियतों ने शिरकत की। इस मौके शिरोमणी पंथ अकाली बुड्ढा दल ने सिख पंथ की अहम शख्सियतों को विशेष तौर पर सम्मानित किया। इनमें ज्ञानी रणजीत सिंह, मुख्य ग्रंथी बंगला साहिब दिल्ली को बुड्ढा दल के चौथे जत्थेदार बाबा जस्सा सिंह आहलुवालिया अवार्ड, डॉ. रूप सिंह मुख्य सचिव शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अमृतसर को बुड्ढा दल के तीसरे जत्थेदार नवाब कपूर अवार्ड, संत बाबा बलबीर सिंह सींचेवाल मुखी निर्मल कुटिया सींचेवाल को बुड्ढा दल के चौथे जत्थेदार नवाब कपूर सिंह अवार्ड, संत छोटा सिंह जी मुखी बुंगा मसतुआणा तलवंडी साबो बठिंडा को बुड्ढा दल के तीसरे जत्थेदार जस्ता सिंह आहलुवालिया अवार्ड, बलबीर सिंह बल पंथक कवि को बुड्ढा दल के चौथे जत्थेदार जस्सा सिंह आहलुवालिया अवार्ड, व ज्ञानी हरदीप सिंह कथावाचक आनंदपुर साहिब को विशेष सम्मान दिया गया। सम्मानित सख्शियतों को बुड्ढा दल के मुखी द्वारा श्री साहिब, दुशाला, सिरपाओ, धार्मिक पुस्तकें का सेंट, सम्मान पत्र, सम्मानित चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
मंच की सेवा प्रसिद पंथक ढाडी तरसेम सिंह मोरावाली ने निभाई। इस मौके गुरबचन सिंह पूर्व जत्थेदार श्री अकाल तख्त साहिब, बाबा मनमोहन सिंह बारनवाले, बाबा योगा सिंह करनाल वाले, बाबा वसण सिंह, बाबा नागर सिंह, दिलजीत सिंह, भाई तरसेम सिंह, बाबा मेजर सिंह, बाबा जस्सा सिंह, बाबा सुखजीत सिंह, बाबा हरप्रीत सिंह हैपी, बाबा रणजोध सिंह, भाई सुप्रीत सिंह, समेत बड़ी संख्या में निहंग सिंह सतबीर सिंह, बाबा इंद्र सिंह, बाबा मघर सिंह, बाबा तरलोक सिंह, रशपाल सिंह, बाबा अरजन सिंह, बाबा तरसेम सिंह महिता चौंक बाबा विश्व प्रताप सिंह, ज्ञानी शेर सिंह, सुखविंदर सिंह आदि उपस्थित थे।