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सिविल अस्पताल की इमारत अपग्रेड होगी पीपीपी मॉडल पर सुविधाएं जुटाएंगे : सिद्धू

एक वर्ष पहले
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सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि संगरूर सिविल अस्पताल की इमारत का नवीनीकरण कर इसे अत्याधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। अस्पताल में मरीजों के लिए सुविधाओं का भी विस्तार किया जाएगा। लोगों की जरूरतें पूरी करने के लिए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर जिला अस्पताल में सीटी स्कैन, एमआरआई, कैथ लैब के अलावा अन्य एडवांस टेस्ट उपलब्ध करवाए जाएंगे। भवानीगढ़ में उन्होंने कैबिनेट मंत्री विजय इंदर सिंगला के साथ अस्पताल और निदामपुर व फग्गूवाला की डिस्पेंसरियों का निरीक्षण किया। दोनों मंत्रियों ने वहां दाखिल मरीजों और लोगों की समस्याएं सुनीं। सिद्धू ने कहा कि राज्य सरकार सरकारी अस्पतालों में मरीजों के लिए दवाओं की कोई कमी नहीं रहने दी जाएगी। भवानीगढ़ अस्पताल को सब डिवीजन अस्पताल के तौर पर अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें 50 बेडों के साथ-साथ 10 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की टीम होगी। स्टाफ की कमी को दूर किया जाएगा। स्कैन सेंटर जैसी आधुनिक सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। इस अस्पताल के लिए केंद्र से ट्रॉमा सेंटर मंजूर करवाने की कोशिश जारी है। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि नदामपुर मिन्नी पीएचसी में भी स्टाफ की कमी दूर कर जरूरी दवाएं भेजी जाएं। चन्नो में भी हेल्थ सेंटर जल्द स्थापित किया जाएगा। इस मौके पर एडीसी राजेश त्रिपाठी, एसडीएम अंकुर महिंदरू, एसएमओ प्रवीन कुमार, गर्ग, वरिंदर कुमार पनवा, प्रदीप कुमार कद, कपिल देव गर्ग, विपन कुमार, जगमीत सिंह भोला उपस्थित थे।

टाटा कैंसर अस्पताल में आयुष्मान भारत सरबत सेहत बीमा योजना के तहत मरीजों को मिलेगा इलाज

इस दौरान सेहत मंत्री ने कैबिनेट मंत्री विजय इन्दर सिंगला की मौजूदगी में टाटा मैमोरियल कैंसर अस्पताल में आयुषमान भारत सरबत सेहत बीमा योजना को शुरू किया। इससे कैंसर अस्पताल में आने वाले मरीजों का अब 5 लाख तक का मुफ्त उपचार शुरू हो जाएगा। इससे पहले कैंसर राहत योजना के तहत मरीज को डेढ लाख रुपए तक का उपचार ही मिलता था।

अस्पताल में डॉक्टरों की कमी बड़ा मुद्दा

सिद्धू ने माना है कि पंजाब के सरकारी अस्पतालों में अस्पताल स्तर और सरकार स्तर पर अभी कई कमियां है। जिसके तहत अस्पतालों में सफाई, स्टाफ और डाक्टरों की कमी सबसे बड़ा मुद्दा है। सरकार डाक्टरों की भर्ती कर रही है परंतु सरकार के सामने डाक्टरों की कमी बहुत सामने आ रही है। ऐसे में प्रशासनिक कार्यों पर लगाए गए डाक्टरों को भी अस्पतालों में काम लिया जा रहा है।

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