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बरगाड़ी कांड : पुलिस की गोली लगने से घायल युवक के बयान पर अज्ञात पुलिस वालों पर केस

तीन साल पहले गांव बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के बाद कोटकपूरा के मेन चौक में प्रदर्शन कर रही सिख...

Bhaskar News Network | Last Modified - Aug 09, 2018, 03:25 AM IST

बरगाड़ी कांड : पुलिस की गोली लगने से घायल युवक के बयान पर अज्ञात पुलिस वालों पर केस
तीन साल पहले गांव बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी के बाद कोटकपूरा के मेन चौक में प्रदर्शन कर रही सिख संगत पर पुलिस द्वारा चलाई गोली के मामले में अज्ञात पुलिस कर्मचारियों पर केस दर्ज किया है। यह मामला गोलीकांड में घायल एक व्यक्ति के बयान पर हुआ है। गांव घनिया के गुरुद्वारा साहिब के गांव छन्ना जिला बरनाला वासी अजीत सिंह ने बयान दिया कि 13 अक्टूबर को कोटकपूरा में बेअदबी के विरोध प्रदर्शन में वह भी शामिल था। 14 अक्टूबर 2015 को सुबह साढ़े 5 बजे शांतिमय प्रदर्शन के दौरान पाठ कर रही सिख संगत पर पुलिस ने तत्कालीन बादल सरकार के इशारे पर गोलियां और लाठियां चलाईं। एक गोली उसकी दायीं टांग को चीरती हुई बांयी टांग पर लगी। पुलिस ने उच्च अधिकारियों से आए पत्र और शिकायतकर्ता द्वारा 7 अगस्त को दिए बयान पर अज्ञात पुलिस कर्मचारियों पर हत्या की नीयत से बल प्रयोग करने के आराेप में मामला दर्ज कर कार्रवाई की है। एसपीएच दीपक ने बताया कि शिकायतकर्ता ने जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की जांच रिपोर्ट में नाम आने के बाद डीजी सुरेश अरोड़ा के आदेशों पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कार्रवाई की है।

अजीत सिंह ने बताया कि घायल हाेने पर उसे चिकित्सा सुविधा भी नहीं दिलवाई गई। इससे उसकी हालत खराब हुई तो उसे लुधियाना ले जाया गया। जहां करीब 3 महीने उपचार और करीब एक साल के आराम के बाद वह चलने लायक हुआ। उसने बताया कि इससे पहले सरकार द्वारा गठित जस्टिस जोरा सिंह आयोग व जस्टिस मारकंडे काटजू द्वारा की गई जांच के समय वह लुधियाना में होने के चलते बयान नहीं दे सका, लेकिन अब जस्टिस रणजीत सिंह आयोग द्वारा संकलित रिपोर्ट में उसके नाम होने पर ही पुलिस को उसकी याद आई।

अजीत ने बताया, आयोग की रिपोर्ट में नाम आने पर पुलिस को उसकी याद आई

14 अक्टूबर 2015 को पुलिस की गोली लगने से जख्मी अजीत िसंह। फाइल फोटो

पुलिस पर तीन साल पहले दिए बयान को गायब करने के आरोप

अजीत सिंह ने बताया कि 3 साल पहले थाना सिटी कोटकपूरा के एएसआई बलवंत सिंह और स्वर्ण सिंह लुधियाना उसका बयान लेने आए थे। उसने सारा मामला बताया था। लेकिन अब पुलिस कह रही है कि उसके पास कोई पुराने बयान नहीं हैं। जस्टिस रणजीत सिंह आयोग की जांच रिपोर्ट आने के बाद करीब एक सप्ताह पहले पुलिस अधिकारियों ने संपर्क किया, लेकिन मामला दर्ज करने के बारे में कुछ नहीं बताया। शिकायतकर्ता ने बताया कि थाना सिटी कोटकपूरा में भी पुलिस अधिकारियों ने उसके बयान दर्ज करते समय खुद को बचाने के लिए इससे पहले कोई बयान न दिए जाने की बात लिख दी, जबकि वह बार-बार कहता रहा कि थाना सिटी के दो अधिकारी घटना के कुछ दिन बाद भी उसके बयान लेकर गए थे। पुलिस अज्ञात पुलिस कर्मचारियों पर केस दर्ज कर जांच को लटकाने की नीति पर चल रही है।

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