Hindi News »Punjab »Sangat» श्री हेमकुंट साहिब की खोज संत सोहन सिंह और हवलदार मोदन सिंह ने की थी

श्री हेमकुंट साहिब की खोज संत सोहन सिंह और हवलदार मोदन सिंह ने की थी

चमौली जिले (उत्तराखंड) की बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब के...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 07, 2018, 03:05 AM IST

चमौली जिले (उत्तराखंड) की बर्फ से ढकी पहाड़ियों के बीच 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब के रास्ते में बर्फ हटाने का काम जारी है। संगत 25 मई से दर्शन कर सकेगी। दशम ग्रंथ में वर्णित है कि सात पहाड़ियों से घिरे इस सुमेर पर्वत पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने तपस्या की थी। इस तपोस्थान की खोज संत सोहन सिंह और हवलदार मोदन सिंह ने की थी। सबसे पहले 1937 में एक झोंपड़ी बनाकर वहां श्री गुुरु ग्रंथ साहिब जी को सुशोभित किया था। 1960 में यहीं 10 वर्ग फीट का कमरा बना गुरुद्वारा साहिब का रूप दिया गया था।

गुरुद्वारा साहिब के लिए एक ऐसा स्ट्रक्चर चाहिए था जो बारिश, बर्फबारी और तुफानी हवाओं में भी खराब न हो सके। इसी को लेकर देश के आर्किटेक्चरों व सर्वेयर ने इस दुर्गम स्थान का कई बार दौरा किया। आर्किटेक्ट मनमोहन सिंह सियाली, सीपी घोष, केए. पटेल, मेजर जनरल हकीकत सिंह, साहिब सिंह, गुरशरण सिंह सहित समेत कई लोगों ने इस दुर्गम स्थान पर स्टील का पक्का स्ट्रक्चर बनाने में योगदान दिया था। 1967 में आर्किटेक्ट मनमोहन सिंह सियाली ने सहयोगियों की मदद से गुरुद्वारा स्ट्रक्चर का डिजाइन इस तरह तैयार किया जिससे इस पर बर्फीली जलवायु का कोई असर न हो। कई साल इसकी रूपरेखा तैयार करने में लग गए। उसके बाद स्ट्रक्चर निर्माण का काम दिल्ली के एक ठेकेदार को सौंपा गया था। जिसने आर्किटेक्चरों की देखरेख में इसे तैयार किया। दिल्ली के गुरुद्वारा रकाबगंज साहिब के पास पूरा स्ट्रक्चर एसेंबल किया गया। अब सबसे बड़ा चैलेंज इस स्ट्रक्चर को दुर्गम स्थान तक पहुंचाना था। स्ट्रक्चर के अलग-अलग पार्ट बनाए गए। जिसे गोविंदघाट से उबड़-खाबड़ व पथरीले रास्ते से मजदूरों ने श्री हेमकुंट साहिब तक पहुंचाया। अथक प्रयास और मेहनत के बाद स्ट्रक्चर को 14 साल के बाद 1981-82 में इंस्टाल किया गया था।

उत्तराखंड में बर्फीली पहाड़ियों के बीच इस जगह पर गुरु गोबिंद िसंह जी ने तपस्या की थी, गुरुद्वारा साहिब के दर्शन 25 मई से

45 से 50 फीट ऊंचेे ढालनुमा स्टील के स्ट्रक्चर पर हर मौसम बेअसर

तपोस्थान पर करीब 45 से 50 फीट ऊंचा दो मंजिला स्टील का स्ट्रक्चर फिट किया गया। एल्युमिनियम की प्लेट्स को इस तरह स्ट्रक्चर की छत पर फिट किया गया कि बर्फ या पानी इस पर रुकता नहीं और अपने आप नीचे आ जाता है। स्ट्रक्चर को मजूबती देने के लिए लोहे के एंगल लगाए गए हैं।

हरिद्वार व ऋषिकेश में संगत की रजिस्ट्रेशन

श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के वाइस चेयरमेन नरिंदर जीत सिंह बिंद्रा ने बताया, यात्रा के लिए उत्तराखंड सरकार ने यात्रियों की फ्री रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की है। यात्री हरिद्वार और गुरुद्वारा ऋषिकेश में अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। गुरुद्वारा ऋषिकेश के मैनेजर दर्शन सिंह ने बताया, संगत की सुविधा के लिए गोविंदघाट से गोविंदधाम तक रास्ता पहले से बेहतर बनाया गया है। यहां पानी की व्यवस्था भी की गई है।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From Sangat

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×