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राजीव रंजन, प्रशांत रावत| टीकमगढ़

टीकमगढ़ के विकास के लिए 20 हजार खत अफसरों को लिखे तो लोग कहने लगे चिट्‌ठी वाले दादाजी, 95 साल के भगवान दास ने ही शुरू...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 28, 2018, 02:55 AM IST

राजीव रंजन, प्रशांत रावत| टीकमगढ़
टीकमगढ़ के विकास के लिए 20 हजार खत अफसरों को लिखे तो लोग कहने लगे चिट्‌ठी वाले दादाजी, 95 साल के भगवान दास ने ही शुरू कराई थी पहली नदी-तालाब जोड़ो योजना


राजीव रंजन, प्रशांत रावत| टीकमगढ़

मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भगवानदास दुबे (95) विकास और लोगों की समस्याओं के हल के लिए अब तक 20 हजार से ज्यादा चिट्‌ठियां अफसरों को लिख चुके हैं। इन्हें टीकमगढ़ जिले में गांधीजी के नाम से पहचाना जाता है। कुछ लोग इन्हें चिट्‌ठी वाले दादाजी कहकर पुकारते हैं। चिट्‌ठी की बदौलत जिले को कई सौगातें दे चुके हैं। इनकी चिट्‌ठी का ही कमाल है कि देश की पहली नदी-तालाब जोड़ो परियोजना टीकमगढ़ के हरपुरा में शुरू हुई। एमपी-यूपी बार्डर को जोड़ने वाले पुल में भी उनका अहम योगदान है। ईमेल के दौर में भगवानदास जनप्रतिनिधि और अधिकारियों से अब भी पत्राचार करते हैं। वह 20 हजार से अधिक चिट्ठियां लिख चुके हैं। आज भी उनका जज्बा कम नहीं है। फुर्तीले इतने हैं कि युवा भी हार मान जाएं। लोगों का कहना है कि उनके घर में चिट्ठियों का अंबार लगा है। भगवानदास लंबे समय तक गांधीजी के स्वराज आंदोलन से जुड़े रहे। उस समय उन्हें डाक बांटने का काम सौंपा गया था, तभी से चिट्‌ठी लिखने में महारत हासिल है।

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से मिली थी प्रेरणा

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम आजाद के जल संचय की बात भगवानदास दुबे के दिमाग में घर कर गई। उन्होंने क्षेत्र के लोगों के लिए नदी तालाब जोड़ो योजना बनाना शुरू की। संपूर्ण दस्तावेज-नक्शा तैयार कर 12 तालाबों की सूची 2005 में एक पत्र के माध्यम से सिंचाई विभाग को भेजी। तत्कालीन सिंचाई मंत्री अनूप मिश्रा ने उनसे बातचीत की। 2007 में उनके पास सिंचाई विभाग की एक रिपोर्ट पहुंची, जिसमें बताया गया कि इन 12 तालाबों की भौगोलिक स्थिति नदी से जोड़े जाने योग्य नहीं है, यह बहुत ऊंचाई पर स्थित हैं। भगवानदास ने हार नहीं मानी। बराबर पत्र लिखते रहे। 2008 में मंत्री जयंत मलैया ने उन्हें आश्वस्त किया। इसके बाद टीकमगढ़ में 25 इंजीनियरों की टीम भेजी और प्रोजेक्ट बनाकर क्रियान्वित कराया।

भगवानदास दुबे

चिट्‌ठी बांटने पर जेल भी जा चुके

अंग्रेजी शासनकाल में एक बार डाक बांटते वक्त नौगांव में पकड़े भी गए थे। उस समय 6 माह की सजा हुई थी। भगवानदास दुबे की कर्मठता और लोकप्रियता के चलते 1972 में कांग्रेस ने टिकट का ऑफर दिया, लेकिन कभी राजनीति करने का उनके मन में विचार नहीं आया। उनका मानना था समाज के बीच ही रहकर लोगों की निस्वार्थ भाव से सेवा की जा सकती है।

इन कामों में रहा अहम योगदान

इनके द्वारा कराए गए विकास कार्य जिले तक ही सीमित नहीं रहे। इन्होंने मप्र के ग्वालियर में 700 एकड़ का आलू बीज उत्पादन केंद्र स्थापित कराने में अहम भूमिका निभाई। टीकमगढ़ जिले में एनएससी का सेंटर स्थापित कराया। एक समय जिले में ऐसा था जब कोई डीजल पंप के बारे में नहीं जानता था, तब भगवान 1950 में नदी से पानी क्षेत्र में लाने के लिए पहला डीजल पंप लेकर आए। सन 1956 में विदेशी कंपनी द्वारा निर्मित ट्रैक्टर लाकर किसानों को उपलब्ध कराया। उन्होंने अपनी सारी उम्र कृषि को लाभ का धंधा बनाने एवं किसानों के हित के कार्य करने में लगा दिया।

पहली चिट्‌ठी 1942 में लिखी

1942 में जब यहां की रियासतें अंग्रेजों के अधीन थीं। तब विरोध में पॉलीटिकल एजेंट को चिट्‌ठी लिखी थी। भगवानदास की मार्मिक चिट्ठी का इतना असर हुआ कि इसके बाद जमीन और सोना-चांदी नहीं छीनी गईं। उन्होंने 13 फरवरी 2018 को भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी। जिसमें उन्होंने हरपुरा नहर की विसंगतियों की तरफ ध्यान देने की बात कही है।

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