1920 में बनाया गड्डा19-21 का भी फर्क नहीं
होला महल्ला पर्व में पहली बार करीब 100 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर गड्डा संगत की आस्था का केंद्र बना हुआ है। सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद सिंह ने भाई रूप चंद जी को भाई रूप चंद गडि्डयां के धनी का वचन दिया था। इस ऐतिहासिक गड्डे को भाई रूप चंद जी के 13वें वंश के भाई बूटा सिंह जी गांव भाई रूपा, तहसील रामपुराफूल बठिंडा से ट्रक में आनंदपुर साहिब लेकर आए हैं। इसके अलावा एक रथ व अन्य 101 ऐतिहासिक धरोहरें भी उनके घर में सुशोभित हैं। उन्होंने बताया कि अगर आज इस तरह का गड्डा तैयार करवाया जाए तो करीब 7 लाख रुपए में बनेगा। उन्होंने बताया कि वह मिठाइयों के लंगर खुद तैयार करते हैं और संगत को लंगर के रूप में वितरित करते हैं।