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प्रचारक पंथ में दुविधा न पैदा करें : ज्ञानी गुरबचन सिंह

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने मौजूदा हालात पर चिंता प्रकट करते हुए सिख पंथ को खानाजंगी से...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 13, 2018, 03:05 AM IST

श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने मौजूदा हालात पर चिंता प्रकट करते हुए सिख पंथ को खानाजंगी से बचने का आदेश दिया है।

उन्होंने कहा है कि सिख पंथ में सेवा, सिमरन और सिखी का प्रचार करने वाले प्रचारक टकसालों, निहंग जत्थेबंदियों, निरमले, उदासी, नानकशाही संप्रदा, राड़ा साहिब व रामपुर खेड़ा संप्रदा आदि में से ही पैदा हुए हैं, जिन्होंने सिखी के प्रचार में बहुत योगदान दिया। तब पंथ में काेई विवाद नहीं था। 1984 के बाद एक साजिश के तहत कुछ लेखकों व प्रचारकों ने कई तरह के विवाद पैदा करने की कोशिश की है। ऐसे प्रचारक सिख परंपरा, मर्यादा, अरदास, खंडे बाटे का अमृत, नितनेम, अमृत वेला, अमृत संचार की बाणियां, सरोवर, मीरी पीरी का सिद्धांत व सिख इतिहास के संबंध में विवाद पैदा कर रहे हैं। पंथ विरोधी ताकतों के बहकावे में आकर यह लोग पंथ को कमजोर करने में लगे हुए हैं। जत्थेदार ने कहा कि जाे भी प्रचारक, रागी, ढाडी व कथावाचक सिखी का प्रचार कर रहे हैं चाहे वह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमैंट कमेटी, दमदमी टकसाल व मिशनरी कॉलेजों से संबंधित हों, किसी तरह का विवादित प्रचार करने से गुरेज करें। उन्होंने सभी को सख्त हिदायत दी है कि संगत में दुविधा पैदा करने वाला विषय सार्वजनिक तौर पर नहीं छूआ जाए। अगर कोई प्रचारक ऐसा करता है तो संगत के विरोध का खुद जिम्मेदार होगा।

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