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बचपन गरीबी में गुजरा, युवा यह न झेलें इसलिए फ्री ट्रेनिंग दी, 27 को दिलाई सरकारी नौकरी

Ropar News - अगर इंसान के मन में कुछ करने का जज्बा हो तो पिछड़े हुए क्षेत्र में भी तरक्की की जा सकती है। किसी की सहायता कर मिसाल...

Feb 10, 2020, 07:25 AM IST
Aanandpur Sahib News - childhood was spent in poverty youth did not face it so gave free training 27 got government job

अगर इंसान के मन में कुछ करने का जज्बा हो तो पिछड़े हुए क्षेत्र में भी तरक्की की जा सकती है। किसी की सहायता कर मिसाल पैदा की जा सकती है। कुछ ऐसी ही मिसाल तहसील आनंदपुर साहिब के तहत आते चंगर के इलाके के गांव नानोवाल में देखने को मिली। यहां प्राइमरी स्कूल के अध्यापक सुरजीत सिंह युवाअों के लिए किसी मसीहा से कम नहीं हैं। अब तक चंगर क्षेत्र के गरीब व आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के 27 नौजवान सुरजीत सिंह से प्रशिक्षण लेकर भारतीय सेना में भर्ती हो चुके हैं। शिक्षा विभाग पंजाब में बतौर ईटीटी अध्यापक सेवा निभा रहे सुरजीत सिंह ने बताया कि हमारा चंगर का इलाका गरीब है। यहां के नौजवान ज्यादातर सेना में भर्ती होने को ही तरजीह देते हैं। मेरी कोशिश होती है कि कोई भी युवा लिखित परीक्षा में न पिछड़े। मुझे खुशी है कि मेरे पास पढ़ने वाले 27 नौजवान देश की सेवा कर रहे हैं।

दूसरों को खुश देख लगता है मेरा मकसद पूरा हो गया : सुरजीत

सुरजीत सिंह ने खुद गरीबी झेली है इसलिए वह गरीबों का दर्द समझते हैं। वह शहीद परगन सिंह सरकारी हाई स्कूल मटौर से 10वीं, एसजीएस खालसा सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं और फिर आगे की पढ़ाई करने के बाद शिक्षा विभाग पंजाब में बतौर अध्यापक नौकरी प्राप्त कर अपने गांव में ही गरीब बच्चों को पढ़ा रहे हैं। इसके बाद ईटीटी की व 2006 में शिक्षा विभाग पंजाब में ईटीटी अध्यापक नियुक्त हुए। नौकरी में रहते हुए कोरसपोंडेंट बीए चंडीगढ़ से जबकि वर्ष 2009 में उन्होंने बी.एड की। सुरजीत का कहना है कि जब मैं अपनी पृष्ठभूमि की तरफ देखता हूं हैं तो मन में सवाल आता है कि कोई गरीबी या साधनों की कमी के कारण पढ़ने से वंचित नहीं रहना चाहिए। मेरी आत्मा को उस समय शांति मिलती है जब गरीबी, लाचारी और साधनों की कमी के कारण बेबस हुए नौजवान भर्ती परीक्षा का प्रशिक्षण लेने आते हैं क्योंकि मैं भी इसी दौर से गुजरा था इसलिए मैं बिना पैसे लिए जरूरतमंद को पढ़ाता हूं।

इन युवाओं ने प्रशिक्षण लेकर पाया रोजगार

सुरजीत सिंह से प्रशिक्षण प्राप्त कर हेम राज पुत्र योगराज गांव नानोवाल, ज्ञान चंद पुत्र नारायण दास गांव लमलैहड़ी, जसपाल सिंह गांव तारापुर, हरपाल सिंह गांव तारापुर सेना में भर्ती हुए। सुनील कुमार निवासी सद्देवाल और जसविंदर कुमार को शिक्षा विभाग में नौकरी मिली है। तारापुर के किशन सिंह तारापुर, बिक्रम, नेहाल सिंह, सुबोध कुमार, नानोवाल के विकास कुमार, भुपिंदर सिंह, जसवीर सिंह, थप्पल के भुपिंदर सिंह, लमलैहड़ी के मनजीत सिंह को ईएमएस रुड़की में नौकरी प्राप्त हो चुकी है जबकि झिंजड़ी के शशि कुमार को हिमाचल पुलिस, मनोज कुमार को सेनिटेशन विभाग में, तारापुर के विनोद और प्रभजीत सिंह को आर्मी में, समलाह के जैपाल को एमईएस में, धरोट के रविंदर को सीआरपीएफ में, धरोट के शंकर ठाकुर को आर्मी में क्लर्क, रामपुर के रिशब को आर्मी में, लमलैहड़ी के सुभाष को टीए, अप्पर बड्ढल के दविंदर, निचले बड्ढल के तेजिंदर सिंह और ठरूए के सोमनाथ को आर्मी में नौकरी हासिल हो चुकी है।


गांव नानोवाल के सरकारी अध्यापक सुरजीत युवाओं के लिए बने प्रेरणा

दूसरों को मिले प्रेरणा-बेटे को सरकारी स्कूल में पढ़ा रहे

सभी करें प्रयास तो युवा को मिलेगी सही दिशा

सुरजीत का मानना है कि युवाओं को इस दिशा में प्रोत्साहित करना सबका फर्ज है। इसके लिए हर समाजसेवी संस्था और लोगों को आगे आना चाहिए। हमें चाहिए कि हम युवाओं की शक्ति को सकारात्मक कामों में लगाएं। अगर हम युवा वर्ग को प्रोत्साहन दें और वह देश की सेवा करें तो इससे बड़ी हमारे लिए क्या खुशी हो सकती है।

आज के समय में गरीब से गरीब लोगों की तमन्ना होती है कि उनका बच्चा कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ कर शिक्षा प्राप्त करे लेकिन लोगों को सरकारी स्कूल मेंे अपने बच्चे पढ़ाने के लिए प्रेरित करने के लिए सुरजीत सिंह अपने बेटे को अपने स्कूल में ही शिक्षा दे रहे हैं। सुरजीत का मानना है कि अगर हम अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में शिक्षा दिलाएंगे तो बच्चों के अभिभावक भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिल करवाने में उत्साह दिखाएंगे। इससे सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ेगी और सरकार का शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाने का मकसद भी पूरा हो सकेगा।

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