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भारतीय विद्वानों ने ही तिब्बत में पहुंचाया ज्ञान : दलाईलामा

तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाईलामा के भारत आगमन के 60 वर्ष पूरे होने पर शनिवार को मैक्लोडगंज के चुगलाखंग...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 03:00 AM IST

तिब्बतियों के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाईलामा के भारत आगमन के 60 वर्ष पूरे होने पर शनिवार को मैक्लोडगंज के चुगलाखंग बौद्धमठ में आगामी एक वर्ष तक चलने वाले थैंक्यू इंडिया समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति मंत्री महेश शर्मा, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव व इंडियन नेशनल कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद शांता कुमार, खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर दलाईलामा ने कहा कि भारत और तिब्बत के बीच गुरु और शिष्य का रिश्ता है। यह हजारों वर्षों से चली आ रही परंपरा व भावना से जुड़ा है। तिब्बती समुदाय ने पिछले 60 वर्षों में कई चुनौतियों का सामना किया लेकिन अपनी धर्म संस्कृति का संरक्षण कर उसे संजो कर रखा है जिसके लिए भारत का विशेष योगदान रहा है। भारतीय विद्वानों ने ही तिब्बत में ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया। नालंदा के विद्वानों ने ही 300 सूत्रों को तिब्बतियों को पढ़ाया और समझाया। हिंदु धर्म जैसा दुनिया में कोई धर्म नहीं जिसकी प्रामाणिकता वैज्ञानिक आधार पर है। हिंदु धर्म हमें करुणा और प्रेम का संदेश देता है।

मैक्लोडगंज में शुरू हुआ 1 साल तक चलने वाला थैंक्यू इंडिया कार्यक्रम

दलाई लामा के भारत में कदम रखने के समय अगुवाई करने वाले हवलदार नरेनचंद्र सम्मानित

कार्यक्रम के दौरान 5 आसाम राइफल्स के सेवानिवृत्त हवलदार नरेनचंद्रा दास को सम्मानित किया गया। सेवानिवृत हवलदार नरेनचंद्र दास ने ही दलाईलामा को 31 मार्च 1959 को अरुणाचल प्रदेश के त्वांग से भारत की भूमि पर कदम रखने के समय अगुवाई की थी।

भारत तिब्बत की आत्मा : शांताकुमार

सांसद शांता कुमार ने कहा कि भारत व तिब्बत बेशक दो देश रहे होंगे लेकिन भारत तिब्बत की आत्मा है। हमारा दर्शन एक है चिंतन एक है। उन्होंने दलाईलामा का इसलिए विशेष धन्यवाद किया कि उन्होंने धर्मशाला को न केवल अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक विशेष पहचान दिलाई है बल्कि इसे एक आध्यात्मिक तीर्थ के रूप में स्थापित किया है। गौरतलब है कि दलाईलामा के निर्वासन के 60 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित यह कार्यक्रम पहले दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित हाेना था लेकिन बाद में उसे धर्मशाला शिफ्ट कर दिया गया। ऐसा भारत के विदेश सचिव द्वारा कैबिनेट सचिव को लिखे एक पत्र के कारण हुआ। दिल्ली में कार्यक्रम की अनुमति न मिलने पर केंद्रीय तिब्बती प्रशासन व थैंक्यू इंडिया कार्यक्रम आयोजन समिति ने धर्मशाला में आयोजित किया।

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