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आवास की आस में चली गईं जानें

एक वर्ष पहले
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यहां के वार्ड 20 में दीपक कुमार अपने माता-पिता, प|ी व दो मासूम बच्चों के साथ एक कमरे में 15 वर्षों से रह रहा था। उसके मकान में एकमात्र कमरा ही बना हुआ था, छत पर डाट डाली गई थी अाैर परिवार की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। इसलिए मकान की मरम्मत करने की भी हिम्मत वह नहीं जुटा पा रहा था। शुक्रवार की बारिश के कारण छत से पानी रिसने-टपकने लगा। बारिश ने खस्ताहाल मकान की छत काे अाैर कमजाेर कर दिया, जिसके कारण उसने छत पर मिट्टी डालकर खानापूर्ति कर दी। यह दूसरी बात है कि उसने पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान की मरम्मत करने के लिए फार्म भरे थे। ग्रांट मंजूर कराने के लिए वह सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर थक गया था अाैर मदद नहीं मिली। आखिरकार, घर की मरम्मत ठीक करने की उम्मीद परिवार की मौत के साथ दफन हाे गई।

दीपक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। उसी की कमाई पर परिवार का गुुजारा होता था। दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। दीपक का बड़ा बेटा वव्वी पहली व छोटा बेटा नवी यूकेजी कक्षा में पढ़ता था। इन चाराें की मौत होने के कारण दीपक के माता-पिता कृष्णा देवी-बलबीर सिंह पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। छत रही नहीं, रोजी-रोटी का सवाल अपनी जगह अाैर अब छत बन भी गई ताे उसके क्या मायने?

खैर, रविवार काे दोपहर बाद बस स्टैंड के पास श्मशानघाट में चारों शवाें का अंतिम संस्कार किया गया। चारों चिताएं एक साथ जलती देख दीपक के पिता बलबीर व माता कृष्णा देवी का रो-रोकर बुरा हाल था। रिश्तेदार व पड़ोसी दोनों को बड़ी मुश्किल से संभाल रहे थे।

बुजुर्ग मां-बाप का छिना सहारा

आवास योजना का लाभ लेने के लिए सरकारीदफ्तरों के चक्कर काट-काटकर थक गया थापरिवार, सर्वे भी हाे गया था, पर पैसा नहीं मिला

(ऊपर) बेटे की मृत देह को आखिरी बार देखता पिता बलबीर सिंह। (नीचे) विलाप करती मां कृष्णा देवी को संभालते लोग।

डीसी व दामन बाजवा ने 1-1 लाख देने का किया एलान

हादसे पर दुख जताते हुए डीसी घनश्याम थोरी ने जिला प्रशासन द्वारा संचालित पहल सोसायटी की तरफ से पीड़ित परिवार को 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने का एलान किया। डीसी ने कहा कि जिला प्रशासन एनडीआरएफ की गाइडलाइंस के अनुसार केस तैयार कर सरकार को भेजा जाएगा। वहीं, कांग्रेस की हल्का इंचार्ज सचिव दामन थिंद बाजवा ने भी पीड़ित परिवार को 1 लाख रुपए देने की घाेषणा की अाैर परिवार को 50 हजार रुपए की राशि भेंट की।

विभागीय टीम कर चुकी सर्वे 300 केस अभी लंबित

वार्ड 20 के पार्षद रिशीपाल के अनुसार, उनके वार्ड में ज्यादातर लोग गरीबी रेखा से नीचे वाले रहते हैं। उन्होंने मकान बनवाने करने के लिए पीएम आवास योजना के तहत दीपक सहित करीब 300 लोगों के फार्म भरे थे। चंडीगढ़ से विभाग की टीम घरों का सर्वेक्षण भी कर गई थी, परंतु किसी भी परिवार को अब तक योजना का लाभ नहीं मिल पाया। विभाग का तर्क है कि लोगों के पास अपनी जगह की िमल्कियत नहीं है, जिसके कारण सबके केस लंबित हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकार इस मामले का कोई समाधान तलाशकर लाेगाें काे योजना का लाभ दिलवाए।
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