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हर दिन चढ़ावे में आ रहे दो लाख के सिक्के, एसजीपीसी के पास 1 करोड़ के सिक्के जमा, बैंकों ने किया लेने से इंकार

सिखों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था एसजीपीसी जिसकी गोलक में रोजाना लाखों रुपए का चढ़ावा आता है के लिए चढ़ाए गए...

Dainik Bhaskar

May 13, 2018, 03:05 AM IST
सिखों की सबसे बड़ी धार्मिक संस्था एसजीपीसी जिसकी गोलक में रोजाना लाखों रुपए का चढ़ावा आता है के लिए चढ़ाए गए सिक्के बैंकों ने लेने से किया इंकार। नोट बंदी के बाद पहले भी इस तरह की समस्या पैदा होती रही है लेकिन बैंक इसे एडजस्ट कर लेते रहे हैं। यह पहला मौका है कि जब उनकी तरफ से सिक्के लेने से साफ मना कर दिया गया है। जिसके चलते एसजीपीसी प्रबंधकों के लिए संगत द्वारा श्रद्धा से चढ़ाए सिक्कों का बड़ा भंडार संभालना यहां मुश्किल हो रहा है वहां ही करोड़ों रुपए की राशि किसी काम में नहीं आ रही। एसजीपीसी की ओर से मानवता की भलाई के लिए चलाई जा रही स्कीमों में खर्च नहीं हो रहा।

सिक्कों का वजन 100 टन

कोई भी बैंक नहीं कर रहा स्वीकार, गिनने के लिए मैन पावर की जरूरत का दिया जा रहा हवाला

एसजीपीसी की मुश्किलें; 42 लाख में रोजाना चढ़ावे में सिक्के बहुत

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंध में आने वाले श्री दरबार साहिब, गुरुद्वारा बाबा दीप सिंह जी शहीद, गुरुद्वारा थड़ा साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, गुरुद्वारा गुरु के महल, गुरुद्वारा भाई सालो व अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों की गोलक में संगत की आेर से चढ़ाए पैसे जब गिने जाते हैं तो हर रोज लगभग 42 लाख के आस आस राशि निकलती है। इसी राशि में से ही सिक्कों के रूप में 2 लाख की राशि निकलती है। यहां से ही शुरु होती है एसजीपीसी की मुश्किलें।

बैंक कैश उठाने की सहूलियत देने से भी हाथ खीचने लगे

बताते चलें कि एसजीपीसी के सभी ही बैंकों में खाते चल रहे हैं। बैंक प्रबंधकों की ओर से एसजीपीसी का खाता अपने बैंक में खुलवाने के लिए कई बार जमा राशि पर ज्यादा ब्याज देने की सहूलियत भी दी जाती है। वहीं बैंक प्रबंधन कमेटी का कैश वहां से खुद ही उठा लेने की सुविधा प्रदान करने में यहां एक मिनट की भी देरी नहीं करते थे अब सिक्कों के डर कारण कैश उठाने से भी हाथ खींचने लगे हैं।

हफ्ते में चार दिन खाेली जाती श्री दरबार साहिब की गोलक

श्री दरबार साहिब व अन्य गुरुद्वारों की गोलक हफ्ते मे 4 दिन खोल कर उसमें संगत की ओर से चढ़ाई गई राशि की गिनी जाती है। श्री दरबार साहिब के मैनेजर जसविंदर सिंह दीनपुर ने बताया कि गोलक में से निकले पैसों में लगभग हर रोज 2 लाख के सिक्के निकलते हैं। जिसमें एक,दो,पांच और दस रुपए के सिक्के होतो हैं। एसजीपीसी के सभी ही बैंकों में खाते चल रहे हैं इसके बावजूद भी सिक्के संभालना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि जल्दी ही कमेटी के अधिकारी आईआरबी को लिखेंगे।

10 हजार सिक्के का भार एक क्विंटल

एसजीपीसी प्रबंधकों की ओर से सिक्के जमा कराने को कोशिशें हो रही हैं। कोई भी बैंक इन्हें स्वीकार नहीं कर रहा। सिक्के न लेने का कारण बताया जा रहा है कि इन्हें गिनने का मैन पावर की जरूरत पढ़ेगी जबकि इन्हें उठाकर ले जाना मुश्किल है। 10 हजार सिक्के का भार एक क्विंटल हो जाता है। शिरोमणि कमेटी के पास पड़े 1 करोड़ के सिक्कों का कुल भार 100 टन बताया जा रहा है।

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