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इंगट 23 रुपए बढ़कर 39 रुपये प्रति किलो हुआ, एक्सपोर्टर्स व टेंडरों के सप्लायर्स को घाटा

जीएसटी लागू होने के बाद दस महीने बाद अभी प्रदेश के मध्यम व छोटे कारखानों के संचालक वर्किंग कैपिटल के बाद लोहे के...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 09, 2018, 02:45 AM IST

जीएसटी लागू होने के बाद दस महीने बाद अभी प्रदेश के मध्यम व छोटे कारखानों के संचालक वर्किंग कैपिटल के बाद लोहे के बढ़ते हुए दामों के कारण संकट में हैं। जिस इंगट, स्क्रैप व पिग आयरन से लोकल इंडस्ट्री तमाम तरह का साजो सामान तैयार करती है, उसके रेट असमान पर हैं। इंगट 3 महीने में प्रति किलो 27 रुपये से बढ़कर 39 रुपये किलो हो गया है। स्टैंपिंग स्क्रैप 23 रुपये से बढ़कर 34.50 रुपये किलो हो गई है जबकि पिग आयरन साढ़े पैंतीस रुपये किलो बिक रहा है जो कि 3-4 महीने पहले 23 हजार रुपये था। लोकल इंडस्ट्री अनुसार प्रति किलो 12 रुपये तक कच्चे माल की लागत बढ़ने के बाद उन्होंने अागे जिन सरकारी उपक्रमों व एक्सपोर्ट कंपनियों से आर्डर लिये हैं, वह रेट नहीं बढ़ा रही हैं।

इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रोमोशन कौंसिल ने केंद्र सरकार से कहा है कि लोहे की कीमतें तर्कसंगत बनाने के लिए कदम उठाए। उधर, ईईपीसी के हैंडटूल पैनल के चेयरमैन अजय गोस्वामी ने कहा कि इंजीनियरिंग गुड्स इंडस्ट्री का इकोनॉमिक संकट हल करने के लिए भी काम होना चाहिए। अभी नए आर्डर होल्ड हो गए हैं। जीएसटी के बाद ये बड़ा संकट है। नि:संदेह लोहे के प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट बढ़ा है लेकिन ये फायदा सिर्फ प्राइम कंपनियों को ही हो रहा है।

3 -3 महीने चलने वाले आर्डरों में पहले मुनाफा खत्म हुअा, अब जेब से जा रहा पैसा, फैक्ट्रियों ने प्रोडक्शन घटाई

ईईपीसी ने केंद्र सरकार से कहा कि रोजाना बढ़ रहे लोहे के रेट्स को

तर्कसंगत करने के लिए कदम उठाए

इंडस्ट्री बता रही कारोबार में इस साल का सबसे बड़ा संकट

देश की बड़ी स्टील कंपनियां तो महीने में 1 बार रेट बढ़ाती हैं लेकिन सेकेंडरी स्टील सेक्टर में कई बार रेट बढ़ाए जा रहे हैं। हमने सरकार को लेटर लिखकर समस्या के हल की बात की थी। लेकिन कोई रिस्पांस नहीं आया है। अगर लोहे के रेट इसी तरह बढ़ते रहेंगे तो छोटी व मीडियम इंडस्ट्री का संकट बढ़ेगा।। -बातिश जिंदल (प्रेसिडेंट फोपसिया)

इन इंडस्ट्रियल सेगमेंट पर पड़ी दाम बढ़ने की मार

सबसे अधिक प्रभावित है एमएसएमई सेक्टर और जॉब वर्क सेक्टर लोहे के रेट बढ़ने से पाइप फिटिंग, ऑटो पार्ट्स, नट बोल्ट, स्कैफ फोल्डिंग, वाल्व एंड काक्स, सीपी फिटिंग, हैंडटूल, कंस्ट्रक्शन सेक्टर के लिए तैयार होने वाले कास्टिंग प्रोडक्ट्स (सरिया, एंगल-पत्ती) आदि। एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए जालंधर, लुधियाना, मंडी गोबिंदगढ़, फतेहगढ़ और मुक्तसर के यूनिट प्रभावित।

लोहे के रेट 3 महीने में 12 रुपये किलो रेट बढ़ चुके हैं। पहले मार्जिन कटा, फिर जेब से पैसे जाने लगे। हमने जो सप्लाई के एग्रीमेंट किए हैं, उन्हें उतने रेट पर पूरा करना ही होगा। इंडस्ट्री को चालू रखने को या तो नया कर्ज ले रहे हैं या फिर सेविंग्स भी खर्च हो रही है।। -तेजिंदर सिंह (प्रेसिडेंट गदईपुर मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन)

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